फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Kaushambi News ›   Shortage of DAP hinders potato sowing... cooperative societies locked shut

Kaushambi News: आलू की बोआई में डीएपी की किल्लत बाधा... समितियों में लगा ताला

Sat, 17 Oct 2026 12:59 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कौशांबी
संवाद न्यूज एजेंसी, कौशांबी Updated Sat, 17 Oct 2026 12:59 AM IST
विज्ञापन
Shortage of DAP hinders potato sowing... cooperative societies locked shut
विनोद कुमार साहू
कौशाम्बी जिले में करीब 7500 हेक्टेयर में आलू की बोआई की तैयारी पूरी है, लेकिन सहकारी समितियों में डीएपी खाद की भारी किल्लत है। इस कमी के कारण किसानों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। कई समितियों पर ताले लटके हैं या डीएपी उपलब्ध नहीं है। इस वजह से किसानों को खाद के लिए भटकना पड़ रहा है। आलू के साथ गेहूं, सरसों और मटर की बोआई का समय होने से खेती पिछड़ने और उत्पादन प्रभावित होने की चिंता है।
विज्ञापन

पश्चिम शरीरा के पूरब शरीरा, कौशाम्बी ब्लॉक के जाठी, मकदुमपुर ढोकसहा और सिराथू ब्लॉक के शमशाबाद, जवईपडरी, शाखा, बम्हरौली, मानपुर गौरा सहित कई समितियों में डीएपी खाद नहीं है। बम्हरौली समिति के सचिव रामू द्विवेदी ने बताया कि करीब दस दिन पहले डीएपी उपलब्ध थी, अब केवल यूरिया बची है।
विज्ञापन

अजुहा समिति के सचिव हुकुम सिंह के अनुसार, सात अक्तूबर को मिली 500 बोरी डीएपी में से 489 बोरी वितरित हो चुकी हैं। अब केवल 11 बोरी कटी-फटी अवस्था में बची हैं। हालांकि, मंझनपुर, भरवारी, चरवा, चायल और महेवाघाट की कुछ समितियों पर खाद उपलब्ध है।
विज्ञापन
विज्ञापन

----

समितियों में डीएपी नहीं मिलने से आलू बोआई प्रभावित हो रही है। समय पर खाद नहीं मिली तो फसल के उत्पादन पर असर पड़ेगा । इसका किसानों को नुकसान उठाना पड़ेगा।
--- विनोद कुमार साहू, सैनी

दस दिन से डीएपी के लिए समितियों के चक्कर लगा रहे हैं। समय पर खाद, बीज और नहरों में पानी नहीं मिलने से खेती प्रभावित होती है। आर्थिक नुकसान की आशंका से किसान परेशान हैं।
-- संगम लाल, भानीपुर

आलू की खेती के लिए डीएपी की जरूरत है लेकिन समितियों में ताला लटक रहा है। ऐसे में बाजार से खाद खरीदकर बोआई करनी पड़ेगी जिससे खेती की लागत बढ़ेगी।
-- बुधराम यादव, किसान, बारा

गेहूं और लाही की फसल में खाद डालनी है, लेकिन समिति में डीएपी नहीं मिली। जो थी वह कटी-फटी बोरियों में थी, इसलिए डीएपी नहीं ली।अब दूसरी जगह तलाश करनी पड़ रही है।
-- मघदत्त द्विवेदी, जाठी
-----------

------------------------------

आलू बीज का लक्ष्य और वितरण
जिला उद्यान निरीक्षक प्रमोद सिंह ने बताया कि जिले में करीब 7500 हेक्टेयर में आलू की खेती होती है। विभाग की ओर से 376.200 क्विंटल आलू बीज आवंटित किया गया है। दो दिन में 20 किसानों ने 72 क्विंटल आलू की बुकिंग कराई है। बीज का वितरण ''प्रथम आवक, प्रथम पावक'' के आधार पर किया जाएगा। एक किसान को आनंद, बहार, ख्याति और मोहन किस्मों में से दो किस्मों का आलू लेना अनिवार्य है।
-------------------------
आलू की खेती की लागत और उत्पादन
कृषि वैज्ञानिक मनोज सिंह के अनुसार, एक एकड़ में आलू की बोआई के लिए आठ से दस क्विंटल बीज की जरूरत होती है। इसके साथ चार से छह टन सड़ी गोबर की खाद का उपयोग किया जा सकता है। 50-55 किलो डीएपी, 65-75 किलो यूरिया और 40-50 किलो पोटाश भी आवश्यक है। मिट्टी की जांच के आधार पर सल्फर और जिंक का प्रयोग करना चाहिए। बीज, खाद, खेत की तैयारी, सिंचाई, कीट-रोग प्रबंधन और खुदाई सहित प्रति एकड़ लागत करीब 41 हजार से 70 हजार रुपये आती है। उचित देखभाल से 80 से 120 क्विंटल तक उत्पादन मिल सकता है।

विनोद कुमार साहू

विनोद कुमार साहू

विनोद कुमार साहू

विनोद कुमार साहू

विनोद कुमार साहू

विनोद कुमार साहू

विनोद कुमार साहू

विनोद कुमार साहू

विनोद कुमार साहू

विनोद कुमार साहू

विनोद कुमार साहू

विनोद कुमार साहू

विनोद कुमार साहू

विनोद कुमार साहू

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed