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सऊदी अरब फंसे दो युवक घर लौटे
अमर उजाला/कुशीनगर
Updated Sat, 07 Nov 2015 12:07 AM IST
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दुदही। सऊदी अरब में बंधक बने कुशीनगर सहित गोरखपुर मंडल के 174 लोगों में से दो युवक शुक्रवार को सकुशल घर आ गए। वे दुदही क्षेत्र के रहने वाले हैं। बातचीत के दौरान दोनाें बीते एक साल में अपने साथ गुजरी यातनाआें को याद करके सिहर उठते हैं।
वे सऊदी अरब में फंसे अन्य लोगाें के भी सकुशल वापसी के लिए आग्रह करते नजर आए। दुदही बाजार के अविनाश और सत्येंद्र समेत जिले के दस युवक कुसुम्ही निवासी पवन सिंह, सितुहिया निवासी मनोज सिंह, जंगल जगदीशपुर के सुरेश यादव, जंगल चौरिया के राजकिशोर कुशवाहा, तरुअनवा के नत्थू कुशवाहा, मिल्की के जयंत, बकुलादह के विकास, सहोदर पट्टी के वीरेंद्र समेत गोरखपुर मंडल के 174 लोग 13 जुलाई 2012 को सऊदी अरब के दमाम में स्थित कंपनी में काम करने गए थे।
उस कंपनी में पेट्रोलियम पदार्थों में इस्तेमाल होने वाला केमिकल बनाया जाता है। दोनों युवकों ने बताया कि सऊदी अरब की कंपनी में दो साल का एग्रीमेंट था। इस अवधि के लिए कंपनी की तरफ से उनके लिए ‘एकामा’ बनाया गया था, लेकिन एग्रीमेंट की अवधि पूरी होने के बाद भी कंपनी सभी लोगों की ‘एकामा’ अवधि नहीं बढ़ाई।
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इससे सभी लोग अवैध हो गए और कंपनी ने उन्हें सेलरी भी देना बंद कर दिया। जब यह लोग घर वापस आने की बात करने लगे तो कंपनी ने मुक्त करने की बजाय बंधक बना लिया और खाना-पानी बंद कर दिया। बासी भोजन और नमक वाला पानी दिया जाता था।
इसके बाद परेशान युवकों ने अपने परिवारीजनों को संदेश भेजा, जिसके बाद परिवार के लोगों ने विदेश मंत्रालय से संपर्क साधा। विदेश मंत्रालय ने सऊदी अरब स्थित भारतीय दूतावास से संपर्क साधकर अविनाश और सत्येंद्र को मुक्त कराने के लिए सऊदी अरब स्थित स्थानीय कोर्ट से मांग की।
तब जाकर दोनों युवक लौट सके। दोनों युवक मुक्त तो हो गए, लेकिन कंपनी ने उनकी डेढ़ साल की सेलरी नहीं दी। दोनों युवकों ने बताया कि खाने के बिना बहुत से युवक बीमार पड़ गए हैं।
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वे सऊदी अरब में फंसे अन्य लोगाें के भी सकुशल वापसी के लिए आग्रह करते नजर आए। दुदही बाजार के अविनाश और सत्येंद्र समेत जिले के दस युवक कुसुम्ही निवासी पवन सिंह, सितुहिया निवासी मनोज सिंह, जंगल जगदीशपुर के सुरेश यादव, जंगल चौरिया के राजकिशोर कुशवाहा, तरुअनवा के नत्थू कुशवाहा, मिल्की के जयंत, बकुलादह के विकास, सहोदर पट्टी के वीरेंद्र समेत गोरखपुर मंडल के 174 लोग 13 जुलाई 2012 को सऊदी अरब के दमाम में स्थित कंपनी में काम करने गए थे।
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उस कंपनी में पेट्रोलियम पदार्थों में इस्तेमाल होने वाला केमिकल बनाया जाता है। दोनों युवकों ने बताया कि सऊदी अरब की कंपनी में दो साल का एग्रीमेंट था। इस अवधि के लिए कंपनी की तरफ से उनके लिए ‘एकामा’ बनाया गया था, लेकिन एग्रीमेंट की अवधि पूरी होने के बाद भी कंपनी सभी लोगों की ‘एकामा’ अवधि नहीं बढ़ाई।
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इससे सभी लोग अवैध हो गए और कंपनी ने उन्हें सेलरी भी देना बंद कर दिया। जब यह लोग घर वापस आने की बात करने लगे तो कंपनी ने मुक्त करने की बजाय बंधक बना लिया और खाना-पानी बंद कर दिया। बासी भोजन और नमक वाला पानी दिया जाता था।
इसके बाद परेशान युवकों ने अपने परिवारीजनों को संदेश भेजा, जिसके बाद परिवार के लोगों ने विदेश मंत्रालय से संपर्क साधा। विदेश मंत्रालय ने सऊदी अरब स्थित भारतीय दूतावास से संपर्क साधकर अविनाश और सत्येंद्र को मुक्त कराने के लिए सऊदी अरब स्थित स्थानीय कोर्ट से मांग की।
तब जाकर दोनों युवक लौट सके। दोनों युवक मुक्त तो हो गए, लेकिन कंपनी ने उनकी डेढ़ साल की सेलरी नहीं दी। दोनों युवकों ने बताया कि खाने के बिना बहुत से युवक बीमार पड़ गए हैं।