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मौसम का उतार-चढ़ाव बना रहा बीमार
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 28 Mar 2016 11:44 PM IST
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जिला अस्पताल में खांसी, बुखार और सांस के रोगियों की भीड़
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मौसम का उतार-चढ़ाव से भरा मिजाज सेहत के लिए खतरनाक बन गया है। सुबह-शाम की ठंडक और दिन में तेज धूप लोगों को बीमार बना रही है। जरा सी अनदेखी पर लोग सर्दी-जुकाम, बुखार से पीड़ित होने लगे हैं। सोमवार को जिला अस्पताल की ओपीडी में मौसमी बीमारियों से जकड़े लोगों की भीड़ रही। अस्पताल में दोपहर 2 बजे तक 1066 मरीज इलाज को आ चुके थे। इनमें लगभग 700 सर्दी, जुकाम, बुखार और सांस की बीमारियों से पीड़ित थे। डॉक्टरों का कहना है कि मौसम बीमारी वाला है। थोड़ी सी चूक किसी को भी अस्पताल पहुंचा सकती है।
कौशाम्बी में 15 दिन के भीतर दो बार बूंदाबांदी हो चुकी है। रविवार को भी दिनभर आसमान में बादल छाए रहे। बूंदाबांदी और बादलों के कारण सुबह-शाम मौसम में ठंडक बनी हुई है। वहीं दिन में आसमान से आग सरीखी धूप चटकने लगी है। इस चिलचिलाती धूप में दो मिनट भी खड़े होना मुश्किल है। इसके कारण दिन का तापमान अभी से 37 डिग्री सेल्सियस पहुंचने लगा है। जबकि रात में पारा 18 डिग्री सेल्सियस तक गिर जाता है। दिन-रात के तापमान में यह अंतर सेहत के लिए खतरनाक है। खान-पान में बरती गई जरा सी लापरवाही लोगों को बीमार बना रही है। लोग बुखार, सर्दी, जुकाम से जकड़ने लगे हैं। बुखार समेत अन्य मौसमी बीमारियों का यह कहर गांव-गांव दिखने लगा है। सोमवार को ही जिला अस्पताल की ओपीडी में करीब 1066 लोगों आए थे। इनमें मंझनपुर की आराधना (25), छोटकी (45) निवासी पश्चिमशरीरा, शिवा (18), बहोरीलाल (45) निवासी मलाका, जयराम (55) निवासी देवखरपुर, गीता देवी (48), सीता देवी (45), इन्द्राणी देवी (24) निवासी कसिया, शोभा देवी (35) निवासी जमलामऊ आदि करीब सात सौ लोग सर्दी-जुकाम, बुखार से जकड़े थे। जिला अस्पताल के फिजीशियन डॉ.अरविंद कनौजिया का कहना है कि मौसम में लगातार हो रहे उतार-चढ़ाव से लोग बीमारी की जद में आ रहे है। उन्होंने लोग से सुबह-शाम की ठंड से बचने, खुले आसमान के नीचे नहीं सोने, सोते समय मच्छरदानी का इस्तेमाल करने, कोल्डड्रिंक्स, फ्रिज अथवा बर्फ मिला पानी नहीं पीने, बासी भोजन से परहेज करने की सलाह दी है।
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कौशाम्बी में 15 दिन के भीतर दो बार बूंदाबांदी हो चुकी है। रविवार को भी दिनभर आसमान में बादल छाए रहे। बूंदाबांदी और बादलों के कारण सुबह-शाम मौसम में ठंडक बनी हुई है। वहीं दिन में आसमान से आग सरीखी धूप चटकने लगी है। इस चिलचिलाती धूप में दो मिनट भी खड़े होना मुश्किल है। इसके कारण दिन का तापमान अभी से 37 डिग्री सेल्सियस पहुंचने लगा है। जबकि रात में पारा 18 डिग्री सेल्सियस तक गिर जाता है। दिन-रात के तापमान में यह अंतर सेहत के लिए खतरनाक है। खान-पान में बरती गई जरा सी लापरवाही लोगों को बीमार बना रही है। लोग बुखार, सर्दी, जुकाम से जकड़ने लगे हैं। बुखार समेत अन्य मौसमी बीमारियों का यह कहर गांव-गांव दिखने लगा है। सोमवार को ही जिला अस्पताल की ओपीडी में करीब 1066 लोगों आए थे। इनमें मंझनपुर की आराधना (25), छोटकी (45) निवासी पश्चिमशरीरा, शिवा (18), बहोरीलाल (45) निवासी मलाका, जयराम (55) निवासी देवखरपुर, गीता देवी (48), सीता देवी (45), इन्द्राणी देवी (24) निवासी कसिया, शोभा देवी (35) निवासी जमलामऊ आदि करीब सात सौ लोग सर्दी-जुकाम, बुखार से जकड़े थे। जिला अस्पताल के फिजीशियन डॉ.अरविंद कनौजिया का कहना है कि मौसम में लगातार हो रहे उतार-चढ़ाव से लोग बीमारी की जद में आ रहे है। उन्होंने लोग से सुबह-शाम की ठंड से बचने, खुले आसमान के नीचे नहीं सोने, सोते समय मच्छरदानी का इस्तेमाल करने, कोल्डड्रिंक्स, फ्रिज अथवा बर्फ मिला पानी नहीं पीने, बासी भोजन से परहेज करने की सलाह दी है।
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