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भीखम और अनीता को छह साल बाद मिला लाडला
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भीखम और अनीता को छह साल बाद मिला लाडला
भागकर पहुंच गया था जम्मू-काश्मीर, ट्रक चालक ले आया था कौशाम्बी
बाल कल्याण समिति ने किया पुलिस के हवाले
फोटो नं-3,4
अमर उजाला ब्यूरो
मंझनपुर। बिहार के भीखम और अनीता की जिंदगी में मंगलवार की सुबह अपार खुशियां लेकर आई। छह साल पहले बिछड़ा आंखों का तारा इस सबेरे उन्हें मिल गया। जिगर के टुकड़े को देख दोनों का गला भर आया। जांच-पड़ताल के बाद बाल कल्याण समिति ने भीखम, अनीता के बच्चे को उनके हवाले कर दिया।
बिहार प्रांत के छपरा जिला स्थित मेड़ुआ गांव का भीखम प्रसाद पंजाब में मजदूरी करके परिवार का खर्च चलाता है। करीब छह साल पहले वह उस वक्त लगभग सात साल के रहे अपने बेटे पंकज को भी पंजाब ले गया था। भीखम की मानें तो एक रोज मामूली फटकार से नाराज होकर पंकज घर छोड़कर भाग गया। बाल कल्याण समिति के सदस्य मो. रेहान ने बताया कि इसके बाद पंकज भटकते हुए जम्मू-काश्मीर पहुंचा। वहां उसकी मुलाकात कौशाम्बी के टांडा निवासी ट्रक चालक रामलाल निर्मल से हुई। रामलाल पंकज को अपने साथ टांडा ले आया। तकरीबन चार वर्ष तक घर पर साथ रखकर उसको पढ़ाया भी। फिर किन्हीं कारणों से पंकज टांडा के ही सुखनिधान के यहां रहने लगा। ऐसे में रामलाल ने 31 मार्च 2018 को चाइल्ड लाइन को खबर कर दी। चाइल्ड लाइन प्रभारी ने बच्चे को अभिरक्षा में लेने के बाद अगले दिन बाल कल्याण समिति के सामने पेश किया। समिति सदस्यों ने लगभग चार घंटे तक चली पूछताछ के बाद पंकज का निवास स्थान पता किया। उसके परिजनों को खबर की गई तो वह मंगलवार सुबह भागे-भागे कौशाम्बी आ गए और पंकज को साथ लेकर चले गए। पंकज को देखकर उसके पिता भीखम और मां अनीता की आंखें भर आईं।
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निशांत को भी अपनों से मिलाया
मंझनपुर। झारखंड प्रांत के लोहरदगा जिला स्थित अमलातोली गांव का निशांत 18 मार्च 2019 को परिजनों की फटकार पर आहत होकर घर से भाग निकला। किसी ट्रेन पर सवार होकर वह सिराथू पहुंच गया। 31 मार्च को लाइल्ड लाइन प्रभारी ने उसे बाल कल्याण समिति के सामने पेश किया। समिति सदस्य मो. रेहान ने बताया कि निशांक के पिता दयानंद हैं। मंगलवार सुबह निशांत को भी परिजनों के हवाले कर दिया गया।
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भागकर पहुंच गया था जम्मू-काश्मीर, ट्रक चालक ले आया था कौशाम्बी
बाल कल्याण समिति ने किया पुलिस के हवाले
फोटो नं-3,4
अमर उजाला ब्यूरो
मंझनपुर। बिहार के भीखम और अनीता की जिंदगी में मंगलवार की सुबह अपार खुशियां लेकर आई। छह साल पहले बिछड़ा आंखों का तारा इस सबेरे उन्हें मिल गया। जिगर के टुकड़े को देख दोनों का गला भर आया। जांच-पड़ताल के बाद बाल कल्याण समिति ने भीखम, अनीता के बच्चे को उनके हवाले कर दिया।
बिहार प्रांत के छपरा जिला स्थित मेड़ुआ गांव का भीखम प्रसाद पंजाब में मजदूरी करके परिवार का खर्च चलाता है। करीब छह साल पहले वह उस वक्त लगभग सात साल के रहे अपने बेटे पंकज को भी पंजाब ले गया था। भीखम की मानें तो एक रोज मामूली फटकार से नाराज होकर पंकज घर छोड़कर भाग गया। बाल कल्याण समिति के सदस्य मो. रेहान ने बताया कि इसके बाद पंकज भटकते हुए जम्मू-काश्मीर पहुंचा। वहां उसकी मुलाकात कौशाम्बी के टांडा निवासी ट्रक चालक रामलाल निर्मल से हुई। रामलाल पंकज को अपने साथ टांडा ले आया। तकरीबन चार वर्ष तक घर पर साथ रखकर उसको पढ़ाया भी। फिर किन्हीं कारणों से पंकज टांडा के ही सुखनिधान के यहां रहने लगा। ऐसे में रामलाल ने 31 मार्च 2018 को चाइल्ड लाइन को खबर कर दी। चाइल्ड लाइन प्रभारी ने बच्चे को अभिरक्षा में लेने के बाद अगले दिन बाल कल्याण समिति के सामने पेश किया। समिति सदस्यों ने लगभग चार घंटे तक चली पूछताछ के बाद पंकज का निवास स्थान पता किया। उसके परिजनों को खबर की गई तो वह मंगलवार सुबह भागे-भागे कौशाम्बी आ गए और पंकज को साथ लेकर चले गए। पंकज को देखकर उसके पिता भीखम और मां अनीता की आंखें भर आईं।
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निशांत को भी अपनों से मिलाया
मंझनपुर। झारखंड प्रांत के लोहरदगा जिला स्थित अमलातोली गांव का निशांत 18 मार्च 2019 को परिजनों की फटकार पर आहत होकर घर से भाग निकला। किसी ट्रेन पर सवार होकर वह सिराथू पहुंच गया। 31 मार्च को लाइल्ड लाइन प्रभारी ने उसे बाल कल्याण समिति के सामने पेश किया। समिति सदस्य मो. रेहान ने बताया कि निशांक के पिता दयानंद हैं। मंगलवार सुबह निशांत को भी परिजनों के हवाले कर दिया गया।
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