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डायलिसिस यूनिट को बिजली का झटका, मरीजों की तकलीफ बढ़ी
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डायलिसिस यूनिट को बिजली का झटका, मरीजों की तकलीफ बढ़ी
पडरौना। जिला अस्पताल में डायलिसिस के लिए आने वाले मरीजों की बिजली कटौती से तकलीफ बढ़ जा रही है। बार-बार बिजली कटने से मशीनें खराब हो जा रही हैं। डायलिसिस की दो मशीनें एक सप्ताह से खराब पड़ी हैं। इसके अलावा करीब दो सप्ताह पहले कई एलईडी बल्व व ट्यूबलाइट भी खराब हो चुकी हैं। यही नहीं, ज्यादा देर तक बिजली गुल रहने पर पानी की कमी के चलते मरीजों की डायलिसिस भी नहीं हो पा रही है।
किडनी के रोगियों के लिए जिला अस्पताल में दस डायलिसिस मशीनें लगी हैं। इस अस्पताल को 24 घंटे बिजली आपूर्ति देने का आदेश है। इसके लिए स्वतंत्र फीडर भी लगाया गया है, लेकिन ज्यादा देर तक बिजली कटने या लाइन फ्रेक्चुएट करने से विद्युत उपकरण और मशीनें खराब हो जा रही हैं। इसके चलते दो डायलिसिस मशीनें खराब पड़ी हैं। मरीजों की तादाद को देखते हुए यहां रात के दो बजे तक डायलिसिस करनी पड़ रही है।
डायलिसिस यूनिट के टेक्नीशियन मोहम्मद कैश बताते हैं कि एक मरीज की डायलिसिस में 120 से 150 लीटर पानी की जरूरत पड़ती है। ज्यादा देर तक बिजली कटने पर मरीजों को बिजली आने का इंतजार करना पड़ता है। तकनीकी कमी के कारण यहां लगी मशीनों में पानी नहीं चढ़ पाता है।
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प्रतिदिन होती है 30 मरीजों की डायलिसिस
इस डायलिसिस यूनिट में प्रतिदिन 30 मरीजों की डायलिसिस होती है। 80 मरीज नियमित डायलिसिस वाले हैं। इनमें 35 मरीज तो ऐसे हैं, जिनकी हर तीसरे दिन डायलिसिस करनी पड़ती है। ऐसे मरीजों के डायलिसिस की निरंतरता न रुके, इसके लिए रात के दो बजे तक यह प्रक्रिया अपनानी पड़ती है। मशीनों की खराबी के कारण काम बढ़ गया है।
डायलिसिस यूनिट में बिजली संकट से समस्या हो रही है। दो मशीनें जल गई हैं, जिसकी सूचना सेवा प्रदाता कंपनी को दे दी गई है। लाइन ठीक कराने का प्रयास किया जा रहा है। जो जेनरेटर लगा है, उससे भी डायलिसिस में मदद नहीं मिल पाती है।
- डॉ. एसके वर्मा, सीएमएस
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पडरौना। जिला अस्पताल में डायलिसिस के लिए आने वाले मरीजों की बिजली कटौती से तकलीफ बढ़ जा रही है। बार-बार बिजली कटने से मशीनें खराब हो जा रही हैं। डायलिसिस की दो मशीनें एक सप्ताह से खराब पड़ी हैं। इसके अलावा करीब दो सप्ताह पहले कई एलईडी बल्व व ट्यूबलाइट भी खराब हो चुकी हैं। यही नहीं, ज्यादा देर तक बिजली गुल रहने पर पानी की कमी के चलते मरीजों की डायलिसिस भी नहीं हो पा रही है।
किडनी के रोगियों के लिए जिला अस्पताल में दस डायलिसिस मशीनें लगी हैं। इस अस्पताल को 24 घंटे बिजली आपूर्ति देने का आदेश है। इसके लिए स्वतंत्र फीडर भी लगाया गया है, लेकिन ज्यादा देर तक बिजली कटने या लाइन फ्रेक्चुएट करने से विद्युत उपकरण और मशीनें खराब हो जा रही हैं। इसके चलते दो डायलिसिस मशीनें खराब पड़ी हैं। मरीजों की तादाद को देखते हुए यहां रात के दो बजे तक डायलिसिस करनी पड़ रही है।
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डायलिसिस यूनिट के टेक्नीशियन मोहम्मद कैश बताते हैं कि एक मरीज की डायलिसिस में 120 से 150 लीटर पानी की जरूरत पड़ती है। ज्यादा देर तक बिजली कटने पर मरीजों को बिजली आने का इंतजार करना पड़ता है। तकनीकी कमी के कारण यहां लगी मशीनों में पानी नहीं चढ़ पाता है।
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प्रतिदिन होती है 30 मरीजों की डायलिसिस
इस डायलिसिस यूनिट में प्रतिदिन 30 मरीजों की डायलिसिस होती है। 80 मरीज नियमित डायलिसिस वाले हैं। इनमें 35 मरीज तो ऐसे हैं, जिनकी हर तीसरे दिन डायलिसिस करनी पड़ती है। ऐसे मरीजों के डायलिसिस की निरंतरता न रुके, इसके लिए रात के दो बजे तक यह प्रक्रिया अपनानी पड़ती है। मशीनों की खराबी के कारण काम बढ़ गया है।
डायलिसिस यूनिट में बिजली संकट से समस्या हो रही है। दो मशीनें जल गई हैं, जिसकी सूचना सेवा प्रदाता कंपनी को दे दी गई है। लाइन ठीक कराने का प्रयास किया जा रहा है। जो जेनरेटर लगा है, उससे भी डायलिसिस में मदद नहीं मिल पाती है।
- डॉ. एसके वर्मा, सीएमएस