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Kaushambi News: बिरनेर गांव में लाखों खर्च...विकास नदारद<bha>;</bha> सड़कें-शौचालय बदहाल
Sat, 17 Oct 2026 01:11 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कौशांबी
संवाद न्यूज एजेंसी, कौशांबी
Updated Sat, 17 Oct 2026 01:11 AM IST
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सजन लाल
ब्लॉक क्षेत्र की बिरनेर ग्राम पंचायत में पांच साल में लाखों रुपये खर्च होने के बावजूद विकास नहीं हुआ है। गांव में सड़कें खराब हैं, शौचालय और बिजली जैसी बुनियादी सुविधाओं का अभाव है। जलनिकासी और खराब हैंडपंप भी ग्रामीणों की बड़ी समस्या हैं।
नहर पार बसी आबादी का पंद्रह साल पुराना खड़ंजा उखड़ गया है। दलित बस्ती, राजू के घर से अमर के घर तक और प्राथमिक विद्यालय जाने वाला रास्ता भी जर्जर है। पाल बस्ती के रास्ते की मरम्मत भी वर्षों से नहीं हुई है। बरसात में इन रास्तों से गुजरना बहुत मुश्किल हो जाता है। गांव को कागजों पर खुले में शौच से मुक्त घोषित किया गया है।
हालांकि, खन्ना, राकेश, विनोद, मैकू, प्रमोद, लवकुश, सोहन और मोहन जैसे कई पात्र परिवारों को अब तक शौचालय नहीं मिले हैं। इन परिवारों को शौच के लिए बाहर जाना पड़ता है।
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बुनियादी सुविधाओं का अभाव
दलित बस्ती में बिजली के खंभे भी नहीं हैं। इस वजह से करीब बीस घरों के लोग बांस-बल्ली के सहारे केबल बांधकर बिजली का इस्तेमाल कर रहे हैं। गांव में कई परिवारों को शौचालय नहीं मिले हैं, जबकि इसे खुले में शौच से मुक्त बताया गया है। सड़कें भी बदहाल हैं, जिससे आवागमन में परेशानी होती है। जलनिकासी और खराब हैंडपंप की समस्या भी बनी हुई है।
ग्रामीणों की बात-- -
गांव में अब भी कई परिवार शौचालय लाभ योजना से वंचित हैं। पात्र होने के बाद भी उन्हें शौचालय नहीं मिला। गांव के कई रास्ते,हैंडपंप भी खराब हैं।
फोटो -सजनलाल
कई बार शौचालय के लिए ऑनलाइन आवेदन किया, प्रधान सचिव के यहां भी चक्कर लगाया,आज तक शौचालय नहीं मिला। घर की बहू बेटियां बाहर जाती हैं।
फोटो - रामभवन
15 साल पहले घर के सामने खड़ंजा बना था। अन्य रास्ते ऊंचाई पर बन गए, जिससे सामने बने खड़ंजे से बरसात का पानी नहीं निकल पाता। बस्ती भर जाता है।
फोटो - मान सिंह
-- वर्जन-- -- -
गांव में जो भी समस्या है, उसे दूर कराया जाएगा। जो भी पात्र लाभार्थी मिलेंगे, उन्हें सरकारी योजनाओं का लाभ दिलवाया जायेगा। अन्य कमियां भी दूर कराई जाएंगी।
-- सुरेश कुमार राय, बीडीओ, नेवादा
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नहर पार बसी आबादी का पंद्रह साल पुराना खड़ंजा उखड़ गया है। दलित बस्ती, राजू के घर से अमर के घर तक और प्राथमिक विद्यालय जाने वाला रास्ता भी जर्जर है। पाल बस्ती के रास्ते की मरम्मत भी वर्षों से नहीं हुई है। बरसात में इन रास्तों से गुजरना बहुत मुश्किल हो जाता है। गांव को कागजों पर खुले में शौच से मुक्त घोषित किया गया है।
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हालांकि, खन्ना, राकेश, विनोद, मैकू, प्रमोद, लवकुश, सोहन और मोहन जैसे कई पात्र परिवारों को अब तक शौचालय नहीं मिले हैं। इन परिवारों को शौच के लिए बाहर जाना पड़ता है।
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बुनियादी सुविधाओं का अभाव
दलित बस्ती में बिजली के खंभे भी नहीं हैं। इस वजह से करीब बीस घरों के लोग बांस-बल्ली के सहारे केबल बांधकर बिजली का इस्तेमाल कर रहे हैं। गांव में कई परिवारों को शौचालय नहीं मिले हैं, जबकि इसे खुले में शौच से मुक्त बताया गया है। सड़कें भी बदहाल हैं, जिससे आवागमन में परेशानी होती है। जलनिकासी और खराब हैंडपंप की समस्या भी बनी हुई है।
ग्रामीणों की बात
गांव में अब भी कई परिवार शौचालय लाभ योजना से वंचित हैं। पात्र होने के बाद भी उन्हें शौचालय नहीं मिला। गांव के कई रास्ते,हैंडपंप भी खराब हैं।
फोटो -सजनलाल
कई बार शौचालय के लिए ऑनलाइन आवेदन किया, प्रधान सचिव के यहां भी चक्कर लगाया,आज तक शौचालय नहीं मिला। घर की बहू बेटियां बाहर जाती हैं।
फोटो - रामभवन
15 साल पहले घर के सामने खड़ंजा बना था। अन्य रास्ते ऊंचाई पर बन गए, जिससे सामने बने खड़ंजे से बरसात का पानी नहीं निकल पाता। बस्ती भर जाता है।
फोटो - मान सिंह
गांव में जो भी समस्या है, उसे दूर कराया जाएगा। जो भी पात्र लाभार्थी मिलेंगे, उन्हें सरकारी योजनाओं का लाभ दिलवाया जायेगा। अन्य कमियां भी दूर कराई जाएंगी।

सजन लाल

सजन लाल

सजन लाल

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