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मारीच को फेंका समुद्र पार
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Marich was thrown across the sea
- फोटो : KAUSHAMBI
मारीच को फेंका समुद्र पार
करारी नगर की रामलीला महोत्सव का तीसरा दिन, मंचन देख भावविभोर हुए दर्शक
अमर उजाला ब्यूरो
करारी। स्थानीय नगर की ऐतिहासिक रामलीला में सोमवार रात मारीच-सुबाहु वध, अहिल्या उद्धार, नगर दर्शन और फुलवारी लीला का मंचन किया गया। उत्तर भारत के प्रसिद्ध कलाकारों का अभिनय देख दर्शक भावविभोर हो उठे। दर्शक दीर्घा जय श्रीराम के जयघोष से गूंजती रही।
कथा प्रसंग के मुताबिक ताड़का का वध करने के बाद मुनि विश्वामित्र के साथ प्रभु श्रीराम और लक्ष्मण उनके आश्रम पहुंचते हैं। वहां ऋषियों-मुनियों के द्वारा धार्मिक अनुष्ठान कराया जाता है। इसमें बाधा डालने आने वाले राक्षसों का भगवान वध करते हैं। एक ही बाण से मारीच को समुंदर पार फेंक देते हैं। जबकि सुबाहु को मौत की नींद सुला देते हैं। इसी बीच मुनि विश्वामित्र को जनकपुर में धनुष यज्ञ होने की खबर मिलती है। राम-लक्ष्मण के साथ वह जनकपुर पहुंचते हैं। रास्ते में प्रभु श्री राम अहिल्या का उद्धार करते हैं। जनकपुर में नगर दर्शन के साथ फूलों की बाग देखने जाते हैं। जहां उनकी जगतजननी माता सीता से क्षणिक भेंट होती है। पहली ही नजर में सीता जी वर के रूप में अपने ईष्ट से श्री राम को मांगती हैं। इसी के साथ इस दिन की लीला का समापन हुआ। रामलीला देखने के लिए नगर के साथ आसपास के गांवों से भी बड़ी संख्या में लोगों की भीड़ उमड़ी। इस मौके पर संयोजक/ट्रस्टी रमेश चंद्र शर्मा, कमेटी अध्यक्ष सुनील जायसवाल उर्फ पिंटू, संजय जायसवाल, पंकज शर्मा, पवन शर्मा, राकेश, पंकज वर्मा, श्याम सुंदर केसरवानी आदि मौजूद रहे।
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करारी नगर की रामलीला महोत्सव का तीसरा दिन, मंचन देख भावविभोर हुए दर्शक
अमर उजाला ब्यूरो
करारी। स्थानीय नगर की ऐतिहासिक रामलीला में सोमवार रात मारीच-सुबाहु वध, अहिल्या उद्धार, नगर दर्शन और फुलवारी लीला का मंचन किया गया। उत्तर भारत के प्रसिद्ध कलाकारों का अभिनय देख दर्शक भावविभोर हो उठे। दर्शक दीर्घा जय श्रीराम के जयघोष से गूंजती रही।
कथा प्रसंग के मुताबिक ताड़का का वध करने के बाद मुनि विश्वामित्र के साथ प्रभु श्रीराम और लक्ष्मण उनके आश्रम पहुंचते हैं। वहां ऋषियों-मुनियों के द्वारा धार्मिक अनुष्ठान कराया जाता है। इसमें बाधा डालने आने वाले राक्षसों का भगवान वध करते हैं। एक ही बाण से मारीच को समुंदर पार फेंक देते हैं। जबकि सुबाहु को मौत की नींद सुला देते हैं। इसी बीच मुनि विश्वामित्र को जनकपुर में धनुष यज्ञ होने की खबर मिलती है। राम-लक्ष्मण के साथ वह जनकपुर पहुंचते हैं। रास्ते में प्रभु श्री राम अहिल्या का उद्धार करते हैं। जनकपुर में नगर दर्शन के साथ फूलों की बाग देखने जाते हैं। जहां उनकी जगतजननी माता सीता से क्षणिक भेंट होती है। पहली ही नजर में सीता जी वर के रूप में अपने ईष्ट से श्री राम को मांगती हैं। इसी के साथ इस दिन की लीला का समापन हुआ। रामलीला देखने के लिए नगर के साथ आसपास के गांवों से भी बड़ी संख्या में लोगों की भीड़ उमड़ी। इस मौके पर संयोजक/ट्रस्टी रमेश चंद्र शर्मा, कमेटी अध्यक्ष सुनील जायसवाल उर्फ पिंटू, संजय जायसवाल, पंकज शर्मा, पवन शर्मा, राकेश, पंकज वर्मा, श्याम सुंदर केसरवानी आदि मौजूद रहे।
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