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रामलीला के डायरेक्टर अब डीआरडीओ के डायरेक्टर
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युवा कृषि वैज्ञानिक पुरस्कार से सम्मानित डॉ. संजय कुमार द्विवेदी, पूर्व राष्ट्रपति स्व. एपीजे अब?
- फोटो : KUSHINAGAR
रामलीला के डायरेक्टर अब डीआरडीओ के डायरेक्टर
राम चलाते हैं कंप्यूटर, लक्ष्मण स्वच्छता अभियान के ब्रांड अंबेस्डर
पडरौना। कभी रामलीला में राम-लक्ष्मण का किरदार निभाने वाले आज बुलंदियों के शिखर पर हैं। कोई रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) में निदेशक है तो कोई वैज्ञानिक व विदेश में इंजीनियर। कसया क्षेत्र के मठिया माधोपुर गांव की रामलीला की विशेषता ये है कि गांव के लोग ही अभिनय करते हैं।
अंग्रेजी हुकूमत के दौरान शुरू हुआ मठिया माधोपुर गांव में रामलीला का इस साल 182वां वर्ष है। एक अक्तूबर से रामलीला शुरू हो जाएगी। सांस्कृतिक एकता की मशाल जलाने वाली मठिया माधोपुर की रामलीला में न तो जाति का बंधन है और न ही संप्रदाय का भेदभाव।
बांसफोड़ रावण के पुतले के लिए ढांचा तैयार करते हैं तो हिंदू और मुस्लिम उसे मूर्तरूप देते हैं। राम सीता विवाह में यहां के मुस्लिमों की तरफ से न्यौता दिया जाना सांस्कृतिक चेतना का उदहारण है। ग्रामीणों का कहना है कि वर्ष 1839 में हनुमान चबूतरा बनने के बाद कार्तिक पंचमी को रामचरित मानस पाठ का शुरू हुआ।
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उसके बाद वर्ष 1840 में ग्रामीणों ने रामलीला शुरू कराई। पहली बार रामलीला भोजपुरी में हुई थी। गांव के 75 वर्षीय डॉ. इंद्रजीत मिश्र का कहना है कि अयोध्या में रामलीला देखकर गांव लौटे पंडित अयोध्या मिश्र की अगुवाई में रामलीला की शुरुआत हुई थी। संवाद
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ये हैं ऊंचे मुकाम पर
रामलीला में डायरेक्टर की भूमिका निभाने वाले डॉ. संजय द्विवेदी मौजूदा समय में डीआरडीओ दिल्ली के डायरेक्टर (पर्सनल) हैं। राम की भूमिका निभाने वाले डॉ. अमित द्विवेदी भारतीय उद्यमिता संस्थान अहमदाबाद में प्रोग्राम डायरेक्टर हैं। अफगानिस्तान के वित्त मंत्रालय से आए अधिकारियों को देश की अर्थव्यवस्था संभालने का गुर भी सिखा चुके हैं। अमित के छोटे भाई डॉ. पुनीत द्विवेदी लक्ष्मण की भूमिका निभा चुके हैं। वह इंदौर में स्वच्छता अभियान के ब्रांड अंबेस्डर हैं। राम की भूमिका निभाने वाले एक कलाकार अमित शर्मा बंगलूरू में सॉफ्टवेयर इंजीनियर और शिवकुमार सिंह नाइजीरिया में वैज्ञानिक हैं।
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महिलाओं की होती है भागीदारी
राम सीता के विवाह में गांव की महिलाएं मंगलगीत गाती हैं। वर्ष 1980 के आसपास तक राम, लक्ष्मण, भरत व शत्रुघ्न के अलावा सीता की भूमिका निभाने वाले कलाकार केवल ब्राह्मण होते थे, लेकिन रामलीला के तत्कालीन अध्यक्ष मनोज कांत मिश्र, मंत्री नंदलाल शर्मा, कोषाध्यक्ष श्रवण कुमार वर्मा आदि के प्रयास से यह मिथक टूट गया है।
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राम चलाते हैं कंप्यूटर, लक्ष्मण स्वच्छता अभियान के ब्रांड अंबेस्डर
पडरौना। कभी रामलीला में राम-लक्ष्मण का किरदार निभाने वाले आज बुलंदियों के शिखर पर हैं। कोई रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) में निदेशक है तो कोई वैज्ञानिक व विदेश में इंजीनियर। कसया क्षेत्र के मठिया माधोपुर गांव की रामलीला की विशेषता ये है कि गांव के लोग ही अभिनय करते हैं।
अंग्रेजी हुकूमत के दौरान शुरू हुआ मठिया माधोपुर गांव में रामलीला का इस साल 182वां वर्ष है। एक अक्तूबर से रामलीला शुरू हो जाएगी। सांस्कृतिक एकता की मशाल जलाने वाली मठिया माधोपुर की रामलीला में न तो जाति का बंधन है और न ही संप्रदाय का भेदभाव।
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बांसफोड़ रावण के पुतले के लिए ढांचा तैयार करते हैं तो हिंदू और मुस्लिम उसे मूर्तरूप देते हैं। राम सीता विवाह में यहां के मुस्लिमों की तरफ से न्यौता दिया जाना सांस्कृतिक चेतना का उदहारण है। ग्रामीणों का कहना है कि वर्ष 1839 में हनुमान चबूतरा बनने के बाद कार्तिक पंचमी को रामचरित मानस पाठ का शुरू हुआ।
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उसके बाद वर्ष 1840 में ग्रामीणों ने रामलीला शुरू कराई। पहली बार रामलीला भोजपुरी में हुई थी। गांव के 75 वर्षीय डॉ. इंद्रजीत मिश्र का कहना है कि अयोध्या में रामलीला देखकर गांव लौटे पंडित अयोध्या मिश्र की अगुवाई में रामलीला की शुरुआत हुई थी। संवाद
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ये हैं ऊंचे मुकाम पर
रामलीला में डायरेक्टर की भूमिका निभाने वाले डॉ. संजय द्विवेदी मौजूदा समय में डीआरडीओ दिल्ली के डायरेक्टर (पर्सनल) हैं। राम की भूमिका निभाने वाले डॉ. अमित द्विवेदी भारतीय उद्यमिता संस्थान अहमदाबाद में प्रोग्राम डायरेक्टर हैं। अफगानिस्तान के वित्त मंत्रालय से आए अधिकारियों को देश की अर्थव्यवस्था संभालने का गुर भी सिखा चुके हैं। अमित के छोटे भाई डॉ. पुनीत द्विवेदी लक्ष्मण की भूमिका निभा चुके हैं। वह इंदौर में स्वच्छता अभियान के ब्रांड अंबेस्डर हैं। राम की भूमिका निभाने वाले एक कलाकार अमित शर्मा बंगलूरू में सॉफ्टवेयर इंजीनियर और शिवकुमार सिंह नाइजीरिया में वैज्ञानिक हैं।
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महिलाओं की होती है भागीदारी
राम सीता के विवाह में गांव की महिलाएं मंगलगीत गाती हैं। वर्ष 1980 के आसपास तक राम, लक्ष्मण, भरत व शत्रुघ्न के अलावा सीता की भूमिका निभाने वाले कलाकार केवल ब्राह्मण होते थे, लेकिन रामलीला के तत्कालीन अध्यक्ष मनोज कांत मिश्र, मंत्री नंदलाल शर्मा, कोषाध्यक्ष श्रवण कुमार वर्मा आदि के प्रयास से यह मिथक टूट गया है।