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बुद्ध प्रतिमा पर स्वर्ण लेपन को म्यांमार तैयार
Kushinagar
Updated Sat, 16 Nov 2013 05:40 AM IST
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कसया। कुशीनगर के महापरिनिर्वाण मंदिर में बुद्ध की पांचवीं सदी की शयनमुद्रा वाली प्रतिमा का स्वर्णलेपन करने के लिए म्यांमार सरकार सहमत है। भारत सरकार की अनुमति मिली तो महापरिनिर्वाण स्तूप का भी स्वर्ण लेपन कराया जाएगा। इसको लेकर भारत-म्यांमार के बीच वार्ता चल रही है।
कुशीनगर के भ्रमण पर आए म्यांमार के धार्मिक, कला और संस्कृति मामलों के मंत्री ऊ सो विन ने शुक्रवार को महापरिनिर्वाण मंदिर में संवाददाताओं से बातचीत में यह जानकारी दी। मंत्री की अगुवाई में म्यांमार का एक सात सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल इन दिनों बौद्ध सर्किट की यात्रा पर है। मंत्री ने कहा कि विशिष्ट भाव भंगिमा वाली इस प्रतिमा के दीर्घकाल तक संरक्षण के लिए म्यांमार सरकार भी चिंतित है। मंत्री ने प्रतिमा को वैश्विक धरोहर बताया। मंत्री का कहना था कि भारत सरकार की अनुमति मिली तो प्रतिमा के पीछे स्थित स्तूप का भी स्वर्ण लेपन कराया जाएगा। वर्ष 1927 में बुद्ध की अस्थियों को सहेजे हुए निर्मित स्तूप के निर्माण में मंत्री ने म्यांमार के सहयोग का उल्लेख किया। एक सवाल के जवाब में मंत्री ने भारत-म्यांमार की सीमा को लेकर किसी विवाद को सिरे से खारिज कर दिया। मंत्री का कहना है कि दोनों देश स्वाभाविक मित्र देश हैं और हमारे रिश्ते प्राचीनकाल से एक जैसे चले आ रहे हैं। मंत्री ने दोनों देशों के बीच सड़क मार्ग को चालू करने पर जोर देते हुए कहा कि इससे दोनों देशों की मध्य आवागमन आसान होगा। मंत्री बोले कि इससे व्यापारिक, आर्थिक और पर्यटन गतिविधियों में तेजी आएगी और रिश्ते प्रगाढ़ होंगे।
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कुशीनगर के भ्रमण पर आए म्यांमार के धार्मिक, कला और संस्कृति मामलों के मंत्री ऊ सो विन ने शुक्रवार को महापरिनिर्वाण मंदिर में संवाददाताओं से बातचीत में यह जानकारी दी। मंत्री की अगुवाई में म्यांमार का एक सात सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल इन दिनों बौद्ध सर्किट की यात्रा पर है। मंत्री ने कहा कि विशिष्ट भाव भंगिमा वाली इस प्रतिमा के दीर्घकाल तक संरक्षण के लिए म्यांमार सरकार भी चिंतित है। मंत्री ने प्रतिमा को वैश्विक धरोहर बताया। मंत्री का कहना था कि भारत सरकार की अनुमति मिली तो प्रतिमा के पीछे स्थित स्तूप का भी स्वर्ण लेपन कराया जाएगा। वर्ष 1927 में बुद्ध की अस्थियों को सहेजे हुए निर्मित स्तूप के निर्माण में मंत्री ने म्यांमार के सहयोग का उल्लेख किया। एक सवाल के जवाब में मंत्री ने भारत-म्यांमार की सीमा को लेकर किसी विवाद को सिरे से खारिज कर दिया। मंत्री का कहना है कि दोनों देश स्वाभाविक मित्र देश हैं और हमारे रिश्ते प्राचीनकाल से एक जैसे चले आ रहे हैं। मंत्री ने दोनों देशों के बीच सड़क मार्ग को चालू करने पर जोर देते हुए कहा कि इससे दोनों देशों की मध्य आवागमन आसान होगा। मंत्री बोले कि इससे व्यापारिक, आर्थिक और पर्यटन गतिविधियों में तेजी आएगी और रिश्ते प्रगाढ़ होंगे।
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