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Kushinagar News: लोकल फॉल्ट में परमिशन का नया पेंच, घंटों इंतजार को लोग मजबूर

Sun, 21 Jun 2026 01:43 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Sun, 21 Jun 2026 01:43 AM IST
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New permission hurdle for local faults; people forced to wait for hours.
बिजली उपकेंद्र।
पडरौना। चिलचिलाती धूप व उमस भरी गर्मी के बीच बिजली निगम के नए नियम ने लोगों की मुसीबत बढ़ा दी है। अब किसी भी इलाके में लोकल फॉल्ट होने पर बिजली कर्मचारी सीधे काम शुरू नहीं कर पा रहे हैं, बल्कि उन्हें निगम के उच्च अधिकारियों से शटडाउन और वर्क परमिट की ऑनलाइन व कागजी अनुमति लेनी पड़ रही है। इस नए पेंच के कारण फॉल्ट ढूंढने और उसे ठीक करने की प्रक्रिया में घंटों की देरी हो रही है। ऐसे में फॉल्ट ठीक होने तक उस क्षेत्र के लोगों को मुसीबत झेलनी पड़ रही है। इसके अलावा 18 से 24 घंटे निर्बाध बिजली के आपूर्ति दावों के विपरीत, देहात से लेकर शहर तक 8-10 घंटे भी निर्बाध सप्लाई नहीं मिल पा रही है।
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बिजली निगम ने सुरक्षा और मॉनिटरिंग के नाम पर फॉल्ट सुधारने के लिए परमिशन की जो नई व्यवस्था लागू की है, उससे सहूलियत की जगह गर्मी में फॉल्ट होने के बाद परेशानी दो गुनी हो गई है। जबकि पहले निगम के जेई स्तर से ही फॉल्ट आदि को ठीक करा दिया जाता था।
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पंखा और कूलर की चाल हुई सुस्त, ट्रिपिंग से नहीं मिल रही निजात
निगम के तमाम दावों के बावजूद ओवरलोडिंग, लो वोल्टेज व ट्रिपिंग की समस्या खत्म नहीं हो रही है। इसके चलते पड़ रही उमस भरी भीषण गर्मी में लोगों की परेशानी कम नहीं हो रही है। हालात यह है कि घरों में लगे पंखे व कूलर अपनी पूरी रफ्तार के साथ नहीं चल पा रहे हैं। ऐसे में राहत देने वाले बिजली के उपकरण बेमतलब साबित हो रही हैं। यही नहीं दिन व रात ट्रिपिंग का खेल चल रहा है। निगम के कर्मचारी इसको लेकर बता रहे हैं कि उपर से ही रोस्टर जारी है। स्थानीय स्तर से इस दूर नहीं किया जा सकता है।
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आठ से 10 घंटे भी निर्बाध आपूर्ति नहीं
जिले में शहर में 24 घंटे, तहसील क्षेत्र में 22 व गांवों में 18 घंटे बिजली आपूर्ति करने के शेडयूल निर्धारित है। निगम के जिम्मेदार इस शेडयूल के मुताबिक आपूर्ति देने की बात कह रहे हैं, लेकिन धरातल पर हालात विपरीत है। जबकि पारा 41 से 42 डिग्री सेल्सियस है। ऐसे में बिजली की मांग बढ़ गई है। लेकिन निगम की अव्यवस्था के चलते निर्बाध आपूर्ति किसी तरह से 8-10 घंटे ही हो रही है। इस तरह से शहर से देहात तक चारों ओर बिजली को लेकर हाहाकार मचा हुआ है।

- मेंटिनेंश के मामले में थोड़ी गुंजाइश है, लेकिन ज्यादा खराबी आने या केबल जलने पर ऑनलाइन एस्टीमेट के साथ जेई को रिपोर्ट भेजनी रहती है। एक्सईएन स्तर से इसके लिए अ्रप्रूवल दिया जाता है। इस प्रक्रिया को पूरा करने में थोड़ा समय लगता है, लेकिन पादर्शिता बनी रहती है। तापमान बढ़ने के चलते बिजली की खपत और लोड बढ़ा है। इसके चलते थोड़ी दिक्कत आ रही है। जले हुए ट्रांसफॉर्मर 24 घंटे के अंदर बदल दिए जा रहे हैं। अगर कही से लापरवाही हो रही है तो उसकी जांच करा ली जाएगी।
राकेश मोहन, अधीक्षण अभियंता, बिजली वितरण निगम कुशीनगर
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