{"_id":"6aaaecb2fcf25f0e530c93a0","slug":"legal-notice-to-dm-and-cmo-kushinagar-news-c-205-1-ksh1049-168131-2026-09-17","type":"story","status":"publish","title_hn":"Kushinagar News: डीएम और सीएमओ को कानूनी नोटिस","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Kushinagar News: डीएम और सीएमओ को कानूनी नोटिस
विज्ञापन
पडरौना। डीएम और सीएमओ को संविदा स्टाफ नर्स अलका राय के खिलाफ फर्जी दस्तावेजों के आधार पर नौकरी करने के मामले में उचित कार्रवाई नहीं करने पर हाईकोर्ट लखनऊ के अधिवक्ता अजीत कुमार के माध्यम से कानूनी नोटिस भेजा गया है। गोरखपुर जिले के एम्स थाना क्षेत्र के रुद्रापुरा गांव के कुसम्ही टोला बाजार निवासी शिकायतकर्ता शेषनाथ जायसवाल ने आरोप लगाया है कि उन्होंने छह अगस्त 2026 को साक्ष्यों के साथ डीएम और सीएमओ कार्यालय में पत्र सौंपा था।
पत्र में संविदा स्टाफ नर्स अलका राय पर फर्जी अनुभव प्रमाण पत्र, जाली और अधूरा अनुबंध शपथ पत्र और अनिवार्य मिडवाइफ काउंसिल ऑफ इंडिया से रजिस्ट़्रेशन के बिना कार्य कराने के गंभीर आरोप लगाया था।
नोटिस में शिकायकर्ता के अधिवक्ता ने इतने साक्ष्य देने के बावजूद विभाग की ओर से अलका राय के विरुद्ध अब तक न तो विभागीय कार्रवाई की गई और न ही प्राथमिकी दर्ज की गई। कानूनी नोटिस के माध्यम से डीएम और सीएमओ से मामले में बिंदुवार की गई कार्रवाई और गठित तीन सदस्यीय समिति की जांच रिपोर्ट सात दिनों के अंदर मांगी गई है। नोटिस में चेतावनी दी गई है कि यदि निर्धारित समय में संतोषजनक जानकारी व कार्रवाई नहीं की जाती है तो यह मान लिया जाएगा कि विभाग आरोपी कर्मचारी को बचाने का प्रयास कर रहा है।
विज्ञापन
विज्ञापन
पत्र में संविदा स्टाफ नर्स अलका राय पर फर्जी अनुभव प्रमाण पत्र, जाली और अधूरा अनुबंध शपथ पत्र और अनिवार्य मिडवाइफ काउंसिल ऑफ इंडिया से रजिस्ट़्रेशन के बिना कार्य कराने के गंभीर आरोप लगाया था।
विज्ञापन
नोटिस में शिकायकर्ता के अधिवक्ता ने इतने साक्ष्य देने के बावजूद विभाग की ओर से अलका राय के विरुद्ध अब तक न तो विभागीय कार्रवाई की गई और न ही प्राथमिकी दर्ज की गई। कानूनी नोटिस के माध्यम से डीएम और सीएमओ से मामले में बिंदुवार की गई कार्रवाई और गठित तीन सदस्यीय समिति की जांच रिपोर्ट सात दिनों के अंदर मांगी गई है। नोटिस में चेतावनी दी गई है कि यदि निर्धारित समय में संतोषजनक जानकारी व कार्रवाई नहीं की जाती है तो यह मान लिया जाएगा कि विभाग आरोपी कर्मचारी को बचाने का प्रयास कर रहा है।
विज्ञापन