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Kaushambi News: मां के चंद्रघंटा स्वरूप की श्रद्धालुओं ने की पूजा
Wed, 18 Oct 2023 12:52 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कौशांबी
संवाद न्यूज एजेंसी, कौशांबी
Updated Wed, 18 Oct 2023 12:52 AM IST
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मंझनपुर। शारदीय नवरात्र के तीसरे दिन मंगलवार को मां जगदंबे के चंद्रघंटा स्वरूप की उपासना की गई। मंदिरों, पंडालों में जगत जननी का दर्शन-पूजन कर श्रद्धालुओं ने आशीष लिया। इस दौरान मां के जयकारों और घंटा-घड़ियाल से मंदिर और पंडाल गूंजते रहे।
नवरात्र का तीसरा दिन मां चंद्रघंटा का माना जाता है। इसलिए मंगलवार को मंदिरों, पंडालों में मां की प्रतिमा को चंद्रघंटा के रूप में सजाया गया। मां के इसी स्वरूप की उपासना के लिए मंदिरों, पंडालों में भक्तों की भीड़ जुटी। मंझनपुर स्थित श्री दुर्गा मंदिर में भोर से ही श्रद्धालुओं की कतार लगी रही। यहां नगर समेत आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों से भक्त की अराधना करने पहुंचे।
पश्चिमशरीरा के झारखंडी माता की दरबार में कस्बा समेत आसपास के ग्रामीण माथा टेकने पहुंचे। संचवारा स्थित अलोपशंकरी और अंबारी गांव स्थित देवी में दर्शन-पूजन के लिए दिनभर तांता लगा रहा। इसी तरह चांदकन स्थित मां चंद्रिका मंदिर में श्रद्धालुओं देवी माता के दर्शन किए। देवी मंदिरों, पंडालों में शाम को महाआरती हुई।
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शीतलाधाम कड़ा में भी श्रद्धालुओं की भारी भीड़ जुटी। माता चंद्रघंटा को राक्षसों का वध करने वाला कहा जाता है। ऐसा माना जाता है कि मां अपने भक्तों के दुखों को दूर करने के लिए त्रिशूल, तलवार और गदा धारण किया है। भक्तों के लिए इनका स्वरुप सौम्य रहता है। मां चंद्रघंटा की पूजा से वैवाहिक समस्याएं, दांपत्य जीवन, शत्रुओं का नाश होता है। इनकी कृपा मात्र से मान-सम्मान, पद-प्रतिष्ठा में वृद्धि, मोक्ष आदि की प्राप्ति होती है। मां के इसी स्वरूप के दर्शन के लिए भक्तों को कई-कई घंटे तक लाइन में खड़े रहना पड़ा। संवाद
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नवरात्र का तीसरा दिन मां चंद्रघंटा का माना जाता है। इसलिए मंगलवार को मंदिरों, पंडालों में मां की प्रतिमा को चंद्रघंटा के रूप में सजाया गया। मां के इसी स्वरूप की उपासना के लिए मंदिरों, पंडालों में भक्तों की भीड़ जुटी। मंझनपुर स्थित श्री दुर्गा मंदिर में भोर से ही श्रद्धालुओं की कतार लगी रही। यहां नगर समेत आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों से भक्त की अराधना करने पहुंचे।
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पश्चिमशरीरा के झारखंडी माता की दरबार में कस्बा समेत आसपास के ग्रामीण माथा टेकने पहुंचे। संचवारा स्थित अलोपशंकरी और अंबारी गांव स्थित देवी में दर्शन-पूजन के लिए दिनभर तांता लगा रहा। इसी तरह चांदकन स्थित मां चंद्रिका मंदिर में श्रद्धालुओं देवी माता के दर्शन किए। देवी मंदिरों, पंडालों में शाम को महाआरती हुई।
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शीतलाधाम कड़ा में भी श्रद्धालुओं की भारी भीड़ जुटी। माता चंद्रघंटा को राक्षसों का वध करने वाला कहा जाता है। ऐसा माना जाता है कि मां अपने भक्तों के दुखों को दूर करने के लिए त्रिशूल, तलवार और गदा धारण किया है। भक्तों के लिए इनका स्वरुप सौम्य रहता है। मां चंद्रघंटा की पूजा से वैवाहिक समस्याएं, दांपत्य जीवन, शत्रुओं का नाश होता है। इनकी कृपा मात्र से मान-सम्मान, पद-प्रतिष्ठा में वृद्धि, मोक्ष आदि की प्राप्ति होती है। मां के इसी स्वरूप के दर्शन के लिए भक्तों को कई-कई घंटे तक लाइन में खड़े रहना पड़ा। संवाद