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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Kaushambi News ›   Kendriya Vidyalaya stuck in files for 10 years, not expected to operate in this session also

Kaushambi News: 10 साल से फाइलों में अटका केंद्रीय विद्यालय, इस सत्र में भी संचालन की उम्मीद नहीं

Tue, 24 Mar 2026 12:13 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कौशांबी
संवाद न्यूज एजेंसी, कौशांबी Updated Tue, 24 Mar 2026 12:13 AM IST
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Kendriya Vidyalaya stuck in files for 10 years, not expected to operate in this session also
शोभा देवी, अ​भिभावक
केंद्रीय विद्यालय के संचालन का सपना इस सत्र में भी पूरा होने की उम्मीद नहीं है क्योंकि इसके लिए प्रस्तावित जमीन को अभी मंजूरी नहीं मिल सकी है। वहीं, विद्यालय बनने तक अस्थाई भवन में पठन-पाठन की योजना थी, लेकिन वहां भी अभी विद्यालय का संचालन नहीं हो सका है।
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जिले में केंद्रीय विद्यालय के संचालन की कवायद करीब 10 साल से चल रही है। विद्यालय निर्माण के लिए चायल, मंझनपुर व सिराथू तहसील क्षेत्र में दर्जनों स्थानों पर जमीन देखी गई। लेकिन, केंद्रीय विद्यालय समिति को जमीन पसंद नहीं आई। अब मंझनपुर के पाता में करीब साढ़े तीन एकड़ जमीन को देखकर उसका प्रस्ताव भेजा गया है। करीब एक साल पहले भेजी गई पत्रावली को अब तक मंजूरी नहीं मिली।
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हालांकि, उस दौरान आए अधिकारियों ने इस भूमि को कुछ हद तक बेहतर माना था। साथ ही इस बात का भी आश्वासन दिया था कि संभव हुआ तो जब तक स्कूल नहीं बनता अस्थाई भवन में विद्यालय संचालित होगा। इसके लिए राजकीय इंटर कॉलेज ओसा के भवन का प्रस्ताव तैयार कर भेजा गया था।
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करीब एक साल पहले भेजे गए प्रस्ताव पर जवाब नहीं आया तो जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय ने फरवरी माह में फिर से प्रस्ताव भेजा है। इसको लेकर अब तक केंद्रीय विद्यालय समिति की ओर से जवाब नहीं मिला है। ऐसे में इस सत्र भी स्कूल संचालन पर संशय है।
अस्थायी रूप से ओसा जीआईसी में कक्षाएं शुरू कराने के लिए प्रस्ताव भेजा गया है, पर अभी तक कोई जवाब नहीं आया है।-- राजेश कुमार सिंह, डीआईओएस
बच्चे बड़े हो रहे हैं। कई साल से विद्यालय के संचालन की उम्मीद के चलते बच्चों को घर और दूसरे विद्यालय में पढ़ा रहे थे। बच्चों को केंद्रीय विद्यालय में पढ़ाने का सपना है। अब लगता है इसके लिए प्रयागराज में जाकर रहना पड़ेगा। - स्वस्तिका शुक्ला, अभिभावक

केंद्रीय विद्यालय का संचालन होने लगता तो बच्चों के लिए तो बेहतर होता। इस पर राजनेताओं व अधिकारियों को ध्यान देना होगा। जिससे यहां बेहतर स्कूल मिल सके। मजबूरी में बच्चों को परिवार से दूर प्रयागराज जाना पड़ता है। - शोभा देवी, अभिभावक

शोभा देवी, अभिभावक

शोभा देवी, अभिभावक

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