{"_id":"6a99cb3cd19d821fad084d85","slug":"krishna-devotees-from-abroad-will-come-to-kushinagar-kanhas-name-will-echo-kushinagar-news-c-205-1-deo1003-167145-2026-09-04","type":"story","status":"publish","title_hn":"Kushinagar News: 32 साल बाद दूसरी बार गूंजेगा पुलिस लाइन में कान्हा का जन्मोत्सव","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Kushinagar News: 32 साल बाद दूसरी बार गूंजेगा पुलिस लाइन में कान्हा का जन्मोत्सव
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
कुशीनगर। पुलिस के लिए 32 साल से मनहूस मानी जाने वाली श्री कृष्ण जन्माष्टमी दूसरी बार फिर खुशियों के साथ आई है। पचरूखिया कांड के बाद पुलिस लाइंस समेत जिले के सभी थानों में कृष्ण जन्मोत्सव नहीं मनाया जाता था। इस वर्ष पुलिस एसपी केशव कुमार के नेतृत्व में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी मनाएगी। कई थानों में बृहस्पतिवार को रामचरितमानस का पाठ भी शुरू हो गया है। पिछले साल एसपी संतोष कुमार मिश्रा ने थानों को परंपरागत तरीके से जन्माष्टमी मनाने की शुरुआत की थी।
देवरिया जिले के हिस्से को अलग कर 13 मई 1994 को कुशीनगर जिला बना था। 29 अगस्त 1994 को जन्माष्टमी के दिन पचरूखिया गांव में जंगल पार्टी के डकैतों से मुठभेड़ के दौरान छह पुलिसकर्मी शहीद हो गए थे। इस घटना के बाद जन्माष्टमी पुलिस विभाग के लिए त्रासदी की याद बन गई। तभी से जिले के थानों में कृष्ण जन्मोत्सव मनाने की परंपरा बंद कर दी गई थी। नवसृजित जिले के पहले ही साल जन्माष्टमी को लेकर पुलिस महकमे में खासा उत्साह था। पुलिस लाइंस से लेकर थानों तक श्रीकृष्ण जन्मोत्सव की तैयारियां चल रही थीं। इसी बीच 29 अगस्त की रात पचरूखिया कांड ने पूरे जिले को हिला दिया।
पडरौना कोतवाली पुलिस को सूचना मिली थी कि बिहार और पूर्वी उत्तर प्रदेश में सक्रिय जंगल पार्टी के डकैत बेचू मास्टर और रामप्यारे कुशवाहा उर्फ सिपाही पचरूखिया के ग्राम प्रधान राधाकृष्ण गुप्त के घर डकैती और हत्या की साजिश रच रहे हैं। तत्कालीन कोतवाल योगेंद्र प्रताप सिंह ने इसकी सूचना एसपी बुद्धचंद को दी। एसपी के निर्देश पर पुलिस की दो टीमें गठित कर डकैतों की धरपकड़ के लिए भेजी गईं। तत्कालीन सीओ पडरौना आरपी सिंह के नेतृत्व में एक टीम और एसओ तरयासुजान अनिल पांडेय के नेतृत्व में दूसरी टीम बांसी नदी के किनारे पहुंची।
विज्ञापन
सूचना थी कि डकैत नदी के दूसरी ओर पचरूखिया गांव में छिपे हैं। स्थानीय नाविक भुखल की डेंगी से पुलिसकर्मियों को नदी पार कराया गया। पहली खेप नदी पार कर लौट आई लेकिन दूसरी टीम के नदी के बीच पहुंचते ही जंगल पार्टी के डकैतों ने बम विस्फोट और ताबड़तोड़ फायरिंग शुरू कर दी। गोली लगने से नाविक भुखल और सिपाही विश्वनाथ यादव घायल हो गए। डेंगी अनियंत्रित हुई तो उसमें सवार पुलिसकर्मी नदी में गिर पड़े। बदमाश लगातार फायरिंग करते रहे।
छह जवानों समेत नाविक की हुई थी मौत
घटना की जानकारी मिलने के बाद बड़ी संख्या में पुलिस बल मौके पर पहुंचा और नदी में तलाश शुरू हुई। रेस्क्यू के दौरान एसओ अनिल पांडेय, एसओ कुबेरस्थान राजेंद्र यादव, आरक्षी नागेंद्र पांडेय, पडरौना में तैनात आरक्षी खेदन सिंह, विश्वनाथ यादव और परशुराम गुप्त के शव मिले। नाविक भुखल भी मारा गया था। दारोगा अंगद राय और आरक्षी लालजी यादव, श्यामा शंकर राय और अनिल सिंह इस घटना में बच गए थे। पुलिस के हथियार नदी से बरामद हो गए थे, हालांकि तत्कालीन एसओ अनिल पांडेय की पिस्तौल का आज तक पता नहीं चल सका।
श्रीकृष्ण जन्माष्टमी धूमधाम से मनाई जा रही है। इसकी तैयारी चल रही है। पुलिस लाइंस के अलावा सभी थानों पर भी इसकी तैयारियां जोरों पर हैं।
- केशव कुमार, एसपी, कुशीनगर
विज्ञापन
देवरिया जिले के हिस्से को अलग कर 13 मई 1994 को कुशीनगर जिला बना था। 29 अगस्त 1994 को जन्माष्टमी के दिन पचरूखिया गांव में जंगल पार्टी के डकैतों से मुठभेड़ के दौरान छह पुलिसकर्मी शहीद हो गए थे। इस घटना के बाद जन्माष्टमी पुलिस विभाग के लिए त्रासदी की याद बन गई। तभी से जिले के थानों में कृष्ण जन्मोत्सव मनाने की परंपरा बंद कर दी गई थी। नवसृजित जिले के पहले ही साल जन्माष्टमी को लेकर पुलिस महकमे में खासा उत्साह था। पुलिस लाइंस से लेकर थानों तक श्रीकृष्ण जन्मोत्सव की तैयारियां चल रही थीं। इसी बीच 29 अगस्त की रात पचरूखिया कांड ने पूरे जिले को हिला दिया।
विज्ञापन
पडरौना कोतवाली पुलिस को सूचना मिली थी कि बिहार और पूर्वी उत्तर प्रदेश में सक्रिय जंगल पार्टी के डकैत बेचू मास्टर और रामप्यारे कुशवाहा उर्फ सिपाही पचरूखिया के ग्राम प्रधान राधाकृष्ण गुप्त के घर डकैती और हत्या की साजिश रच रहे हैं। तत्कालीन कोतवाल योगेंद्र प्रताप सिंह ने इसकी सूचना एसपी बुद्धचंद को दी। एसपी के निर्देश पर पुलिस की दो टीमें गठित कर डकैतों की धरपकड़ के लिए भेजी गईं। तत्कालीन सीओ पडरौना आरपी सिंह के नेतृत्व में एक टीम और एसओ तरयासुजान अनिल पांडेय के नेतृत्व में दूसरी टीम बांसी नदी के किनारे पहुंची।
विज्ञापन
सूचना थी कि डकैत नदी के दूसरी ओर पचरूखिया गांव में छिपे हैं। स्थानीय नाविक भुखल की डेंगी से पुलिसकर्मियों को नदी पार कराया गया। पहली खेप नदी पार कर लौट आई लेकिन दूसरी टीम के नदी के बीच पहुंचते ही जंगल पार्टी के डकैतों ने बम विस्फोट और ताबड़तोड़ फायरिंग शुरू कर दी। गोली लगने से नाविक भुखल और सिपाही विश्वनाथ यादव घायल हो गए। डेंगी अनियंत्रित हुई तो उसमें सवार पुलिसकर्मी नदी में गिर पड़े। बदमाश लगातार फायरिंग करते रहे।
छह जवानों समेत नाविक की हुई थी मौत
घटना की जानकारी मिलने के बाद बड़ी संख्या में पुलिस बल मौके पर पहुंचा और नदी में तलाश शुरू हुई। रेस्क्यू के दौरान एसओ अनिल पांडेय, एसओ कुबेरस्थान राजेंद्र यादव, आरक्षी नागेंद्र पांडेय, पडरौना में तैनात आरक्षी खेदन सिंह, विश्वनाथ यादव और परशुराम गुप्त के शव मिले। नाविक भुखल भी मारा गया था। दारोगा अंगद राय और आरक्षी लालजी यादव, श्यामा शंकर राय और अनिल सिंह इस घटना में बच गए थे। पुलिस के हथियार नदी से बरामद हो गए थे, हालांकि तत्कालीन एसओ अनिल पांडेय की पिस्तौल का आज तक पता नहीं चल सका।
श्रीकृष्ण जन्माष्टमी धूमधाम से मनाई जा रही है। इसकी तैयारी चल रही है। पुलिस लाइंस के अलावा सभी थानों पर भी इसकी तैयारियां जोरों पर हैं।
- केशव कुमार, एसपी, कुशीनगर