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Kushinagar News: 154 सदस्यीय श्रीलंकाई व नेपाली पर्यटकों ने की पूजा
Mon, 26 Aug 2024 02:36 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
Updated Mon, 26 Aug 2024 02:36 PM IST
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पकवा इनार। कुशीनगर में रविवार को 154 सदस्यीय श्रीलंकाई व नेपाली पर्यटकों का दल मुख्य महापरिनिर्वाण मंदिर में महात्मा बुद्ध की लेटी प्रतिमा के समक्ष शीश नवाया। विश्व कल्याण और शांति के लिए कामना की। यहां के प्रमुख दर्शनीय स्थलों का भ्रमण किया।
सुबह 10 बजे के श्रीलंकाई पर्यटकों का 50 सदस्यीय दल कुशीनगर पहुंचा। मुख्य महापरिनिर्वाण मंदिर पहुंचे बौद्ध भिक्षुओं ने पर्यटकों से विशेष पूजा-अर्चना कराई। मंदिर में लेटी प्राचीन बुद्ध की प्रतिमा की विशिष्टता और उसके तीन अलग-अलग मुद्राओं को भी साझा किया। दल के सदस्यों ने बुद्ध प्रतिमा पर चीवर चढ़ाया। इसके बाद स्तूप की परिक्रमा कर उसके महत्व की भी जानकारी हासिल किया। जिसमें बुद्ध की अस्थियां और राख सुरक्षित रखी गईं हैं। उन्होंने पर्यटकों के बीच दान भी दिया। इसके बाद दोपहर में नेपाल का 60 सदस्यीय, दोपहर बाद एक बजे श्रीलंका का चार सदस्यीय व शाम साढ़े चार बजे 40 पर्यटकों का दल मुख्य महापरिनिर्वाण मंदिर के बाद बुद्ध के अंतिम संस्कार स्थल रामाभार स्तूप पहुंचे। जहां भव्य स्तूप देखकर पर्यटकों की जिज्ञासा बढ़ गई। उन्हें स्तूप और उत्खनित पुरावशेषों के बारे मे सूक्ष्म जानकारी भी दिया गया। इसके अलावा मांथा कुंवर मंदिर सहित अन्य स्थलों का भ्रमण कर कर प्राचीनता, ऐतिहासिकता व पुरातात्विक महत्व के बारे में जानकारी हासिल किया।
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सुबह 10 बजे के श्रीलंकाई पर्यटकों का 50 सदस्यीय दल कुशीनगर पहुंचा। मुख्य महापरिनिर्वाण मंदिर पहुंचे बौद्ध भिक्षुओं ने पर्यटकों से विशेष पूजा-अर्चना कराई। मंदिर में लेटी प्राचीन बुद्ध की प्रतिमा की विशिष्टता और उसके तीन अलग-अलग मुद्राओं को भी साझा किया। दल के सदस्यों ने बुद्ध प्रतिमा पर चीवर चढ़ाया। इसके बाद स्तूप की परिक्रमा कर उसके महत्व की भी जानकारी हासिल किया। जिसमें बुद्ध की अस्थियां और राख सुरक्षित रखी गईं हैं। उन्होंने पर्यटकों के बीच दान भी दिया। इसके बाद दोपहर में नेपाल का 60 सदस्यीय, दोपहर बाद एक बजे श्रीलंका का चार सदस्यीय व शाम साढ़े चार बजे 40 पर्यटकों का दल मुख्य महापरिनिर्वाण मंदिर के बाद बुद्ध के अंतिम संस्कार स्थल रामाभार स्तूप पहुंचे। जहां भव्य स्तूप देखकर पर्यटकों की जिज्ञासा बढ़ गई। उन्हें स्तूप और उत्खनित पुरावशेषों के बारे मे सूक्ष्म जानकारी भी दिया गया। इसके अलावा मांथा कुंवर मंदिर सहित अन्य स्थलों का भ्रमण कर कर प्राचीनता, ऐतिहासिकता व पुरातात्विक महत्व के बारे में जानकारी हासिल किया।
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