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इंसेफेलाइटिस से एक और बच्ची की मौत
अमर उजाला/कुशीनगर
Updated Wed, 18 Nov 2015 11:47 PM IST
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पिपरा बाजार। बुधवार की सुबह इंसेफेलाइटिस से मेडिकल कॉलेज में एक और बच्ची की मौत हो गई। एक सप्ताह के दरम्यान नेबुआ नौरंगिया क्षेत्र के सिंगहा गांव में इंसेफेलाइटिस से तीसरे बच्चे की मौत है। सिंगहा गांव के छितवनिया टोला निवासी सैफु द्दीन की छह वर्षीया बेटी आशिया रविवार को बुखार और उल्टी से पीड़ित थी।
परिवार के लोग डॉक्टर की सलाह पर उसे मेडिकल कॉलेज ले गए, जहां बुधवार की सुबह इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। इसी टोले के तैय्यब की 11 वर्षीया बेटी अबीदुन नेशा ने शनिवार को जिला अस्पताल से मेडिकल कॉलेज ले जाते समय रास्ते में तो चार वर्षीया शहीमा ने अगले दिन रविवार को मेडिकल कॉलेज में दम तोड़ दिया था।
दोनों बच्चियां भी उल्टी और बुखार की चपेट में आई थीं। पिछले मंगलवार को सीएमओ डॉ. अखिलेश कुमार ने छितवनिया टोला पहुंचकर गांव की समस्या देखी थी।
उन्हाेंने बीमारी का कारण दूषित पानी बताया था। लोगों ने सीएमओ से शिकायत की थी कि गांव में तैनात सफाई कर्मचारी लापरवाही बरतते हैं। हैंडपंप का पानी पीने के लायक नहीं है। सीएमओ ने गांववालों को आश्वासन दिया था कि डीएम और डीपीआरओ से समस्याओं के विषय में बताकर समाधान के शीघ्र प्रयास किए जाएंगे।
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इस संबंध में नेबुआ नौरंगिया के चिकित्सा प्रभारी डॉ. विमलेंदु भूषण का कहना था कि छितवनिया टोले पर स्वास्थ्य टीम लगातार नजर रखे हुए है। गांव में गंदगी और पीने के लिए दूषित पानी का प्रयोग बीमारियों की प्रमुख वजह है। लोग अपने नलों के नजदीक इस्तेमाल पानी के लिए गड्ढे खोद लेते हैं, जो उचित नहीं है। मच्छरों से बचाव और खानपान में शुद्धता ही सेहत दुरुस्त रखने में कारगर साबित होती है।
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परिवार के लोग डॉक्टर की सलाह पर उसे मेडिकल कॉलेज ले गए, जहां बुधवार की सुबह इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। इसी टोले के तैय्यब की 11 वर्षीया बेटी अबीदुन नेशा ने शनिवार को जिला अस्पताल से मेडिकल कॉलेज ले जाते समय रास्ते में तो चार वर्षीया शहीमा ने अगले दिन रविवार को मेडिकल कॉलेज में दम तोड़ दिया था।
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दोनों बच्चियां भी उल्टी और बुखार की चपेट में आई थीं। पिछले मंगलवार को सीएमओ डॉ. अखिलेश कुमार ने छितवनिया टोला पहुंचकर गांव की समस्या देखी थी।
उन्हाेंने बीमारी का कारण दूषित पानी बताया था। लोगों ने सीएमओ से शिकायत की थी कि गांव में तैनात सफाई कर्मचारी लापरवाही बरतते हैं। हैंडपंप का पानी पीने के लायक नहीं है। सीएमओ ने गांववालों को आश्वासन दिया था कि डीएम और डीपीआरओ से समस्याओं के विषय में बताकर समाधान के शीघ्र प्रयास किए जाएंगे।
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इस संबंध में नेबुआ नौरंगिया के चिकित्सा प्रभारी डॉ. विमलेंदु भूषण का कहना था कि छितवनिया टोले पर स्वास्थ्य टीम लगातार नजर रखे हुए है। गांव में गंदगी और पीने के लिए दूषित पानी का प्रयोग बीमारियों की प्रमुख वजह है। लोग अपने नलों के नजदीक इस्तेमाल पानी के लिए गड्ढे खोद लेते हैं, जो उचित नहीं है। मच्छरों से बचाव और खानपान में शुद्धता ही सेहत दुरुस्त रखने में कारगर साबित होती है।