{"_id":"fe7978d10901c819b53ffbe2571a7094","slug":"panchayat-chunav-news-hindi-news-116","type":"story","status":"publish","title_hn":"पंचायत की सबसे बड़ी कुर्सी के लिए गणित शुरू","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
पंचायत की सबसे बड़ी कुर्सी के लिए गणित शुरू
अमर उजाला ब्यूरो, कौशाम्बी
Updated Tue, 03 Nov 2015 11:28 PM IST
विज्ञापन
मंझनपुर (ब्यूरो)। जिला पंचायत सदस्य पद का चुनाव खत्म हो गया है। इसके साथ ही अब पंचायत की सबसे बड़ी कुर्सी यानी जिला पंचायत (जिपं) अध्यक्ष बनने के लिए असरदार लोग गणित लगाने लगे हैं। महिला के लिए आरक्षित इस कुर्सी पर कब्जे के लिए सपा, बसपा में घमासान होने की उम्मीद जताई जा रही है। हालांकि अभी दोनों पार्टियों के बड़े नेता जुबान खोलने से बच रहे हैं।
बता दें कि कौशाम्बी में जिला पंचायत की 29 सीटे हैं। ऐसे में अध्यक्ष बनने के लिए 15 सदस्यों का समर्थन होना जरूरी है। वहीं त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के नतीजों में किसी भी दल के पास 15 सदस्य नहीं है। अब तक जिला पंचायत अध्यक्ष पद पर आसीन रही बहुजन समाज पार्टी दुबारा इस कुर्सी पर कब्जे की कोशिश में है। इसके लिए बसपा के जिले के सबसे दिग्गज नेता और विधायक, पूर्वमंत्री इंद्रजीत सरोज ने भी पंचायत चुनाव में पार्टी समर्थित उम्मीदवारों के पक्ष में जनसभा की थी। इतना कुछ करने के बाद भी पार्टी समर्थित करीब 11 उम्मीदवार ही जीत सके हैं।
इसके अलावा समाजवादी पार्टी के स्थानीय नेताओं ने भी मतदान से लेकर मतगणना तक अपनी पूरी ताकत लगा दी। इसके बावजूद इस दल के भी 15 समर्थित सदस्य जीतकर मिनी सदन में नहीं पहुंच सके। चुनाव में भाजपा को 4 सीटें मिली हैं। यही भाजपा समर्थित सदस्य और निर्दलीय जीते सदस्य अब मिनी सदन के मुखिया के चुनाव में सबसे अहम साबित होंगे। फिलहाल नतीजे आने के दूसरे दिन ही सपा और बसपा ने अपनी गुणा-गणित शुरू कर दी है।
विज्ञापन
विज्ञापन
बता दें कि कौशाम्बी में जिला पंचायत की 29 सीटे हैं। ऐसे में अध्यक्ष बनने के लिए 15 सदस्यों का समर्थन होना जरूरी है। वहीं त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के नतीजों में किसी भी दल के पास 15 सदस्य नहीं है। अब तक जिला पंचायत अध्यक्ष पद पर आसीन रही बहुजन समाज पार्टी दुबारा इस कुर्सी पर कब्जे की कोशिश में है। इसके लिए बसपा के जिले के सबसे दिग्गज नेता और विधायक, पूर्वमंत्री इंद्रजीत सरोज ने भी पंचायत चुनाव में पार्टी समर्थित उम्मीदवारों के पक्ष में जनसभा की थी। इतना कुछ करने के बाद भी पार्टी समर्थित करीब 11 उम्मीदवार ही जीत सके हैं।
विज्ञापन
इसके अलावा समाजवादी पार्टी के स्थानीय नेताओं ने भी मतदान से लेकर मतगणना तक अपनी पूरी ताकत लगा दी। इसके बावजूद इस दल के भी 15 समर्थित सदस्य जीतकर मिनी सदन में नहीं पहुंच सके। चुनाव में भाजपा को 4 सीटें मिली हैं। यही भाजपा समर्थित सदस्य और निर्दलीय जीते सदस्य अब मिनी सदन के मुखिया के चुनाव में सबसे अहम साबित होंगे। फिलहाल नतीजे आने के दूसरे दिन ही सपा और बसपा ने अपनी गुणा-गणित शुरू कर दी है।
विज्ञापन