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ट्रेन हादसे के शिकार भाइयों के घरवालों को मिलेगा पट्टा

Wed, 12 Jun 2019 12:32 AM IST
shailendra Kumar अमर उजाला ब्यूरो, कौशाम्बी
अमर उजाला ब्यूरो, कौशाम्बी Published by: shailendra Kumar Updated Wed, 12 Jun 2019 12:32 AM IST
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who died in train accident] there family members will get the land
जुगराजपुर गांव में ट्रेन हादसे के शिकार परिवारों से बातचीत करते डीएम-एसपी - फोटो : kaushambi
इटावा के बरलई रेलवे स्टेशन के समीप टीटीई की लापरवाही से ट्रेन हादसे का शिकार चार भाइयों का शव गांव पहुंचते ही ग्रामीणों में चीत्कार मच गई। साथ ही अंतिम संस्कार में जिले के अफसरों के न आने पर उनका गुस्सा भड़क उठा। परिवार के कमाऊ पूतों की मौत होने से नाराज परिजन बिना अफसरों के आए शव का अंतिम संस्कार करने के लिए राजी नहीं थे। सूचना पर डीएम मनीष कुमार वर्मा और एसपी प्रदीप गुप्ता मौके पर पहुंचे। पीड़ितों के परिजनों को ग्राम समाज की खाली पड़ी जमीन पर पट्टा और किसान दुर्घटना बीमा का लाभ दिलाए जाने का आश्वासन दिया। इसके बाद शवों का अंतिम संस्कार हुआ।
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  कौशाम्बी कोतवाली के जुगराजपुर गांव निवासी अभिषेक उर्फ जीतू (20) पुत्र राजेंद्र कुमार, लालचंद्र (19) पुत्र जवाहर लाल, सुरेंद्र उर्फ गुरुमान (20) पुत्र भैयालाल और पिंटू (19) पुत्र छोटई एक ही परिवार के चचेरे भाई थे। इन लोगों के साथ सात अन्य लोग थे। सभी लोगों को कानपुर के गुजैनी निवासी यशवंत कमाने के लिए सूरत ले जा रहा था। सभी जनरल टिकट पर अवध एक्सप्रेस से जा रहे थे। इटावा के बलरई स्टेशन के समीप टीटीई ने टिकट चेक किया और जनरल टिकट होने पर उन्हें लूप लाइन में ही उतार दिया। इस दौरान राजधानी एक्सप्रेस के आने से सभी की मौत हो गई थी। मंगलवार की भोर पोस्टमार्टम के बाद शव गांव आए तो कोहराम मच गया।
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मृतक बेहद गरीब परिवार के थे और वे घर की आर्थिक स्थित को मजबूत करने के लिए सूरत जा रहे थे। ग्रामीणों ने परिवार की आर्थिक स्थित देख शवों का अंतिम संस्कार करने से मना कर दिया। उनका कहना था कि जब तक कोई अधिकारी पीड़ित परिवार को मुआवजे का एलान नहीं करेगा तब तक वह लोग शव का अंतिम संस्कार नहीं करेंगे। मामले की जानकारी पर सुबह 11.30 बजे जिलाधिकारी मनीष कुमार वर्मा और एसपी प्रदीप गुप्ता मौके पर पहुंचे।
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डीएम ने साथ रहे नायब तहसीलदार व ग्राम प्रधान प्रतिनिधि पप्पू शुक्ला को ग्राम सभा की खाली जमीन पर पीड़ित परिवारों के लिए पट्टे का प्रस्ताव बनाकर भेजने का निर्देश दिया। मुख्यमंत्री सहायता कोष और दुर्घटना बीमा का ऑन लाइन फार्म भरवाया जाए। अफसरों के आश्वासन पर ग्रामीण मान गए और शवों को लेकर अंतिम संस्कार के लिए चले गए।

 खुशहाल जिंदगी के लिए शुरू किए गए सफर में मौत का शिकार हुए चारों भाइयों ने अंतिम सफर भी एक साथ पूरा किया। गांव में एक ही चिता पर चारों के शवों को एक साथ मुखाग्नि दी गई। घटना को लेकर गांव के अलावा आसपास के ग्रामीण व रिश्तेदारों का शोक संतप्त परिवार को ढांढस बंधाने का दौर जारी रहा।

इटावा में राजधानी एक्सप्रेस की चपेट में आकर मौत का शिकार हुए चारों भाइयों की लाश मंगलवार की भोर गांव पहुंची तो सन्नाटे को चीरती हुई महिलाओं की चीखें निकलने लगीं। हादसे में किसी का बेटा तो किसी का भाई मौत का शिकार हुआ था। आंसुओं की धारा थमने का नाम नहीं ले रही थीं। सोमवार की सुबह ही चारों लोगों की मौत की खबर आ चुकी थी। इसे लेकर गांव के लोग रात भर जागकर शव आने का इंतजार कर रहे थे।


मंगलवार को जब शवों के अंतिम संस्कार की तैयारी की जाने लगी तो बड़े-बुजुर्गों ने फैसला लिया कि जब उन्होंने सफर साथ शुरू किया तो इस सफर में उन्हें अकेला कैसे भेजा जाए। इसे लेकर गांव में एक बड़ी चिता तैयार कराई गई। जिसमें सभी भाइयों को एक साथ अगल-बगल लिटाया गया। इसके बाद सभी को मुखाग्नि दी गई। इस दौरान सारा माहौल गमगीन रहा।
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