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मनरेगा : पक्के कार्यों का सात महीने से अटका 23.60 करोड़ रुपये
Sat, 14 Jun 2025 12:42 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कौशांबी
संवाद न्यूज एजेंसी, कौशांबी
Updated Sat, 14 Jun 2025 12:42 AM IST
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मंझनपुर। मनरेगा के अंतर्गत कराए गए पक्के कामों का तकरीबन 23.60 करोड़ रुपये पिछले सात माह से फंसा है। शासन से बजट जारी नहीं होने के कारण ग्राम प्रधान व मटेरियल सप्लायर परेशान हैं। भुगतान नहीं होने से ग्रामीण क्षेत्रों में विकास कार्य प्रभावित हो रहा है।
मनरेगा के तहत ग्रामीण क्षेत्र में कार्यरत मजदूरों को वर्ष में 100 दिन का रोजगार देने की गारंटी दी जाती है। बजट में 60 प्रतिशत मजदूरी पर व 40 प्रतिशत पक्के कार्यों पर व्यय किया जाता है। मजदूरों का पैसा तो उनके बैंक खाते में चला जाता है, लेकिन मटेरियल का भुगतान सप्लायर को किया जाता है।
ऐगवां के ग्राम प्रधान मनोज तिवारी ने बताया कि पिछले अक्तूबर माह से मटेरियल का पैसा शासन की ओर से नहीं भेजा गया है, जिससे सप्लायर परेशान हैं। उनका लाखों रुपये बकाया चल रहा है। ऐसे में उन्होंने सप्लाई बंद कर दी है, जिससे विकास कार्य प्रभावित हो रहे हैं। जबकि, बिल-बाउचर सभी फीड करा दिए गए हैं।
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इसी प्रकार मनरेगा मजदूरों का इस वित्तीय वर्ष का पैसा भी नहीं आया है। ऐसे में लोगों का मनरेगा योजना से भरोसा उठता जा रहा है। कई प्रधानों ने बताया कि ग्रामीण क्षेत्र में मजदूर अब काम करने से कतराने लगे हैं।
मनरेगा के तहत ग्राम प्रधानों को काफी मटेरियल उधार दिया गया। आठ महीने से भुगतान नहीं होने से काफी समस्या हो रही है। प्रधानों का कहना है कि पैसा आने के बाद ही दिया जाएगा। -रमेश अग्रहरि, व्यापारी
मनरेगा के तहत करीब आठ महीने पूर्व करीब चार लाख का सामान लेकर गांव में विकास कार्य कराया गया। अभी तक भुगतान नहीं किया गया। अब फर्म मालिक और उधार देने से मना कर दिया।-- सविता यादव, ग्राम प्रधान, भैला मकदूमपुर
अक्तूबर-नवंबर में पक्के कार्यों का बजट आने पर भुगतान हुआ था। सात माह से पक्के कार्यों का पैसा नहीं आने के कारण करीब 23.60 करोड़ रुपये बकाया हो गया है। इसकी सूचना अधिकारियों को भेज दी गई है। बजट आते ही भुगतान हो जाएगा।-मनोज वर्मा, डीसी, मनरेगा
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मनरेगा के तहत ग्रामीण क्षेत्र में कार्यरत मजदूरों को वर्ष में 100 दिन का रोजगार देने की गारंटी दी जाती है। बजट में 60 प्रतिशत मजदूरी पर व 40 प्रतिशत पक्के कार्यों पर व्यय किया जाता है। मजदूरों का पैसा तो उनके बैंक खाते में चला जाता है, लेकिन मटेरियल का भुगतान सप्लायर को किया जाता है।
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ऐगवां के ग्राम प्रधान मनोज तिवारी ने बताया कि पिछले अक्तूबर माह से मटेरियल का पैसा शासन की ओर से नहीं भेजा गया है, जिससे सप्लायर परेशान हैं। उनका लाखों रुपये बकाया चल रहा है। ऐसे में उन्होंने सप्लाई बंद कर दी है, जिससे विकास कार्य प्रभावित हो रहे हैं। जबकि, बिल-बाउचर सभी फीड करा दिए गए हैं।
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इसी प्रकार मनरेगा मजदूरों का इस वित्तीय वर्ष का पैसा भी नहीं आया है। ऐसे में लोगों का मनरेगा योजना से भरोसा उठता जा रहा है। कई प्रधानों ने बताया कि ग्रामीण क्षेत्र में मजदूर अब काम करने से कतराने लगे हैं।
मनरेगा के तहत ग्राम प्रधानों को काफी मटेरियल उधार दिया गया। आठ महीने से भुगतान नहीं होने से काफी समस्या हो रही है। प्रधानों का कहना है कि पैसा आने के बाद ही दिया जाएगा। -रमेश अग्रहरि, व्यापारी
मनरेगा के तहत करीब आठ महीने पूर्व करीब चार लाख का सामान लेकर गांव में विकास कार्य कराया गया। अभी तक भुगतान नहीं किया गया। अब फर्म मालिक और उधार देने से मना कर दिया।
अक्तूबर-नवंबर में पक्के कार्यों का बजट आने पर भुगतान हुआ था। सात माह से पक्के कार्यों का पैसा नहीं आने के कारण करीब 23.60 करोड़ रुपये बकाया हो गया है। इसकी सूचना अधिकारियों को भेज दी गई है। बजट आते ही भुगतान हो जाएगा।-मनोज वर्मा, डीसी, मनरेगा