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कार्यकाल सिर्फ 19 माह, 27 साल से पेंशन ले रहे शिवदानी
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Tenure is only 19 months, Shivdani is taking pension for 27 years
- फोटो : KAUSHAMBI
एक बार ही सही सांसद या विधायक बन जाओ, सारा जीवन सरकार की ओर से मिलने वाली पेंशन से कटेगा। इसका उदाहरण वर्ष 1993 में चायल क्षेत्र से विधायक रहे शिवदानी हैं। महज 19 माह विधायक रहे शिवदानी दोबारा कभी विधानसभा नहीं पहुंचे। फिलहाल, 27 साल से वह विधायक की पेंशन व सालाना एक लाख रुपये तक का रेलवे कूपन और मुफ्त चिकित्सकीय सुविधा का लाभ ले रहे हैं।
शिवदानी ने वर्ष 1991 में भाजपा के टिकट पर पहला चुनाव चायल विधान सभा से लड़ा था। इस चुनाव में वह दिनेश सोनकर से 15 सौ मतों से पराजित हुए। वर्ष 1992 में विवादित ढांचा विध्वंस के बाद वर्ष 1993 में मध्यावधि चुनाव हुआ। भाजपा ने इस चुनाव में चायल से फिर शिवदानी पर दांव लगाया।
28 दिसंबर 1993 को शिवदानी पहली बार विधायक चुने गए। इस चुनाव में उन्होंने राधेश्याम भारतीय को पराजित किया था। सपा-बसपा के गठबंधन से बनी सरकार समर्थन वापसी के कारण गिर गई। नतीजतन, शिवदानी को जुलाई 1995 में विधायक की कुर्सी छोड़नी पड़ी। वर्ष 1996 में कांग्रेस व बसपा का गठबंधन हो गया था।
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इस चुनाव में शिवदानी को कांग्रेस के विजय प्रकाश के सामने हार का सामना करना पड़ा। इसके बाद से भाजपा ने कभी न तो शिवदानी पर दांव लगाया और न ही वह दल बदल कर सदन पहुंच सके। शिवदानी को मौजूदा समय में 27 हजार रुपये प्रति माह पेंशन मिलती है। इसके अलावा एक लाख रुपये सालाना का मुफ्त रेल सफर के लिए कूपन व मुफ्त चिकित्सकीय सुविधा भी मिल रही है।
मौजूदा वक्त सरायअकिल के चेयरमैन हैं शिवदानी
पूर्व विधायक शिवदानी का जीवन बेहद ही साधारण है। उनके पास महज छह बीघे कृषि योग्य भूमि है। आवागमन के लिए एक जायलो गाड़ी है, जिसे तीन साल पहले छोटे भाई ने खरीद कर गिफ्ट की है। एक दिसंबर 2017 को सरायअकिल से उन्हें नगर पंचायत अध्यक्ष चुना गया है।
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शिवदानी ने वर्ष 1991 में भाजपा के टिकट पर पहला चुनाव चायल विधान सभा से लड़ा था। इस चुनाव में वह दिनेश सोनकर से 15 सौ मतों से पराजित हुए। वर्ष 1992 में विवादित ढांचा विध्वंस के बाद वर्ष 1993 में मध्यावधि चुनाव हुआ। भाजपा ने इस चुनाव में चायल से फिर शिवदानी पर दांव लगाया।
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28 दिसंबर 1993 को शिवदानी पहली बार विधायक चुने गए। इस चुनाव में उन्होंने राधेश्याम भारतीय को पराजित किया था। सपा-बसपा के गठबंधन से बनी सरकार समर्थन वापसी के कारण गिर गई। नतीजतन, शिवदानी को जुलाई 1995 में विधायक की कुर्सी छोड़नी पड़ी। वर्ष 1996 में कांग्रेस व बसपा का गठबंधन हो गया था।
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इस चुनाव में शिवदानी को कांग्रेस के विजय प्रकाश के सामने हार का सामना करना पड़ा। इसके बाद से भाजपा ने कभी न तो शिवदानी पर दांव लगाया और न ही वह दल बदल कर सदन पहुंच सके। शिवदानी को मौजूदा समय में 27 हजार रुपये प्रति माह पेंशन मिलती है। इसके अलावा एक लाख रुपये सालाना का मुफ्त रेल सफर के लिए कूपन व मुफ्त चिकित्सकीय सुविधा भी मिल रही है।
मौजूदा वक्त सरायअकिल के चेयरमैन हैं शिवदानी
पूर्व विधायक शिवदानी का जीवन बेहद ही साधारण है। उनके पास महज छह बीघे कृषि योग्य भूमि है। आवागमन के लिए एक जायलो गाड़ी है, जिसे तीन साल पहले छोटे भाई ने खरीद कर गिफ्ट की है। एक दिसंबर 2017 को सरायअकिल से उन्हें नगर पंचायत अध्यक्ष चुना गया है।