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Chitrakoot News: मंदाकिनी की बाढ़ बनी काल, दो की मौत, वृद्धा लापता
Sun, 30 Aug 2026 11:07 PM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चित्रकूट
संवाद न्यूज एजेंसी, चित्रकूट
Updated Sun, 30 Aug 2026 11:07 PM IST
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चित्रकूट। मंदाकिनी में आई बाढ़ की चपेट में आने से दो लोगों की मौत हो गई है, वहीं एक वृद्धा के बाढ़ में बहने से लापता है।
बिहार के अरवल जिले के सुनैनी निवासी कमला शरण (65) करीब 50 लोगों के साथ चित्रकूट आए थे। वह नयागांव थाना क्षेत्र की शिवहरे धर्मशाला में चातुर्मास बिता रहे थे। अचानक बाढ़ का पानी धर्मशाला में घुस गया। वह बाहर नहीं निकल सके और डूबने से उनकी मौत हो गई।
इसी तरह रामधाम में संत सूरदास कमरे में थे। अचानक कमरे में पानी भर जाने पर बाहर निकलने के दौरान डूबने से उनकी मौत हो गई। वहीं नयागांव के खटकाना मोहल्ला निवासी पतिनिया देवी (95) भी बाढ़ के पानी में बह गईं। रविवार शाम तक उनका पता नहीं चल सका है। प्रशासन और गोताखोरों द्वारा उनकी तलाश जारी है।
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मंदाकिनी की बाढ़ ने तोड़े सारे रिकॉर्ड
चित्रकूट। शुक्रवार रात को हुई मूसलाधार बारिश के बाद मंदाकिनी का जलस्तर शनिवार सुबह छह बजे 125.500 मीटर था जो सात बजे 126.500 मीटर खतरे के निशान को छू लिया। देखते ही देखते 10 बजे 130.700 मीटर हो गई जो तीन बजे 135.200 हो गया। यह अब तक का सबसे अधिकतम रिकार्ड रहा।
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सिंचाई विभाग के अनुसार सामान्य 123.500 मीटर और 126.500 खतरे का निशान है लेकिन सबसे अधिक 134.500 मीटर था। इस बार की बाढ़ ने उसको भी पार कर लिया। शनिवार शाम को मंदाकिनी का रौद्र रूप कम होने लगा था। शाम सात बजे घट कर 133.500 मीटर हो गया और रात 10 बजे 131.100 मीटर हो गया था।
रात 12 बजे 129.800 मीटर हो गया था। जो रविवार सुबह सात बजे घट कर 127.650 हो गया। दोपहर तीन बजे 126.300 मीटर के साथ खतरे के निशान के नीचे हो गई और शाम सात बजे 125.800 मीटर पानी हो गया। (संवाद)
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बाढ़ ने उजाड़ी बिजली, अंधेरे में डूबी धर्मनगरी
चित्रकूट। मंदाकिनी ने पहले घर डुबोए अब रोशनी छीन ली। दो दिन की दैवी आपदा ने बिजली व्यवस्था को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया है। रामघाट से सीतापुर तक दर्जनों बिजली के पोल आंधी और पानी के तेज बहाव में गिर गए हैं।
तार टूटकर जमीन पर बिछे व कीचड़ में सने हैं, ट्रांसफार्मर पानी में डूबे हैं। रामघाट, आरोग्य धाम, प्रमोदवन, एमपीटी, तहसील, रैन बसेरा इलाके में 48 घंटे से बिजली गुल है। रात होते ही धर्मनगरी घुप अंधेरे में डूब जाती है। न सड़क पर लाइट, न घरों में बल्ब। लोग मोबाइल की टॉर्च से खाना बना रहे हैं, बच्चे अंधेरे में रो रहे हैं।
इन्वर्टर जवाब दे चुके हैं, चार्जिंग खत्म है। बिजली विभाग के कर्मचारी भी बेबस हैं। एक लाइनमैन ने कहा - पोल खड़ा कहां करें नीचे कीचड़ है, ऊपर पानी का डर। तार जोड़ें तो कैसे, पहले पानी उतरेगा, तब लाइन ठीक होगी। (संवाद)
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बिहार के अरवल जिले के सुनैनी निवासी कमला शरण (65) करीब 50 लोगों के साथ चित्रकूट आए थे। वह नयागांव थाना क्षेत्र की शिवहरे धर्मशाला में चातुर्मास बिता रहे थे। अचानक बाढ़ का पानी धर्मशाला में घुस गया। वह बाहर नहीं निकल सके और डूबने से उनकी मौत हो गई।
इसी तरह रामधाम में संत सूरदास कमरे में थे। अचानक कमरे में पानी भर जाने पर बाहर निकलने के दौरान डूबने से उनकी मौत हो गई। वहीं नयागांव के खटकाना मोहल्ला निवासी पतिनिया देवी (95) भी बाढ़ के पानी में बह गईं। रविवार शाम तक उनका पता नहीं चल सका है। प्रशासन और गोताखोरों द्वारा उनकी तलाश जारी है।
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मंदाकिनी की बाढ़ ने तोड़े सारे रिकॉर्ड
चित्रकूट। शुक्रवार रात को हुई मूसलाधार बारिश के बाद मंदाकिनी का जलस्तर शनिवार सुबह छह बजे 125.500 मीटर था जो सात बजे 126.500 मीटर खतरे के निशान को छू लिया। देखते ही देखते 10 बजे 130.700 मीटर हो गई जो तीन बजे 135.200 हो गया। यह अब तक का सबसे अधिकतम रिकार्ड रहा।
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सिंचाई विभाग के अनुसार सामान्य 123.500 मीटर और 126.500 खतरे का निशान है लेकिन सबसे अधिक 134.500 मीटर था। इस बार की बाढ़ ने उसको भी पार कर लिया। शनिवार शाम को मंदाकिनी का रौद्र रूप कम होने लगा था। शाम सात बजे घट कर 133.500 मीटर हो गया और रात 10 बजे 131.100 मीटर हो गया था।
रात 12 बजे 129.800 मीटर हो गया था। जो रविवार सुबह सात बजे घट कर 127.650 हो गया। दोपहर तीन बजे 126.300 मीटर के साथ खतरे के निशान के नीचे हो गई और शाम सात बजे 125.800 मीटर पानी हो गया। (संवाद)
बाढ़ ने उजाड़ी बिजली, अंधेरे में डूबी धर्मनगरी
चित्रकूट। मंदाकिनी ने पहले घर डुबोए अब रोशनी छीन ली। दो दिन की दैवी आपदा ने बिजली व्यवस्था को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया है। रामघाट से सीतापुर तक दर्जनों बिजली के पोल आंधी और पानी के तेज बहाव में गिर गए हैं।
तार टूटकर जमीन पर बिछे व कीचड़ में सने हैं, ट्रांसफार्मर पानी में डूबे हैं। रामघाट, आरोग्य धाम, प्रमोदवन, एमपीटी, तहसील, रैन बसेरा इलाके में 48 घंटे से बिजली गुल है। रात होते ही धर्मनगरी घुप अंधेरे में डूब जाती है। न सड़क पर लाइट, न घरों में बल्ब। लोग मोबाइल की टॉर्च से खाना बना रहे हैं, बच्चे अंधेरे में रो रहे हैं।
इन्वर्टर जवाब दे चुके हैं, चार्जिंग खत्म है। बिजली विभाग के कर्मचारी भी बेबस हैं। एक लाइनमैन ने कहा - पोल खड़ा कहां करें नीचे कीचड़ है, ऊपर पानी का डर। तार जोड़ें तो कैसे, पहले पानी उतरेगा, तब लाइन ठीक होगी। (संवाद)