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पांचवीं बार जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी आरक्षित

Fri, 12 Feb 2021 11:57 PM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Fri, 12 Feb 2021 11:57 PM IST
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District Panchayat President's chair reserved
पांचवीं बार जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी आरक्षित
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पडरौना। ढाई दशक के अपने संक्षिप्त कार्यकाल में कुशीनगर जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी लगातार पांचवीं बार आरक्षित हो गई है। दो बार यह सीट अनारक्षित महिला व एक बार पिछड़ी जाति पुरुष के लिए भी आरक्षित रह चुकी है। पिछली बार अनुसूचित जाति के पुरुष के लिए आरक्षित थी और इस बार पिछड़ी जाति की महिला के लिए आरक्षित हो गई है। खास बात यह है कि बिना आरक्षण के भी इस महत्वपूर्ण पद पर पिछड़ी जाति की महिला को मौका मिला चुका है। आरक्षण के वर्तमान नियम को देखते हुए इस बार अनारक्षित होने का अनुमान था, लेकिन कई दिग्गजों की उम्मीद टूट गई है।

वर्ष-1994 में देवरिया से अलग होकर कुशीनगर जिले का सृजन हुआ। वर्ष-1995 के पंचायत चुनाव में अध्यक्ष का पद पिछड़ी जाति के पुरुष के लिए आरक्षित थी, जिस पर पहले जाकिर हुसैन और बाद में जगदीश सिंह को अध्यक्ष बनने का मौका मिला। वर्ष-2000 के पंचायत चुनाव में यह सीट सामान्य महिला के लिए आरक्षित हो गई। बैरिस्टर जायसवाल की पत्नी गंगोत्री देवी जायसवाल और सुभाष त्रिपाठी की पत्नी निर्मला के बीच कांटे का मुकाबला हुआ। दो बार चुनाव परिणाम बराबर होने के बाद तीसरी बार में निर्मला त्रिपाठी को अध्यक्ष बनने का अवसर मिला। वर्ष-2005 में यह सीट पिछड़ी जाति पुरुष के लिए आरक्षित हुई और प्रदीप जायसवाल अध्यक्ष चुने गए। वर्ष-2010 में अध्यक्ष पद फिर सामान्य महिला के लिए आरक्षित हुआ और इस बार प्रदीप जायसवाल की पत्नी सावित्री देवी जायसवाल अध्यक्ष चुनीं गईं। वर्ष-2015 में यह सीट अनुसूचित जाति पुरुष के लिए आरक्षित हुई। इस बार पूर्व विधायक पूर्णमासी देहाती के पुत्र हरीश राणा ने कुर्सी पर कब्जा जमाया, लेकिन अविश्वास प्रस्ताव में उनकी कुर्सी गई तो उनकी जगह पर प्रदीप जायसवाल की मदद से विनय प्रकाश गौड़ ने जीत हासिल की। अब फिर से यह सीट पिछड़ी जाति महिला के लिए आरक्षित हो गई है। खास बात यह है कि वर्ष-2010 में ही इस सीट पर पिछड़ी जाति से ताल्लुक रखने वाली सावित्री देवी जायसवाल को अध्यक्ष बनने का मौका मिल चुका है।
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