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एक रुपये का पर्चा, पर दवाओं का लंबा खर्चा

Mon, 06 Jan 2020 12:54 AM IST
Allahabad Bureau इलाहाबाद ब्यूरो
Updated Mon, 06 Jan 2020 12:54 AM IST
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Form of one rupee, but long expenditure of medicines
Form of one rupee, but long expenditure of medicines - फोटो : KAUSHAMBI
एक रुपये का पर्चा, पर दवाओं का लंबा खर्चा
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अस्पताल के चिकित्सक लिख रहे बाजार की दवाएं
मरीजों को नहीं मिल रहा मुफ्त स्वास्थ्य सुविधा का लाभ
संवाद न्यूज एजेंसी
मंझनपुर। एक रुपये के पर्चे पर मुफ्त इलाज के दावे की कौशाम्बी में हवा निकल चुकी है। आरोप है कि जिला अस्पताल के चिकित्सक कमीशन के चक्कर में बाजार की दवाएं लिखते हैं। इससे गरीब मरीज यहां मुफ्त इलाज के लिए दूर-दराज से पहुंचता तो जरूर है, लेकिन लौटता खुद को ठगा हुआ महसूस करके।
प्रदेश सरकार का दावा है कि सभी को मुफ्त इलाज की सुविधा उपलब्ध कराई जाए। जिला संयुक्त अस्पताल में एक रुपये के पर्चे पर दवा और जांच मुफ्त होने का दावा किया गया है। जबकि मरीजों को बाजार की दवाएं लिखी जा रही है। जेनरिक दवाओं को लिखकर चिकित्सक अस्पताल के बाहर संचालित होने वाले मेडिकल स्टोरों से मोटा मुनाफा कमा रहे हैं। मरीज यहां चिकित्सक पैरासीटामॉल, सिफ्लोक्सिन आदि दवाएं तो अस्पताल की लिखते हैं लेकिन अलग पर्चे पर बाजार की दवाएं लिखी जाती हैं। इसके पीछे कमीशन का खेल होने का आरोप लगाया जाता है।
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जन औषधि केंद्र की भी दवा नहीं लिख रहे
मंझनपुर। केंद्र सरकार ने जिले में सस्ती दवा उपलब्ध कराने के लिए जन औषधि केंद्र की स्थापना की है। इसका मकसद है कि जो दवाएं सरकारी अस्पताल में नहीं मिलती वह सस्ते दर में जन औषधि केंद्र में मरीजों को मिल जाएं। इसके बाद भी चिकित्सक ऐसी दवा लिखते हैं जो बाहर मेडिकल स्टोर में ही मिले। वहीं जिला अस्पताल के बाहर दर्जन भर मेडिकल स्टोर हैं। इसके बाद भी ज्यादातर चिकित्सक ऐसी दवा लिखते हैं जो चुनिंदा मेडिकल स्टोर में ही मिले।
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अस्पताल के अंदर खड़ी रहती है निजी एंबुलेंस
मंझनपुर। जिला अस्पताल के अंदर निजी अस्पतालों की एंबुलेंस खड़ी रहती है। ये एंबुलेंस अस्पताल से रेफर होने वाले मरीजों को अपनी सेटिंग के अस्पताल में ले जाती है। इससे अस्पताल के चिकित्सकों को कमीशन मिलता है।
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थायरायड की मशीन खराब, मरीजों को हा रहा शोषण
मंझनपुर. जिला अस्पताल में इन दिनों थायराइड की मशीन खराब है। इसका फायदा चिकित्सक उठा रहे हैं। चिकित्सक ज्यादातर मरीजों को थायराइड़ की जांच लिख रहे हैं। मरीजों को यह जांच मजबूरी में निजी पौथोलॉजी में कराना पड़ रहा है।

इनका कहना है
अस्पताल में मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा उलब्ध कराने के लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं। चिकित्सकों से कहा गया है जो दवाएं स्टाक में नहीं है उसे जन औषधि केंद्र की लिखी जाए। चिकित्सक अगर बाहर की दवाएं लिखते तो हैं तो गलत है। मामले की जांच कराकर कार्रवाई की जाएगी।
डॉ. अरविंद कनौजिया, प्रभारी सीएमएस
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