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Kushinagar News: आईएलएस इंस्टाॅलेशन में मकान बना रोड़ा...इसके बाद यात्रियों की होगी चुनौती
Wed, 05 Mar 2025 12:06 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
Updated Wed, 05 Mar 2025 12:06 AM IST
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पडरौना/कसया। अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट कुशीनगर से उड़ान को लेकर विमानन कंपनियों की ओर से तैयार होने के बावजूद उड़ान नहीं हो पा रही है। कोहरे और रात के समय में कम विजिबिलिटी में भी लैंडिंग और टेकऑफ के लिए लग रहे आईएलएस (इंस्ट्रूमेंट लैंडिंग सिस्टम) के निर्माण में एक छोर का रास्ता साफ होने के बाद अब दूसरे छोर पर दो मकान रोड़ा बन रहे हैं। इंस्टाॅलेशन में पेंच आ रहा है। अगर सब कुछ सही हो जाता है तो इसके बाद एयरपोर्ट अथॉरिटी को यात्रियों को भी इकट्ठा करने की चुनौती होगी।
एयरपोर्ट अथाॅरिटी जिला प्रशासन आईएलएस इंस्टाॅलेशन में आ रही बाधा को दूर करने में लगा हुआ है। इन बाधाओं को दूर करने के बाद ही इंस्ट्रूमेंट लैंडिंग सिस्टम इंस्टाल हो सकेगा और फिर यहां से उड़ान भरने की रुचि ले रही विमानन कंपनियां महानगरों के उड़ान के लिए तिथियां और टिकट विंडो खोलेंगी। यात्रियों की उपलब्धता के बाद यहां से उड़ान संभव हो सकेगी।
कुशीनगर इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर अंतरराष्ट्रीय मानक को पूरा करने के लिए आईएलएस सिस्टम लगाया जा रहा है। इसके लग जाने के बाद विमान किसी भी मौसम और किसी भी समय में लैंडिंग और टेकऑफ सुरक्षित कर सकेगी। इसके लिए लोकलाइजर का काम पूरा हो गया है तो वही केवल ग्लाइड पथ का काम अधूरा है। इसको पूरा करने के लिए इसमें आ रहे अवरोध को दूर करने में जिला प्रशासन और एयरपोर्ट अथॉरिटी प्रयासरत हैं। विमान के लैंडिंग के समय दिशा देने के लिए एयरपोर्ट के पश्चिमी छोर वन-वन से उड़ान की सभी अवरोध दूर हो चुका है तो वहीं पूर्वी छोर के रनवे संख्या टू-नाइन पर दो मकान का रोड़ा बना हुआ है। जानकारों की कहना है कि जब तक यह दो मकान नहीं हटेंगे तब तक ग्लाइड पथ का काम पूरा नहीं हो सकेगा। इसके पूरा होने के बाद ही एयरपोर्ट का भी वीएफआर से आईएफआर होने की प्रक्रिया पूरा होगी। उसके बाद ही विमानन कंपनियों की ओर से यहां से उड़ान भरने में रुचि बढ़ेगी।
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इधर, डीएम की ओर से दोनों मकानों को हटाने के लिए हाईकोर्ट में लगातार प्रयास चल रहा है। इसके हटने के बाद ही यह आईएलएस सिस्टम पूरी तरह इंस्टाॅल हो सकेगा। इंस्टाॅलेशन के बाद अगर विमानन कंपनियां उड़ान भरने के लिए तैयार भी हो गईं तो यात्रियों को इकट्ठा करना भी उनके लिए बड़ी चुनौती होगी, क्योंकि जिन स्थानों और महानगरों से एयरपोर्ट के माध्यम से उड़ान कराने की योजना है, वहां तक के लिए यात्री बेहद कम है। संभव है कनेक्टिंग फ्लाइट से इस दिक्कत को दूर कर हवाई सेवाओं का संचालन हो।
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आईएलएस के तहत दूसरे चरण के कार्य अधूरे
-आईएलएस उपकरण के इंस्टाॅलेशन में महत्वपूर्ण कार्य विमान के सेंटर लाइन को इंडिकेट करना वाला लोकलाइजर और इलेक्ट्रिक कार्य हैं। यह पूरा हो चुका है। दूसरे चरण में विमानों को एंगल बताने वाला ग्लाइड पथ का कार्य होना है। ग्लाइड पथ के लोकेशन के निर्धारण करने में दो मकान और कुछ शेष टाॅवर ही अवरोध बने हुए हैं। इसके हटे बिना यह आईएलएस पूर्ण नहीं हो सकता है। इन अवरोधों की वजह से यहां विमानन कंपनियां उड़ान भरने में रुचि नहीं ले रहीं हैं, लेकिन यह अवरोध दूर होने के साथी ही विमानन कंपनियों का यहां से उड़ान भरने के लिए हरी झंडी मिल सकती है।
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बढ़ती जा रही कुशीनगर एयरपोर्ट की मुश्किलें
- बिहार के बजट में सोमवार को पड़ोसी प्रांत पश्चिम चंपारण के वाल्मिकीनगर स्थित एयरपोर्ट के विस्तार के लिए बजट में बात की गई। इसके अलावा पड़ोसी जनपद गोपालगंज के सबेया एयरपोर्ट की भी चहारदीवारी का काम शुरू हो गया है। इधर, गोरखपुर एयरपोर्ट के विस्तार और नंदा नगर में रनवे और टर्मिनल के निर्माण से कुशीनगर के लोगों की धड़कनें बढ़ रही हैं। लोगों का मानना है कि एयरपोर्ट बिहार के पड़ोसी इलाके पश्चिम चंपारण, गोपालगंज के अलावा गोरखपुर मंडल के देवरिया, महाराजगंज के लोगों पर निर्भर था। लगातार पास के इलाकों में एयरपोर्ट के विस्तार से कुशीनगर एयरपोर्ट से फ्लाइट संचालन पर ग्रहण लगता दिख रहा है।
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क्या है ग्लाइड पथ
-ग्लाइड पथ किसी भी विमान के लैंडिंग दृष्टिकोण का एक महत्वपूर्ण तत्व है। यह एक आदर्श अवरोही पथ है, जिसका अनुसरण विमान रन-वे पर आसानी से उतरने के लिए करता है। इसके सहारे विमान की सुरक्षित लैंडिंग होती है। ग्लाइड पथ का पालन किए बिना रन-वे से आगे निकल जाने या बहुत कम दूरी पर उतरने का खतरा होता है। ग्लाइड पथ लैंडिंग के साथ टेकऑफ के लिए आवश्यक होता है।
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तीन चरण में गति देने का ध्येय, लेकिन नाकाम
-जिले के सांसदों और विधायकों ने एयरपोर्ट के लिए अपने हर संभव प्रयास कर लिए हैं। सांसद शशांक मणि त्रिपाठी ने बताया कि हमारा ध्येय एयरपोर्ट पर पहले दो चरण में डोमेस्टिक और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के साथ तीसरे चरण में कार्गो (समान ढुलाई) के उड़ान का भी प्रयास कर रहे हैं।
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कोट
आईएलएस सिस्टम लगाने में दो मकान का अवरोध आ रहा है। इसको दूर करने के लिए जिला प्रशासन लगातार प्रयास कर रहा है। बहुत जल्दी बाधा दूर कर ली जाएगी और हवाई सेवाओं का संचालन होगा।
-प्राणेश कुमार राय, डायरेक्टर, कुशीनगर एयरपोर्ट
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एयरपोर्ट अथाॅरिटी जिला प्रशासन आईएलएस इंस्टाॅलेशन में आ रही बाधा को दूर करने में लगा हुआ है। इन बाधाओं को दूर करने के बाद ही इंस्ट्रूमेंट लैंडिंग सिस्टम इंस्टाल हो सकेगा और फिर यहां से उड़ान भरने की रुचि ले रही विमानन कंपनियां महानगरों के उड़ान के लिए तिथियां और टिकट विंडो खोलेंगी। यात्रियों की उपलब्धता के बाद यहां से उड़ान संभव हो सकेगी।
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कुशीनगर इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर अंतरराष्ट्रीय मानक को पूरा करने के लिए आईएलएस सिस्टम लगाया जा रहा है। इसके लग जाने के बाद विमान किसी भी मौसम और किसी भी समय में लैंडिंग और टेकऑफ सुरक्षित कर सकेगी। इसके लिए लोकलाइजर का काम पूरा हो गया है तो वही केवल ग्लाइड पथ का काम अधूरा है। इसको पूरा करने के लिए इसमें आ रहे अवरोध को दूर करने में जिला प्रशासन और एयरपोर्ट अथॉरिटी प्रयासरत हैं। विमान के लैंडिंग के समय दिशा देने के लिए एयरपोर्ट के पश्चिमी छोर वन-वन से उड़ान की सभी अवरोध दूर हो चुका है तो वहीं पूर्वी छोर के रनवे संख्या टू-नाइन पर दो मकान का रोड़ा बना हुआ है। जानकारों की कहना है कि जब तक यह दो मकान नहीं हटेंगे तब तक ग्लाइड पथ का काम पूरा नहीं हो सकेगा। इसके पूरा होने के बाद ही एयरपोर्ट का भी वीएफआर से आईएफआर होने की प्रक्रिया पूरा होगी। उसके बाद ही विमानन कंपनियों की ओर से यहां से उड़ान भरने में रुचि बढ़ेगी।
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इधर, डीएम की ओर से दोनों मकानों को हटाने के लिए हाईकोर्ट में लगातार प्रयास चल रहा है। इसके हटने के बाद ही यह आईएलएस सिस्टम पूरी तरह इंस्टाॅल हो सकेगा। इंस्टाॅलेशन के बाद अगर विमानन कंपनियां उड़ान भरने के लिए तैयार भी हो गईं तो यात्रियों को इकट्ठा करना भी उनके लिए बड़ी चुनौती होगी, क्योंकि जिन स्थानों और महानगरों से एयरपोर्ट के माध्यम से उड़ान कराने की योजना है, वहां तक के लिए यात्री बेहद कम है। संभव है कनेक्टिंग फ्लाइट से इस दिक्कत को दूर कर हवाई सेवाओं का संचालन हो।
आईएलएस के तहत दूसरे चरण के कार्य अधूरे
-आईएलएस उपकरण के इंस्टाॅलेशन में महत्वपूर्ण कार्य विमान के सेंटर लाइन को इंडिकेट करना वाला लोकलाइजर और इलेक्ट्रिक कार्य हैं। यह पूरा हो चुका है। दूसरे चरण में विमानों को एंगल बताने वाला ग्लाइड पथ का कार्य होना है। ग्लाइड पथ के लोकेशन के निर्धारण करने में दो मकान और कुछ शेष टाॅवर ही अवरोध बने हुए हैं। इसके हटे बिना यह आईएलएस पूर्ण नहीं हो सकता है। इन अवरोधों की वजह से यहां विमानन कंपनियां उड़ान भरने में रुचि नहीं ले रहीं हैं, लेकिन यह अवरोध दूर होने के साथी ही विमानन कंपनियों का यहां से उड़ान भरने के लिए हरी झंडी मिल सकती है।
बढ़ती जा रही कुशीनगर एयरपोर्ट की मुश्किलें
- बिहार के बजट में सोमवार को पड़ोसी प्रांत पश्चिम चंपारण के वाल्मिकीनगर स्थित एयरपोर्ट के विस्तार के लिए बजट में बात की गई। इसके अलावा पड़ोसी जनपद गोपालगंज के सबेया एयरपोर्ट की भी चहारदीवारी का काम शुरू हो गया है। इधर, गोरखपुर एयरपोर्ट के विस्तार और नंदा नगर में रनवे और टर्मिनल के निर्माण से कुशीनगर के लोगों की धड़कनें बढ़ रही हैं। लोगों का मानना है कि एयरपोर्ट बिहार के पड़ोसी इलाके पश्चिम चंपारण, गोपालगंज के अलावा गोरखपुर मंडल के देवरिया, महाराजगंज के लोगों पर निर्भर था। लगातार पास के इलाकों में एयरपोर्ट के विस्तार से कुशीनगर एयरपोर्ट से फ्लाइट संचालन पर ग्रहण लगता दिख रहा है।
क्या है ग्लाइड पथ
-ग्लाइड पथ किसी भी विमान के लैंडिंग दृष्टिकोण का एक महत्वपूर्ण तत्व है। यह एक आदर्श अवरोही पथ है, जिसका अनुसरण विमान रन-वे पर आसानी से उतरने के लिए करता है। इसके सहारे विमान की सुरक्षित लैंडिंग होती है। ग्लाइड पथ का पालन किए बिना रन-वे से आगे निकल जाने या बहुत कम दूरी पर उतरने का खतरा होता है। ग्लाइड पथ लैंडिंग के साथ टेकऑफ के लिए आवश्यक होता है।
तीन चरण में गति देने का ध्येय, लेकिन नाकाम
-जिले के सांसदों और विधायकों ने एयरपोर्ट के लिए अपने हर संभव प्रयास कर लिए हैं। सांसद शशांक मणि त्रिपाठी ने बताया कि हमारा ध्येय एयरपोर्ट पर पहले दो चरण में डोमेस्टिक और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के साथ तीसरे चरण में कार्गो (समान ढुलाई) के उड़ान का भी प्रयास कर रहे हैं।
कोट
आईएलएस सिस्टम लगाने में दो मकान का अवरोध आ रहा है। इसको दूर करने के लिए जिला प्रशासन लगातार प्रयास कर रहा है। बहुत जल्दी बाधा दूर कर ली जाएगी और हवाई सेवाओं का संचालन होगा।
-प्राणेश कुमार राय, डायरेक्टर, कुशीनगर एयरपोर्ट