फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Kushinagar News ›   मंत्री जी, न अफसर सुन रहे न पार्टी पदाधिकारी

मंत्री जी, न अफसर सुन रहे न पार्टी पदाधिकारी

Thu, 03 Aug 2017 05:10 PM IST
Updated Thu, 03 Aug 2017 05:10 PM IST
विज्ञापन
मंत्री जी, न अफसर सुन रहे न पार्टी पदाधिकारी
कुशीनगर। चौदह साल तक सत्ता से दूर रहे भाजपा कार्यकर्ता अपनी सरकार में भी उपेक्षित हो गए हैं। अफसर इन्हें तवज्जो नहीं दे रहे और वरिष्ठ पदाधिकारी अपने में मगन हैं। परेशान कार्यकर्ता प्रभारी मंत्री के अलावा जिले में आने वाले अन्य मंत्रियों को भी घेरकर पीड़ा सुना रहे हैं। कुछ कार्यकर्ता सोशल मीडिया पर भी भड़ास निकालने लगे हैं। सत्ताधारी दल के कार्यकर्ताओं व प्रशासनिक अफसरों के बीच बढ़ती दूरी जिले में चर्चा का विषय बनती जा रही है।
विज्ञापन

लंबे अरसे तक प्रदेश की सत्ता से बाहर रही भाजपा के कार्यकर्ता सरकार बनने के बाद हनक की उम्मीद लगाए बैठे थे। परंतु यहां तो दांव ही उल्टा पड़ गया। विपक्ष में रहते थे तो अफसरों पर सत्ता का पिछलग्गू होने का आरोप लगा लेते थे। अब तो केंद्र से लेकर प्रदेश तक अपनी सरकार है। मुख्यमंत्री भी बगल के जिले के हैं और इस जिले में लगातार उनकी सक्रियता रही है। उम्मीद तो यह थी कि सरकार बनते ही अफसर उनका हालचाल पूछने लगेंगे, लेकिन खास होने की आस लगाए इन कार्यकर्ताओं को निराशा हाथ लगी है। प्रशासन कार्यकर्ताओं को ज्यादा तवज्जो दे ही नहीं रहा है। राशनकार्ड, शौचालय व पेंशन से लगायत बिजली आपूर्ति व्यवस्था तक के मामलों में बेचारों को नसीहत सुनने को मिल जा रही है। परेशान कार्यकर्ताओं ने पिछले महीने कुशीनगर के होटल पथिक निवास में आए प्रदेश के सिंचाई मंत्री धर्मपाल सिंह के सामने कड़ा विरोध दर्ज कराया था। इससे पहले वे जिले के प्रभारी मंत्री के सामने भी अपनी बात रख चुके हैं। बुधवार को तुर्कपट्टी जा रहे प्रदेश के कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही के सामने भी यही मसला उठा। कसया से तीन बार विधायक रह चुके सूर्य प्रताप शाही की इस क्षेत्र में मजबूत पकड़ है और यहां के कार्यकर्ता सीधे उनसे जुड़े हैं। लिहाजा मंत्री को सामने देखते ही कार्यकर्ताओं का गुस्सा बाहर निकलने लगा। मंत्री ने कार्यकर्ताओं को हल्के-फुल्के अंदाजा में समझाया भी, लेकिन पीड़ा कम नहीं हुई। कार्यकर्ताओं की असल समस्या यह है कि संगठन के वरिष्ठ पदाधिकारी खुद तो अफसरों से नजदीकी बनाए हुए हैं, लेकिन आम कार्यकर्ताओं को वे भी बहुत भाव नहीं दे रहे हैं। कार्यकर्ताओं और अफसरों के बीच की यह बढ़ती दूरी आजकल खूब चर्चा में है।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed