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Kaushambi News: इबादत के साथ सेहत व सजगता भी जरूरी
Fri, 20 Feb 2026 02:04 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कौशांबी
संवाद न्यूज एजेंसी, कौशांबी
Updated Fri, 20 Feb 2026 02:04 AM IST
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रहमतों व नेमतों का मुकदस महीना रमजान बृहस्पतिवार से शुरू हो गया। भोर में सहरी करने के बाद रोजेदारों ने पहला रोजा रखकर इबादत शुरू की। बुधवार की शाम चांद दिखने पर तमाम अकीदतमंदों ने रात में मस्जिद जाकर तरावीह पढ़ी।
रमजान को इस्लाम में रहमत, बरकत और इबादत का पवित्र महीना माना जाता है। इस पूरे महीने मुस्लिम समुदाय के लोग सूर्योदय से सूर्यास्त तक रोजा (उपवास) रखते हैं। कुरान की तिलावत करते हुए अल्लाह की विशेष इबादत करते हैं। माना जाता है कि इस महीने में रहमतें नाजिल होती हैं और दुआएं कबूल होती हैं।
शहर काजी मौलाना अहमद बताते हैं कि रोजा आत्मसंयम और इंसानियत का पैगाम देता है, इसलिए इफ्तार से पहले परिवार, समाज और देश की भलाई की दुआ करना भी अहम माना गया है। इन दिनों में इबादत, संयम और नेक दुआओं का विशेष महत्व है।
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उन्होंने बताया कि कुरआन की दूसरी आयत सूरह अल बकरा में रोजे को फर्ज बताते हुए उसकी अहमियत बताई गई है। उन्होंने बताया कि यह सब्र और परहेजगारी का महीना है, जिसमें हर बुरे काम से दूर रहकर नेक काम जैसे सदका जकात (दान) करना होता है।
सेहत का रखें विशेष ख्याल
प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के डॉ. सुएब अंसारी का कहना है कि सेहत सुरक्षित रहेगी तभी इबादत का पूरा सबाब मिल सकेगा, इसलिए लापरवाही से बचना चाहिए। कहा कि सेहरी में पौष्टिक व हल्का भोजन लें, ज्यादा तला-भुना भोजन न करें। दिन भर पानी न पी पाने की स्थिति को देखते हुए इफ्तार और सेहरी के बीच पर्याप्त तरल पदार्थ लें। शुगर, बीपी या अन्य गंभीर रोग से पीड़ित लोग रोजा रखने से पहले डॉक्टर से परामर्श जरूर लें। सुबह-शाम की दवाओं का चार्ट सेहरी और इफ्तार के अनुसार तय कर लें। जिन मरीजों को डॉक्टर रोजा न रखने की सलाह दें, वे सेहत ठीक होने पर कजा रोजों का विकल्प अपना सकते हैं।
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रमजान को इस्लाम में रहमत, बरकत और इबादत का पवित्र महीना माना जाता है। इस पूरे महीने मुस्लिम समुदाय के लोग सूर्योदय से सूर्यास्त तक रोजा (उपवास) रखते हैं। कुरान की तिलावत करते हुए अल्लाह की विशेष इबादत करते हैं। माना जाता है कि इस महीने में रहमतें नाजिल होती हैं और दुआएं कबूल होती हैं।
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शहर काजी मौलाना अहमद बताते हैं कि रोजा आत्मसंयम और इंसानियत का पैगाम देता है, इसलिए इफ्तार से पहले परिवार, समाज और देश की भलाई की दुआ करना भी अहम माना गया है। इन दिनों में इबादत, संयम और नेक दुआओं का विशेष महत्व है।
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उन्होंने बताया कि कुरआन की दूसरी आयत सूरह अल बकरा में रोजे को फर्ज बताते हुए उसकी अहमियत बताई गई है। उन्होंने बताया कि यह सब्र और परहेजगारी का महीना है, जिसमें हर बुरे काम से दूर रहकर नेक काम जैसे सदका जकात (दान) करना होता है।
सेहत का रखें विशेष ख्याल
प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के डॉ. सुएब अंसारी का कहना है कि सेहत सुरक्षित रहेगी तभी इबादत का पूरा सबाब मिल सकेगा, इसलिए लापरवाही से बचना चाहिए। कहा कि सेहरी में पौष्टिक व हल्का भोजन लें, ज्यादा तला-भुना भोजन न करें। दिन भर पानी न पी पाने की स्थिति को देखते हुए इफ्तार और सेहरी के बीच पर्याप्त तरल पदार्थ लें। शुगर, बीपी या अन्य गंभीर रोग से पीड़ित लोग रोजा रखने से पहले डॉक्टर से परामर्श जरूर लें। सुबह-शाम की दवाओं का चार्ट सेहरी और इफ्तार के अनुसार तय कर लें। जिन मरीजों को डॉक्टर रोजा न रखने की सलाह दें, वे सेहत ठीक होने पर कजा रोजों का विकल्प अपना सकते हैं।