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मेसर्स टिप्सगो एंड कंपनी के कांकरेंट ऑडिटर की शिकायत पर खुला गबन का मामला
राकेश कुमार गौंड़ कुश्ाीनगर
Updated Fri, 17 Aug 2018 11:30 PM IST
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- फोटो : amar ujala
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पडरौना। कुशीनगर जिले में प्रसूता महिलाओं के नाश्ते और भोजन के मद में सरकार की तरफ से भेजे जाने वाले धन में बड़ी गड़बड़ी सामने आने के बाद स्वास्थ्य महकमे के प्रभारी चिकित्साधिकारी ही नहीं, इसके नोडल अफसर सहित अन्य जिम्मेदारों पर भी सवालिया निशान उठ रहे हैं। इतनी बड़ी रकम की गड़बड़ी में कहीं न कहीं विभाग के बड़े अफसरों की सहमति भी हो सकती है। खुद राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के निदेशक ने सभी एमओआईसी का बैंक स्टेटमेंट देखने के बाद वर्ष 2016 से अब तक 2625969.00 रुपये के गबन होने की बात स्वीकार की है।
स्वास्थ्य विभाग से जुड़े लोगों की मानी जाए तो प्रसव के बाद जच्चा-बच्चा स्वस्थ रहे, इसके लिए राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के जननी शिशु सुरक्षा कार्यक्रम के तहत उन्हें घर से अस्पताल लाने और वापस ले जाने के लिए 102 व 108 नंबर के एंबुलेंस से नि:शुल्क सुविधा, मुफ्त दवा व भोजन और नि:शुल्क जांच की सुविधा दी जाती है। सामान्य प्रसव के लिए 48 घंटे तथा ऑपरेशन से प्रसव पर एक हफ्ते तक अस्पताल में भर्ती कर इलाज व भोजन देने का प्रावधान है, लेकिन इनके भोजन आदि पर ज्यादा खर्च न करना पड़े, इसलिए ज्यादातर मामलों में चार से छह घंटे में ही छोड़ दिया जाता है। संस्थागत प्रसव पर 1400 रुपये व घरेलू प्रसव पर 1000 रुपये देने का प्रावधान है। संस्थागत प्रसव के लक्ष्य के आधार पर ही शासन से धन अवमुक्त होता है। जनपद स्तर पर इसके मूल्यांकन के लिए एसीएमओ एनएचएम की तैैनाती की गई है। एनएचएम के मिशन निदेशक पंकज कुमार ने इसी वित्तीय अनियमितता की जांच के लिए डीएम को निर्देशित किया है।
किस प्रभारी चिकित्साधिकारी के खाते में कितनी रकम
रामकोला-951148.00, दुदही-473220.00, सुकरौली-129926.00, मोतीचक-98820.00, कप्तानगंज-262222.00 एवं 26856.00, नेबुआ नौरंगिया-70549.00, कुबेरस्थान-237911.00, तमकुहीराज-97273.00, हाटा-69750.00, फाजिलनगर- 60389.00, कसया-41700.00, तरयासुजान- 25060.00 और विशुनपुरा-20110.00 रुपये।
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स्वास्थ्य विभाग में हुए इस गबन की जांच के लिए टीमें बन गई हैं। इन सभी चिकित्साधिकारियों के खिलाफ जांच कराई जाएगी। जो दोषी मिलेंगे, उनके खिलाफ आवश्यक कार्रवाई करने के बाद रिपोर्ट शासन को भेज दी जाएगी।
डॉ. अनिल कुमार सिंह, जिलाधिकारी।
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स्वास्थ्य विभाग से जुड़े लोगों की मानी जाए तो प्रसव के बाद जच्चा-बच्चा स्वस्थ रहे, इसके लिए राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के जननी शिशु सुरक्षा कार्यक्रम के तहत उन्हें घर से अस्पताल लाने और वापस ले जाने के लिए 102 व 108 नंबर के एंबुलेंस से नि:शुल्क सुविधा, मुफ्त दवा व भोजन और नि:शुल्क जांच की सुविधा दी जाती है। सामान्य प्रसव के लिए 48 घंटे तथा ऑपरेशन से प्रसव पर एक हफ्ते तक अस्पताल में भर्ती कर इलाज व भोजन देने का प्रावधान है, लेकिन इनके भोजन आदि पर ज्यादा खर्च न करना पड़े, इसलिए ज्यादातर मामलों में चार से छह घंटे में ही छोड़ दिया जाता है। संस्थागत प्रसव पर 1400 रुपये व घरेलू प्रसव पर 1000 रुपये देने का प्रावधान है। संस्थागत प्रसव के लक्ष्य के आधार पर ही शासन से धन अवमुक्त होता है। जनपद स्तर पर इसके मूल्यांकन के लिए एसीएमओ एनएचएम की तैैनाती की गई है। एनएचएम के मिशन निदेशक पंकज कुमार ने इसी वित्तीय अनियमितता की जांच के लिए डीएम को निर्देशित किया है।
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किस प्रभारी चिकित्साधिकारी के खाते में कितनी रकम
रामकोला-951148.00, दुदही-473220.00, सुकरौली-129926.00, मोतीचक-98820.00, कप्तानगंज-262222.00 एवं 26856.00, नेबुआ नौरंगिया-70549.00, कुबेरस्थान-237911.00, तमकुहीराज-97273.00, हाटा-69750.00, फाजिलनगर- 60389.00, कसया-41700.00, तरयासुजान- 25060.00 और विशुनपुरा-20110.00 रुपये।
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स्वास्थ्य विभाग में हुए इस गबन की जांच के लिए टीमें बन गई हैं। इन सभी चिकित्साधिकारियों के खिलाफ जांच कराई जाएगी। जो दोषी मिलेंगे, उनके खिलाफ आवश्यक कार्रवाई करने के बाद रिपोर्ट शासन को भेज दी जाएगी।
डॉ. अनिल कुमार सिंह, जिलाधिकारी।