लोहंदा कांड : वीडियो के अलावा कॉल डिटेल भी बताएगी आरोपी प्रधान की भूमिका
लोहंदा गांव में 27 मई को आठ वर्षीय बालिका मृतक रामबाबू तिवारी के भाई के यहां आयोजित रामायण में गई। प्रसाद लेने के बाद वह बच्चों के साथ घर लौट रही थी। रास्ते में रामबाबू तिवारी के बेटे सिद्धार्थ ने कारखाना में ईंट फेंकते समय बालिका को पकड़ लिया।
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लोहंदा कांड में पूरे घटना क्रम के बीच फरार आरोपी प्रधान भूप नारायण पाल कितने दिन गांव में ठहरा, किससे और कब बातचीत की। घटना की जांच कर रही एसआईटी के हाथ ऐसे कई अहम साक्ष्य लगे हैं। कॉल डिटेल व अन्य वैज्ञानिक तरीके से किए गए साक्ष्य संकलन में यह भी पता चला है कि आरोपी दो जून तक गांव में ही मौजूद था।
लोहंदा गांव में 27 मई को आठ वर्षीय बालिका मृतक रामबाबू तिवारी के भाई के यहां आयोजित रामायण में गई। प्रसाद लेने के बाद वह बच्चों के साथ घर लौट रही थी। रास्ते में रामबाबू तिवारी के बेटे सिद्धार्थ ने कारखाना में ईंट फेंकते समय बालिका को पकड़ लिया। सिद्धार्थ पर परिजनों ने बालिका को पीटने की बात बताई। जबकि बालिका की मां ने दुष्कर्म किए जाने का आरोप लगाया। 28 मई को सिद्धार्थ के खिलाफ पुलिस ने केस दर्ज कर जेल भेजा।
बेटे पर फर्जी मुकदमा दर्ज कराए जाने की गुहार लगाते-लगाते रामबाबू ने सैनी कोतवाली में जहर खाकर जान दे दी। न्याय की मांग करने पर रामबाबू के परिजन व ग्रामीणों पर पुलिस ने लाठीचार्ज किया। मामले ने तूल पकड़ा तो सियासत गरमा गई। एसपी राजेश कुमार ने एसआईटी (विशेष जांच प्रकोष्ठ) गठित की। टीम में शामिल कड़ाधाम थानाध्यक्ष धीरेंद्र सिंह सहित तीन पुलिस कर्मियों ने जांच करना शुरू किया तो पता चला कि दुष्कर्म का आरोप गलत है।
कोर्ट ने भी पीड़िता के गोपनीय बयान का अवलोकन करने के बाद दुष्कर्म के आरोप से सिद्धार्थ को राहत देते हुए जमानत दे दी। वहीं एसआईटी टीम ने गांव पहुंचकर बालिका सहित उसके साथ घटना वाले दिन रहे बच्चों के बयान दर्ज किए। बुधवार को भी टीम ने दोनों पक्ष से कई लोगों से जानकारी हासिल की। प्रधान की गांव में मौजूदगी को लेकर वीडियो भी हाथ लगा, जिसमें पीड़िता की मां बोल रही है कि प्रधान से बात करने के बाद कार्रवाई के लिए पति थाने गए थे।
यही नहीं, पुलिस ने प्रधान सहित कई लोगों के कॉल डिटेल को भी खंगाला। तमाम लोगों से पूछताछ में यह भी पता चला है कि दो जून की दोपहर बाद तक प्रधान गांव में ही मौजूद था। इसके बाद वह पानीपत के लिए निकला है। एसपी राजेश कुमार ने बताया कि प्रधान गांव में कब मौजूद था, किससे बात हुई, क्या भूमिका रही, सभी के साक्ष्य संकलित किए जा रहे हैं।
नेताओं की भीड़ देख बिना जांच गांव से लौटी एसआईटी
लोहंदा कांड की जांच कर रही एसआईटी बृहस्पतिवार को भी जांच करने के लिए गांव पहुंची थी, लेकिन देखा कि कई पार्टी व संगठन के लोग दोनों पीड़ित परिवार से मुलाकात कर रहे हैं तो वापस लौट आई। पुलिस टीम का मानना है कि गोपनीय तरीके से की जा रही जांच में जनप्रतिनिधि पुलिस पर दबाव डालने की कोशिश करते या फिर जांच में क्या हुआ, इसकी जानकारी हासिल करते। हालांकि, शाम को कड़ाधाम एसओ धीरेंद्र सिंह अपनी टीम के साथ दोबारा गांव पहुंचे और आठ ग्रामीणों के बयान दर्ज कर पूरे घटना की जानकारी हासिल की।
बीमार हुई पीड़िता की मां, बोली...इलाज के लिए पैसे नहीं
लोहंदा गांव में बृहस्पतिवार को कई राजनीतिक दल व संगठन के लोग दोनों पक्ष से मिलने के लिए पहुंचे और हर संभव मदद का ढांढस बंधाया, लेकिन दुष्कर्म पीड़िता की मां उस समय नाराज हो गई, जब समाजवादी पार्टी का प्रतिनिधि मंडल उससे मिलने पहुंचा। बोली...तीन दिन से बीमार हूं, सभी आते हैं और हाल-चाल लेकर चले जाते हैं। कोई एक रुपये की मदद करने वाला नहीं है। इलाज के लिए पैसे नहीं हैं. पति जेल में बंद है। कितनी बार सभी को घटना की जानकारी दूं। इसके बावजूद महिला की बात को काटते हुए राजनीतिक रोटियां सेंकने शुरू कर दिया गया।
अखिलेश से बोलो...दो मुही बात न करें
दुष्कर्म पीड़िता के परिवार से मिलने पहुंचे समाजवादी पार्टी के जनप्रतिनिधि जब पीड़िता से घटना की जानकारी लेकर हर संभव मदद का आश्वासन दे रहे थे, तभी भीड़ में मौजूद पाल समाज का एक युवक खड़ा हो गया। नाराज होकर बोला कि सपा के साथ हमारा समाज हमेशा खड़ा था। आज जब घटना हुई तो अखिलेश यादव दोनों पक्षों को लेकर अलग-अलग बयान देकर राजनीति कर रहे हैं। हमारा समाज खुद की लड़ाई लड़ने को पूरी तरह तैयार है। अखिलेश यादव से कह दो कि वह दो मुंही बात न करें। समाज को उनकी जरूरत नहीं है।