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26 साल बाद फिर याद किया छह दिसंबर का दिन
ब्यूरो/अमर उजाला कुश्ाीनगर
Updated Thu, 06 Dec 2018 10:15 PM IST
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कलेक्ट्रेट पर हनुमान चालीसा पढ़ते विश्व हिंदू परिषद के कार्यकर्ता।
- फोटो : अमर उजाला
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पडरौना। छह दिसंबर 1992 को अयोध्या में हुई बाबरी मस्जिद विध्वंस की घटना बृहस्पतिवार को 26 साल बाद फिर याद की गई। फर्क सिर्फ इतना रहा कि हिंदू संगठनों ने इसे लेकर न तो शौर्य दिवस मनाया और न ही जुलूस निकाला। हिंदूवादी संगठनों के लोगों ने राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन एएसडीएम को सौंपा और हनुमान चालीसा का पाठ किया। वहीं मुस्लिम संगठनों ने भी राष्ट्रपति को संबोधित तीन सूत्री ज्ञापन एएसडीएम को दिया। हालांकि पुलिस प्रशासन ने रेलवे स्टेशन, रोडवेज और कोर्ट परिसर सहित अन्य सार्वजनिक स्थलों पर विशेष चौकसी बरती।
अंतर्राष्ट्रीय हिंदू परिषद एवं राष्ट्रीय बजरंग दल की तरफ से जितेंद्र जायसवाल, अनिल बर्नवाल, विमलेश पांडेय, संजय गुप्ता, रामनारायण सिंह, नंदू प्रसाद, ईश्वरचंद, प्रद्युम्न उपाध्याय, मुकेश ठाकुर, ध्रुव प्रताप सिंह, हरिबंश सिंह, हरेंद्र गुप्ता सहित कई लोग कलेक्ट्रेट पहुंचे। इन लोगों ने राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन एएसडीएम अजय नारायण सिंह को सौंपा। ज्ञापन के जरिए मांग की गई कि आगामी लोकसभा चुनाव के पहले अयोध्या में राममंदिर का निर्माण कराया जाए, गो हत्या पर कानून बनाया जाए, समान नागरिक संहिता कानून बने, कश्मीर से धारा 370 और 35ए हटाई जाए, सभी मठ मंदिरों को सरकारी अधिग्रहण से मुक्त किया जाए, सभी किसानों का कर्ज तत्काल माफ किया जाए, सभी छात्रों की प्रगति के लिए राष्ट्रीय छात्रयोग बनाया जाए, देश में धर्मांतरण पर रोक लगाई जाए तथा बंग्लादेशी और रोहिंग्या मुसलमान घुसपैठियों को देश से बाहर किया जाए।
इसके बाद राष्ट्रीय ओलमा कौंसिल, भीम आर्मी, एआईएमआईएम सहित विभिन्न संगठनों के लोग भी कलेक्ट्रेट पहुंचे और राष्ट्रपति को संबोधित अपना ज्ञापन डीएम की अनुपस्थिति में एएसडीएम अजय नारायण सिंह को सौंपा। इनका कहना था कि छह दिसंबर 1992 की घटना मुस्जिम समाज के लिए काला दिन के रूप में है। दिनदहाड़े देश की अखंडता और धर्मनिरपेक्षता को दरकिनार कर बाबरी मस्जिद का विध्वंस किया गया था, जिसे मुस्लिम समाज शहादत दिवस के रूप में भी मनाता है। इन लोगों ने एएसडीएम को सौंपे गए राष्ट्रपति को संबोधित अपने ज्ञापन के जरिए तत्कालीन प्रधानमंत्री की तरफ से किए गए वादे के अनुरूप उसी जगह बाबरी मस्जिद का निर्माण कराने, दूसरे पक्ष की तरह मुसलमानों को भी बाबरी मस्जिद में नमाज पढ़ने की अनुमति देने और बाबरी मस्जिद की शहादत के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ तत्काल कानूनी कार्रवाई किए जाने की मांग की। ज्ञापन सौंपने वालों में चंदन कुमार यादव, मोहम्मद याशी आरावत, जावेद अंसारी, बसीउल्लाह, मोहम्मद इरशाद, अमीरुद्दीन सिद्दीकी, सरफुद्दीन अंसारी सहित काफी संख्या में लोग मौजूद थे। छह दिसंबर को पुलिस प्रशासन ने भी काफी चौकसी बरती। बस स्टेशन, रेलवे स्टेशन, कोर्ट सहित अन्य सार्वजनिक स्थल पर पुलिस के जवान तैनात किए गए थे, जो पूरी तरह मुस्तैद रहे।
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अंतर्राष्ट्रीय हिंदू परिषद एवं राष्ट्रीय बजरंग दल की तरफ से जितेंद्र जायसवाल, अनिल बर्नवाल, विमलेश पांडेय, संजय गुप्ता, रामनारायण सिंह, नंदू प्रसाद, ईश्वरचंद, प्रद्युम्न उपाध्याय, मुकेश ठाकुर, ध्रुव प्रताप सिंह, हरिबंश सिंह, हरेंद्र गुप्ता सहित कई लोग कलेक्ट्रेट पहुंचे। इन लोगों ने राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन एएसडीएम अजय नारायण सिंह को सौंपा। ज्ञापन के जरिए मांग की गई कि आगामी लोकसभा चुनाव के पहले अयोध्या में राममंदिर का निर्माण कराया जाए, गो हत्या पर कानून बनाया जाए, समान नागरिक संहिता कानून बने, कश्मीर से धारा 370 और 35ए हटाई जाए, सभी मठ मंदिरों को सरकारी अधिग्रहण से मुक्त किया जाए, सभी किसानों का कर्ज तत्काल माफ किया जाए, सभी छात्रों की प्रगति के लिए राष्ट्रीय छात्रयोग बनाया जाए, देश में धर्मांतरण पर रोक लगाई जाए तथा बंग्लादेशी और रोहिंग्या मुसलमान घुसपैठियों को देश से बाहर किया जाए।
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इसके बाद राष्ट्रीय ओलमा कौंसिल, भीम आर्मी, एआईएमआईएम सहित विभिन्न संगठनों के लोग भी कलेक्ट्रेट पहुंचे और राष्ट्रपति को संबोधित अपना ज्ञापन डीएम की अनुपस्थिति में एएसडीएम अजय नारायण सिंह को सौंपा। इनका कहना था कि छह दिसंबर 1992 की घटना मुस्जिम समाज के लिए काला दिन के रूप में है। दिनदहाड़े देश की अखंडता और धर्मनिरपेक्षता को दरकिनार कर बाबरी मस्जिद का विध्वंस किया गया था, जिसे मुस्लिम समाज शहादत दिवस के रूप में भी मनाता है। इन लोगों ने एएसडीएम को सौंपे गए राष्ट्रपति को संबोधित अपने ज्ञापन के जरिए तत्कालीन प्रधानमंत्री की तरफ से किए गए वादे के अनुरूप उसी जगह बाबरी मस्जिद का निर्माण कराने, दूसरे पक्ष की तरह मुसलमानों को भी बाबरी मस्जिद में नमाज पढ़ने की अनुमति देने और बाबरी मस्जिद की शहादत के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ तत्काल कानूनी कार्रवाई किए जाने की मांग की। ज्ञापन सौंपने वालों में चंदन कुमार यादव, मोहम्मद याशी आरावत, जावेद अंसारी, बसीउल्लाह, मोहम्मद इरशाद, अमीरुद्दीन सिद्दीकी, सरफुद्दीन अंसारी सहित काफी संख्या में लोग मौजूद थे। छह दिसंबर को पुलिस प्रशासन ने भी काफी चौकसी बरती। बस स्टेशन, रेलवे स्टेशन, कोर्ट सहित अन्य सार्वजनिक स्थल पर पुलिस के जवान तैनात किए गए थे, जो पूरी तरह मुस्तैद रहे।
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