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Kaushambi News: परिवार के बच्चों के बीच पढ़ाई की प्रतिस्पर्धा में जिंदगी की जंग हार गया आदित्य
Sat, 02 Mar 2024 01:57 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कौशांबी
संवाद न्यूज एजेंसी, कौशांबी
Updated Sat, 02 Mar 2024 01:57 AM IST
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राजकीय आश्रम पद्धति विद्यालय बरैसा में हाईस्कूल के छात्र रहे आदित्य ने अपने चचेरे भाइयों के साथ पढ़ाई की प्रतिस्पर्धा में मौत को गले लगाने का खौफनाक कदम उठा लिया। हाईस्कूल में विज्ञान का पेपर खराब होने पर उसने इतना बड़ा फैसला ले लिया, जिससे स्कूल के कर्मचारी व सहपाठी भी हैरान हैं। घटना की जानकारी से पीड़ित परिवार का रो-रोकर हाल खराब है।
फतेहपुर जिले के धाता कोतवाली के बम्हरौली निवासी फूलचंद्र किसानी करते हैं। फूलचंद्र का बेटा आदित्य पढ़ाई में काफी तेज था। चार साल पहले उसका दाखिला कक्षा छह में राजकीय आश्रम पद्धति विद्यालय बरैसा में हुआ। आदित्य के साथ ही उसके चचेरे भाई अनिकेत व नीतेश का भी चयन हुआ।
कॉलेज के प्रधानाचार्य केशन सिंह ने बताया कि तीनों भाइयों के बीच आपस में ज्यादा अंक लाने की प्रतिस्पर्धा रहती थी। इसी वजह से सभी पढ़ने में बड़े होनहार थे। आदित्य व उसके भाई इस बार हाईस्कूल में थे। परीक्षा केंद्र कृषक इंटर कॉलेज हिनौता को बनाया गया था। बृहस्पतिवार को विज्ञान का पेपर था। उसके साथ कमरे में रहने वाले चचेरे भाई व अन्य सहपाठियोंं ने बताया कि आदित्य भोर करीब तीन बजे तक पढ़ाई करता रहा।
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परीक्षा देने के बाद वह कुछ उदास था। सहपाठियों के पूछने पर उसने बताया कि पेपर कुछ ठीक नहीं गया। शाम को कुछ बच्चे पढ़ने के लिए हाल तो कुछ परिसर में चले गए, लेकिन आदित्य कमरे से बाहर नहींं निकला। शंका होने पर उसके चचेरे भाई पढ़ने के लिए उसे बुलाने हॉस्टल गए तो उन्होंने फंदे से लटकता हुआ उसका शव देखा।
छात्र के घरवालों की तरफ से कोई तहरीर नहीं दी गई है। पोस्टमार्टम कराने के बाद शव अंतिम संस्कार के लिए परिजनों को दे दिया गया है।
धीरेंद्र सिंह, थानाध्यक्ष पश्चिमशरीरा
हॉस्टल के एक कमरे में रहते हैं 12 छात्र
प्रिंसिपल ने बताया कि उनके स्कूल में 490 सीटें हैं। अब तक यहां छह से हाईस्कूल तक की कक्षा संचालित थीं। इस बार 11 वीं में भी दाखिला लिया गया है। इससे कॉलेज में छात्र संख्या 403 हो गई है। हॉस्टल के एक कमरे में 12 बच्चों के रहने की व्यवस्था है। आदित्य जिस कमरे में रहता था, वहीं पर उसके साथ चचेरे भाई अनिकेत व नीतेश भी रहते थे।
कलह से बचकर शेयर करें बातें, तनाव होगा कम
मंझनपुर। मेडिकल कॉलेज में तैनात मनोरोग विशेषज्ञ डॉ. श्वेता वर्मा का कहना है कि तनाव समस्या का हल नहीं है। यह बीमारी का संकेत है। तनाव परीक्षा, घरेलू कलह व परिस्थितिजन्य या माहौल से हो सकता है। इसका इलाज है। रात को नींद न आना, अकेले में रहता, चिड़चिड़ापन होना, उदास रहना, किसी से बात नहीं करना, ये इसके लक्षण हैं। यदि किसी के साथ ऐसी समस्या है तो परिवार के लोग अनदेखी न करें। इलाज से यह सब ठीक हो जाता है।
परीक्षा में कम अंक आने से घबराने की जरूरत नहीं है। परिश्रम के जरिये कमजोरियों को दूर करने का समय आगे की पढ़ाई में लगातार मिलता है। मैं भी पढ़ाई में सामान्य था। हाईस्कूल में किसी तरह सेकंड डिवीजन आया, लेकिन आगे चलकर कामयाबी मिली।
अवधेश कुमार विश्वकर्मा-सीओ, सिराथू
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फतेहपुर जिले के धाता कोतवाली के बम्हरौली निवासी फूलचंद्र किसानी करते हैं। फूलचंद्र का बेटा आदित्य पढ़ाई में काफी तेज था। चार साल पहले उसका दाखिला कक्षा छह में राजकीय आश्रम पद्धति विद्यालय बरैसा में हुआ। आदित्य के साथ ही उसके चचेरे भाई अनिकेत व नीतेश का भी चयन हुआ।
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कॉलेज के प्रधानाचार्य केशन सिंह ने बताया कि तीनों भाइयों के बीच आपस में ज्यादा अंक लाने की प्रतिस्पर्धा रहती थी। इसी वजह से सभी पढ़ने में बड़े होनहार थे। आदित्य व उसके भाई इस बार हाईस्कूल में थे। परीक्षा केंद्र कृषक इंटर कॉलेज हिनौता को बनाया गया था। बृहस्पतिवार को विज्ञान का पेपर था। उसके साथ कमरे में रहने वाले चचेरे भाई व अन्य सहपाठियोंं ने बताया कि आदित्य भोर करीब तीन बजे तक पढ़ाई करता रहा।
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परीक्षा देने के बाद वह कुछ उदास था। सहपाठियों के पूछने पर उसने बताया कि पेपर कुछ ठीक नहीं गया। शाम को कुछ बच्चे पढ़ने के लिए हाल तो कुछ परिसर में चले गए, लेकिन आदित्य कमरे से बाहर नहींं निकला। शंका होने पर उसके चचेरे भाई पढ़ने के लिए उसे बुलाने हॉस्टल गए तो उन्होंने फंदे से लटकता हुआ उसका शव देखा।
छात्र के घरवालों की तरफ से कोई तहरीर नहीं दी गई है। पोस्टमार्टम कराने के बाद शव अंतिम संस्कार के लिए परिजनों को दे दिया गया है।
धीरेंद्र सिंह, थानाध्यक्ष पश्चिमशरीरा
हॉस्टल के एक कमरे में रहते हैं 12 छात्र
प्रिंसिपल ने बताया कि उनके स्कूल में 490 सीटें हैं। अब तक यहां छह से हाईस्कूल तक की कक्षा संचालित थीं। इस बार 11 वीं में भी दाखिला लिया गया है। इससे कॉलेज में छात्र संख्या 403 हो गई है। हॉस्टल के एक कमरे में 12 बच्चों के रहने की व्यवस्था है। आदित्य जिस कमरे में रहता था, वहीं पर उसके साथ चचेरे भाई अनिकेत व नीतेश भी रहते थे।
कलह से बचकर शेयर करें बातें, तनाव होगा कम
मंझनपुर। मेडिकल कॉलेज में तैनात मनोरोग विशेषज्ञ डॉ. श्वेता वर्मा का कहना है कि तनाव समस्या का हल नहीं है। यह बीमारी का संकेत है। तनाव परीक्षा, घरेलू कलह व परिस्थितिजन्य या माहौल से हो सकता है। इसका इलाज है। रात को नींद न आना, अकेले में रहता, चिड़चिड़ापन होना, उदास रहना, किसी से बात नहीं करना, ये इसके लक्षण हैं। यदि किसी के साथ ऐसी समस्या है तो परिवार के लोग अनदेखी न करें। इलाज से यह सब ठीक हो जाता है।
परीक्षा में कम अंक आने से घबराने की जरूरत नहीं है। परिश्रम के जरिये कमजोरियों को दूर करने का समय आगे की पढ़ाई में लगातार मिलता है। मैं भी पढ़ाई में सामान्य था। हाईस्कूल में किसी तरह सेकंड डिवीजन आया, लेकिन आगे चलकर कामयाबी मिली।
अवधेश कुमार विश्वकर्मा-सीओ, सिराथू