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Kushinagar News: सात गांवों में घुसा बाढ़ का पानी, सड़क संपर्क टूटा
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सालिकपुर गांव में घरों में घुसा बाढ़ का पानी।संवाद
खड्डा (कुशीनगर)। नारायणी नदी में उफान के कारण खड्डा क्षेत्र के सात गांवों में बाढ़ का पानी पहुंच गया है। इन गांवों का सड़क संपर्क टूट गया है, जिससे पूरा क्षेत्र दूसरे हिस्सों से कट गया है।
मरचहवा, बसंतपुर, शिवपुर, हरिहरपुर, नारायणपुर, सालिकपुर और महादेवा में शनिवार देर रात पानी भर गया। लोग छतों और ऊंचे स्थानों पर ठिकाना बनाए हुए हैं। नदी उस पार के गांवों में मवेशी घुटने भर पानी में खड़े हैं। शनिवार रात सालिकपुर चौकी के पास किचन बनाया गया था। एसडीएम के आदेश के बावजूद सड़क पर कुछ लोगों को भोजन कराकर फोटो खींच लिया गया। रविवार सुबह गांव वालों ने मौजूद अफसरों से इसकी शिकायत की। रविवार सुबह से किचन फिर से सक्रिय कर दिया गया।
जहरीले जीव-जंतुओं का खतरा
बाढ़ के कारण दो दिन से मवेशी पानी में खड़े हैं, उनके चारे का संकट गहरा गया है। खेत और रास्ते डूबने से यह समस्या और बढ़ गई है। कई दिनों से धूप न निकलने के कारण सोलर उपकरण चार्ज नहीं हो पाए हैं। इससे रात में गांवों में अंधेरा छा जाता है। अंधेरे और पानी के बीच जहरीले जीव-जंतुओं का खतरा भी बना हुआ है। स्कूलों में पानी भरने से बच्चों की पढ़ाई भी बंद हो गई है।
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मरचहवा निवासी विनोद, चंद्रिका और राधेश्याम ने बताया कि घरों में पानी भरने से चूल्हा नहीं जल पा रहा है। बच्चे, महिलाएं और बुजुर्ग तख्त व मचान पर किसी तरह समय बिता रहे हैं। बसंतपुर के दिलीप और कन्हैया के अनुसार, बाहर निकलने के लिए अब नाव ही एकमात्र सहारा है। चारों तरफ पानी होने के बावजूद पीने के साफ पानी का संकट है। शौच के लिए भी कोई सुरक्षित जगह नहीं बची है। सालिकपुर महदेवा गांव के अधिकांश लोग एन एच 727 पर सालिकपुर चौकी के पास अस्थायी शरणालय में शरण लिए हैं। मराछी देवी, गुलाइची, लक्ष्मी देवी और रंगोली ने बारिश बंद होने पर राहत जताई।
कोट
प्रशासन की टीम घरों तक भोजन के पैकेट पहुंचा रही है। प्रभावित लोगों की जरूरतों पर भी लगातार नजर रखी जा रही है। लगातार पानी बढ़ने से राहत कार्य में मुश्किलें हो रही हैं। अस्थायी शरणालय में भी सामुदायिक रसोई से लोगों को भोजन कराया जा रहा है। प्रशासन स्थिति पर नियंत्रण का प्रयास कर रहा है। दस नावें बढ़ा दी गई हैं। नाव और एनडीआरएफ की एक टीम को रिजर्व में रखा गया है। -पवन कुमार, एडीएम कुशीनगर
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मरचहवा, बसंतपुर, शिवपुर, हरिहरपुर, नारायणपुर, सालिकपुर और महादेवा में शनिवार देर रात पानी भर गया। लोग छतों और ऊंचे स्थानों पर ठिकाना बनाए हुए हैं। नदी उस पार के गांवों में मवेशी घुटने भर पानी में खड़े हैं। शनिवार रात सालिकपुर चौकी के पास किचन बनाया गया था। एसडीएम के आदेश के बावजूद सड़क पर कुछ लोगों को भोजन कराकर फोटो खींच लिया गया। रविवार सुबह गांव वालों ने मौजूद अफसरों से इसकी शिकायत की। रविवार सुबह से किचन फिर से सक्रिय कर दिया गया।
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जहरीले जीव-जंतुओं का खतरा
बाढ़ के कारण दो दिन से मवेशी पानी में खड़े हैं, उनके चारे का संकट गहरा गया है। खेत और रास्ते डूबने से यह समस्या और बढ़ गई है। कई दिनों से धूप न निकलने के कारण सोलर उपकरण चार्ज नहीं हो पाए हैं। इससे रात में गांवों में अंधेरा छा जाता है। अंधेरे और पानी के बीच जहरीले जीव-जंतुओं का खतरा भी बना हुआ है। स्कूलों में पानी भरने से बच्चों की पढ़ाई भी बंद हो गई है।
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मरचहवा निवासी विनोद, चंद्रिका और राधेश्याम ने बताया कि घरों में पानी भरने से चूल्हा नहीं जल पा रहा है। बच्चे, महिलाएं और बुजुर्ग तख्त व मचान पर किसी तरह समय बिता रहे हैं। बसंतपुर के दिलीप और कन्हैया के अनुसार, बाहर निकलने के लिए अब नाव ही एकमात्र सहारा है। चारों तरफ पानी होने के बावजूद पीने के साफ पानी का संकट है। शौच के लिए भी कोई सुरक्षित जगह नहीं बची है। सालिकपुर महदेवा गांव के अधिकांश लोग एन एच 727 पर सालिकपुर चौकी के पास अस्थायी शरणालय में शरण लिए हैं। मराछी देवी, गुलाइची, लक्ष्मी देवी और रंगोली ने बारिश बंद होने पर राहत जताई।
कोट
प्रशासन की टीम घरों तक भोजन के पैकेट पहुंचा रही है। प्रभावित लोगों की जरूरतों पर भी लगातार नजर रखी जा रही है। लगातार पानी बढ़ने से राहत कार्य में मुश्किलें हो रही हैं। अस्थायी शरणालय में भी सामुदायिक रसोई से लोगों को भोजन कराया जा रहा है। प्रशासन स्थिति पर नियंत्रण का प्रयास कर रहा है। दस नावें बढ़ा दी गई हैं। नाव और एनडीआरएफ की एक टीम को रिजर्व में रखा गया है। -पवन कुमार, एडीएम कुशीनगर

सालिकपुर गांव में घरों में घुसा बाढ़ का पानी।संवाद