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न्यू पीएचसी बलकुड़िया के आवास बदहाल

Sun, 10 Oct 2021 10:18 PM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Sun, 10 Oct 2021 10:18 PM IST
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Health workers' homes ruined
जर्जर हो गए स्वास्थ्यकर्मियों के आवास
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रात में नहीं मिलती हैं स्वास्थ्य सुविधाएं
संवाद न्यूज एजेंसी
जटहां बाजार। ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं की स्थिति संतोषजनक नहीं हैं। इन्हीं में से एक विशुनपुरा ब्लॉक के बलकुड़िया गांव में स्थित न्यू प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र भी है। यहां रात में डॉक्टर नहीं रहने की वजह से मरीजों का इलाज नहीं हो पाता है। स्वास्थ्यकर्मियों के आवास भी जर्जर हो गए हैं।
यहां तैनात महिला डॉक्टर महज तीन दिन ही रहती हैं। इसलिए मरीजों का इलाज फार्मासिस्ट के भरोसे रहता है। यहां दस वर्ष पहले न्यू पीएचसी का निर्माण कराया गया, लेकिन अफसरों की लापरवाही के कारण अभी भी इस क्षेत्र के लोगों को ठीक तरीके से इलाज की सुविधा नहीं मिल पा रही है। फार्मासिस्ट सुनील कुमार ने बताया कि महिला डॉक्टर रश्मि सिंह सप्ताह में बुधवार, शुक्रवार और शनिवार को यहां रहती हैं, इसके अलावा दो दिन सीएचसी विशुनपुरा पर ड्यूटी करती हैं। यहां वार्ड ब्वाय अमित जायसवाल, चौकीदार सोहन के अलावा एक संविदा कर्मी मुकेश तिवारी की तैनाती है। फार्मासिस्ट ने बताया कि दवाओं की उपलब्धता है। बिजली नहीं रहने के बाद कुछ समस्याएं हैं। इंवर्टर नही लगा है, अगर कोई मरीज भर्ती रहता है, तो समस्या हो जाती है। इस संबंध में सीएमओ डॉ. सुरेश पटारिया का कहना था कि न्यू पीएचसी की समस्या दूर कराई जाएगी। इसके लिए संबंधित अधिकारी को निर्देश दिया जाएगा।
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अस्पताल परिसर में फैली है गंदगी
न्यू पीएचसी का पूरा परिसर झाड़ियों से पट गया है। इससे स्वास्थ्यकर्मी भी सांप-बिच्छू व अन्य हानिकारक कीटों को लेकर भयभीत रहते हैं, लेकिन झाड़ियों की सफाई पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
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जर्जर हो गए हैं आवास
न्यू पीएचसी के कर्मचारियों के लिए बने आवास दस वर्षों में ही जर्जर हो गए हैं। आवास की खिड़की, फाटक, फर्श टूट गए हैं। यहां जिले स्तर के अफसर भी निरीक्षण करने आते है, लेकिन किसी ने इसकी सुधि नहीं ली। यहां तैनात फार्मासिस्ट सुनील कुमार ने बताया कि यहां आवास नहीं होने के कारण उन्हें किराए के भवन में रहना पड़ता है। रात्रि निवास भी कोई नहीं कर पाता है। स्थिति यह है कि रात्रि के समय अगर कोई मरीज आ जाए तो इलाज नहीं हो सकता, क्योंकि यहां कोई रहता ही नहीं है।
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