{"_id":"6a0637d29e9de947650ede88","slug":"candidates-rights-cannot-be-taken-away-due-to-human-error-high-court-kaushambi-news-c-3-ald1034-885260-2026-05-15","type":"story","status":"publish","title_hn":"मानवीय भूल के कारण अभ्यर्थी का हक नहीं छीना जा सकता : हाईकोर्ट","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
मानवीय भूल के कारण अभ्यर्थी का हक नहीं छीना जा सकता : हाईकोर्ट
विज्ञापन
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने राजकीय स्कूलों में सहायक अध्यापक (एलटी ग्रेड) भर्ती परीक्षा के मामले में महत्वपूर्ण निर्णय सुनाया है। कोर्ट ने ऑनलाइन आवेदन में महिला के स्थान पर गलती से पुरुष जेंडर भरने वाली अभ्यर्थी शिवांगी उपाध्याय को 16 मई 2026 को होने वाली परीक्षा में बैठने की अनुमति दे दी है।
यह आदेश न्यायमूर्ति मंजू रानी चौहान की एकल पीठ ने प्रयागराज की शिवांगी उपाध्याय की याचिका पर दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जानबूझकर की गई झूठी घोषणा और अनजाने में हुई लिपिकीय त्रुटि के बीच बड़ा अंतर होता है। कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के वशिष्ठ नारायण कुमार बनाम बिहार राज्य मामले का हवाला दिया। कहा कि यदि अभ्यर्थी की मूल अर्हता पर कोई संदेह नहीं है तो छोटी गलतियों के आधार पर अभ्यर्थिता निरस्त करना अनुचित है।
मामले में याची ने सुधार के लिए आवेदन भी किया था, जिसे विभाग ने समय सीमा का तर्क देकर खारिज कर दिया था। हाईकोर्ट ने कहा कि चयन अधिकारियों को व्यावहारिक और न्यायिक दृष्टिकोण अपनाना चाहिए। कोर्ट ने माना कि यदि ऐसी मानवीय भूल, जिससे अभ्यर्थी को कोई अनुचित लाभ नहीं मिल रहा के कारण उसे परीक्षा से रोका गया तो यह उसकी अपूरणीय क्षति होगी।
विज्ञापन
विज्ञापन
यह आदेश न्यायमूर्ति मंजू रानी चौहान की एकल पीठ ने प्रयागराज की शिवांगी उपाध्याय की याचिका पर दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जानबूझकर की गई झूठी घोषणा और अनजाने में हुई लिपिकीय त्रुटि के बीच बड़ा अंतर होता है। कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के वशिष्ठ नारायण कुमार बनाम बिहार राज्य मामले का हवाला दिया। कहा कि यदि अभ्यर्थी की मूल अर्हता पर कोई संदेह नहीं है तो छोटी गलतियों के आधार पर अभ्यर्थिता निरस्त करना अनुचित है।
विज्ञापन
मामले में याची ने सुधार के लिए आवेदन भी किया था, जिसे विभाग ने समय सीमा का तर्क देकर खारिज कर दिया था। हाईकोर्ट ने कहा कि चयन अधिकारियों को व्यावहारिक और न्यायिक दृष्टिकोण अपनाना चाहिए। कोर्ट ने माना कि यदि ऐसी मानवीय भूल, जिससे अभ्यर्थी को कोई अनुचित लाभ नहीं मिल रहा के कारण उसे परीक्षा से रोका गया तो यह उसकी अपूरणीय क्षति होगी।
विज्ञापन