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यूपी बोर्ड : 16 राजकीय विद्यालयों के प्रधानाचार्यों ने परीक्षा कराने से खड़े किए हाथ
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पूरब शरीरा स्थित पं. दीन दयाल उपाध्याय राजकीय मॉडल इंटर कॉलेज। संवाद
जिले के 16 राजकीय विद्यालयों के प्रधानाचार्यों ने यूपी बोर्ड की हाईस्कूल एवं इंटरमीडिएट परीक्षा कराने से हाथ खड़े कर दिए हैं। कारण, इन विद्यालयों में फर्नीचर, सीसीटीवी कैमरा, चहारदीवारी, बिजली समेत अन्य जरूरी भौतिक संसाधनों का अभाव है। प्रधानाचार्यों ने भौतिक संसाधनों की कमी का हवाला देकर ऑनलाइन आपत्तियां दर्ज कराई हैं। अब डीएम की अध्यक्षता वाली समिति की बैठक में इन केंद्रों के संबंध में अंतिम निर्णय लिया जाएगा।
माध्यमिक शिक्षा परिषद की हाईस्कूल व इंटरमीडिएट परीक्षा 2025 के लिए जिले भर 44,650 छात्र-छात्राओं ने पंजीकरण कराया है। इन विद्यार्थियों की पारदर्शी परीक्षा कराने के लिए परिषद ने 10 नवंबर को 21 राजकीय, 27 एडेड व 21 वित्तविहीन समेत 69 विद्यालयों को केंद्र बनाकर अनंतिम सूची जारी की थी। साथ ही 14 नवंबर तक आपत्तियां मांगीं थीं।
डीआईओएस कार्यालय के मुताबिक जिले भर से 101 ऑनलाइन आपत्तियां दर्ज हुईं। हैरानी की बात ये है कि जिन 21 राजकीय विद्यालयों को परीक्षा केंद्र बनाया गया, उनमें से 16 के प्रधानाचार्यों ने परीक्षा कराने से ही इन्कार कर दिया है। प्रधानाचार्यों ने दर्ज कराई गई आपत्तियों में बताया कि उनके संस्थान में परीक्षार्थियों के बैठने के लिए फर्नीचर तक की व्यवस्था नहीं है।
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यही नहीं, सीसीटीवी कैमरा विथ वायस रिकार्डर, बिजली, चहारदीवारी, गेट, डबल लॉक आलमारी, इनवर्टर, जनरेटर आदि की भी व्यवस्था नहीं है। भौतिक संसाधनों के अभाव में पारदर्शी परीक्षा कराना उनके बस की बात नहीं है।
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इन विद्यालयों ने बोर्ड परीक्षा कराने से किया मना
-- -राजकीय हाईस्कूल लौधना, अफजलपुर वारी, कशिया, पल्हाना कछार, मिश्रपुर डहिया, अर्कामहावीरपुर, रसूलपुर बदले, महाराज का पूरा, शेरगढ़ नेवादा, राला-सिराथू, अमिरतापुर, ढोकसहा, पं. दीनदयाल उपाध्याय राजकीय मॉडल इंटर कॉलेज पूरबशरीरा, देवखरपुर, केसारी और राजकीय इंटर कॉलेज ओसा।
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परिषद की कार्यशैली पर सवाल
-- बोर्ड परीक्षा केंद्रों की अनंतिम सूची जारी करने से पहले सभी प्रधानाचार्यों से विद्यालय में मौजूद आधारभूत संसाधनों के बाबत ऑनलाइन जानकारी मांगी गई थी। विद्यालयों द्वारा दी गई जानकारी का डीआईओएस की तरफ से सत्यापन कराया गया था। राजकीय विद्यालयों के साथ ही डीआईओएस की सत्यापन रिपोर्ट में साफतौर पर संसाधनों का अभाव बताया गया है। इसके बाद भी परिषद ने किन परिस्थितियों में इन विद्यालयों को केंद्र बना दिया, इस पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
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यह सही है कि राजकीय विद्यालयों में बोर्ड परीक्षा कराने के लिए आधारभूत संसाधन नहीं हैं। परिषद को पहले ही इसकी जानकारी ऑनलाइन दे दी गई थी। इसीलिए केंद्रों की अनंतिम सूची जारी होने के बाद 16 राजकीय विद्यालयों ने परीक्षा कराने में असमर्थता जाहिर की है। अब डीएम की अध्यक्षता वाली समिति केंद्र बनाए गए विद्यालयों की जांच करेगी। इसके बाद सूची को अंतिम रूप दिया जाएगा।
-- डॉ. एसएन यादव, डीआईओएस
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माध्यमिक शिक्षा परिषद की हाईस्कूल व इंटरमीडिएट परीक्षा 2025 के लिए जिले भर 44,650 छात्र-छात्राओं ने पंजीकरण कराया है। इन विद्यार्थियों की पारदर्शी परीक्षा कराने के लिए परिषद ने 10 नवंबर को 21 राजकीय, 27 एडेड व 21 वित्तविहीन समेत 69 विद्यालयों को केंद्र बनाकर अनंतिम सूची जारी की थी। साथ ही 14 नवंबर तक आपत्तियां मांगीं थीं।
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डीआईओएस कार्यालय के मुताबिक जिले भर से 101 ऑनलाइन आपत्तियां दर्ज हुईं। हैरानी की बात ये है कि जिन 21 राजकीय विद्यालयों को परीक्षा केंद्र बनाया गया, उनमें से 16 के प्रधानाचार्यों ने परीक्षा कराने से ही इन्कार कर दिया है। प्रधानाचार्यों ने दर्ज कराई गई आपत्तियों में बताया कि उनके संस्थान में परीक्षार्थियों के बैठने के लिए फर्नीचर तक की व्यवस्था नहीं है।
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यही नहीं, सीसीटीवी कैमरा विथ वायस रिकार्डर, बिजली, चहारदीवारी, गेट, डबल लॉक आलमारी, इनवर्टर, जनरेटर आदि की भी व्यवस्था नहीं है। भौतिक संसाधनों के अभाव में पारदर्शी परीक्षा कराना उनके बस की बात नहीं है।
इन विद्यालयों ने बोर्ड परीक्षा कराने से किया मना
परिषद की कार्यशैली पर सवाल
यह सही है कि राजकीय विद्यालयों में बोर्ड परीक्षा कराने के लिए आधारभूत संसाधन नहीं हैं। परिषद को पहले ही इसकी जानकारी ऑनलाइन दे दी गई थी। इसीलिए केंद्रों की अनंतिम सूची जारी होने के बाद 16 राजकीय विद्यालयों ने परीक्षा कराने में असमर्थता जाहिर की है। अब डीएम की अध्यक्षता वाली समिति केंद्र बनाए गए विद्यालयों की जांच करेगी। इसके बाद सूची को अंतिम रूप दिया जाएगा।