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Kushinagar News: एसडीएम की जांच में अवैध मिला अस्पताल, किया गया सील

Tue, 01 Aug 2023 11:21 PM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Tue, 01 Aug 2023 11:21 PM IST
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Illegal hospital found in SDM investigation, sealed
पूजा अस्पताल में नवजात की मौत के बाद डीएम ने बैठाई थी जांच, सीएमओ दफ्तर के बाबू की शह पर संचालित हो रहा था अस्पताल
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संवाद न्यूज एजेंसी

हाटा। अवैध तरीके से संचालित हो रहे नगर के पूजा अस्पताल को एसडीएम ने मंगलवार को सील कर दिया। नवजात की मौत के बाद डीएम के निर्देश पर हुई जांच में इसका खुलासा हुआ। चर्चा है कि सीएमओ कार्यालय में नर्सिंग होम रजिस्ट्रेशन का पटल देखने वाले बाबू की सह पर अस्पताल संचालित हो रहा था। क्यों कि अफसरों के सामने बार-बार संचालक बाबू का नाम ले रहा था।
रामकोला थाना क्षेत्र के सिधावें गांव के रइयापार टोला की निवासी सुनील यादव की पत्नी शीतल नगर के वार्ड नंबर पांच में रिश्तेदार के घर आई थी। 28 जुलाई की रात को प्रसव पीड़ा होने पर घर वाले नगर के पूजा अस्पताल में लेकर पहुंचे। रात को ऑपरेशन के दौरान नवजात की मौत हो गई। तीमारदारों की हंगामा पर रात में पुलिस पहुंची और संचालक को कोतवाली ले गई। बाद में छोड़ दिया। डीएम रमेश रंजन ने मामले को गंभीरता से लिया और हाटा एसडीएम हीरालाल को जांच का निर्देश दिया। एसडीएम की जांच में अस्पताल का रजिस्ट्रेशन समाप्त हो गया था। जिन डॉक्टरों का बोर्ड लगा था। वह भी नहीं मिले। संचालक बार-बार एसडीएम से सीएमओ कार्यालय के प्राइवेट नर्सिंग होम पंजीकरण का पटल देखने वाले बाबू का नाम ले रहा था। लेकिन एसडीएम ने एक नहीं सुनी। मंगलवार को एसडीएम हीरालाल ने नायब तहसीलदार आशीष रंजन, डॉ. प्रशांत मल्ल, लेखपाल हरिश्चन्द्र सिंह, संजीवन मिश्रा, रामेन्द्र मणि त्रिपाठी पहुंचे और अस्पताल को सील किया। एसडीएम ने बताया कि जांच में अस्पताल का रजिस्ट्रेशन समाप्त मिला। जिन डॉक्टरों के नाम पर रजिस्ट्रेशन था। वह डॉक्टर भी नहीं मिले। इसकी रिपोर्ट डीएम को भेज दी गई है।
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चर्चा में आया सीएमओ कार्यालय का बाबू
जिले में बिना रजिस्ट्रेशन अस्पताल का संचालन सीएमओ कार्यालय में तैनात बाबू की मेहरबानी से हो रहा है। इसमें स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदारों की भी मिलीभगत है। इसके पूर्व भी ऐसे कई मामले आ चुके हैं। लेकिन कार्रवाई के नाम पर स्वास्थ्य विभाग की ओर से सिर्फ खानापूर्ति की जाती है। पूजा अस्पताल सील करने के दौरान सीएमओ कार्यालय के बाबू का नाम चर्चा में आया है। इसकी गैर विभागीय कर्मचारियों से जांच कराई जाए, तो अवैध अस्पतालों का भंडाफोड़ हो सकता है।
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