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Kaushambi : फोरलेन सड़क मुआवजे में करोड़ों के घोटाले में आरोपी लेखपाल कमलेश कुमार निलंबित

Sat, 06 Sep 2025 05:52 PM IST
विनोद सिंह संवाद न्यूज एजेंसी, कौशांंबी
संवाद न्यूज एजेंसी, कौशांंबी Published by: विनोद सिंह Updated Sat, 06 Sep 2025 05:52 PM IST
सार

प्रयागराज से पर्यटन स्थल कौशाम्बी को जाने वाली फोरलेन सड़क के मुआवजे में करोड़ों रुपए के घोटाला मामले में शनिवार को डीएम मधुसूदन हुल्गी ने कोसम इनाम के तत्कालीन आरोपी लेखपाल कमलेश कुमार को निलंबित कर विभाग जांच शुरू कर दी है।

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Accountant Kamlesh Kumar, accused in the scam of crores of rupees in four-lane road compensation, suspended
निलंबित। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

प्रयागराज से पर्यटन स्थल कौशाम्बी को जाने वाली फोरलेन सड़क के मुआवजे में करोड़ों रुपए के घोटाला मामले में शनिवार को डीएम मधुसूदन हुल्गी ने कोसम इनाम के तत्कालीन आरोपी लेखपाल कमलेश कुमार को निलंबित कर विभाग जांच शुरू कर दी है।कोसम इनाम के तत्कालीन लेखपाल कमलेश कुमार पर आरोप है कि राजस्व व लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों व कर्मचारियों की मिली भगत से किसानों से सांठ गांठ कर जमीन को धारा 80(आकृर्षित) कराकर करोड़ों रुपए का घोटाला कर धन का बंदरबांट किया गया है।

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इसकी शिकायत अधिवक्ता इंद्रेश कुमार, अयोध्या प्रसाद तिवारी किसान जयसिंह,पितम्बर, अमृतलाल आदि ने 3 मई को उच्च अधिकारियों से की थी। जिसमें डीएम ने टीम गठित कर जांच के आदेश दिए थे। जांच टीम ने 22 मई को आरोपी लेखपाल को टीम में शामिल कर नाप-जोख किया था। लोगों के विरोध पर डीएम ने दोबारा जांच टीम गठित किया था।
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टीम में शामिल तहसीलदार मंझनपुर सिद्धांत कुमार, नायब तहसीलदार ओम प्रकाश सिंह, राजस्व निरीक्षक बसंत लाल गुप्ता,अंसार अहमद क्षेत्रीय लेखपाल कुलजीत सिंह लेखपाल सुल्तान अहमद आदि ने पुनः 10 जून को मौका मुआयना कर नाप-जोख कर शिकायतकर्ता के बयान भी दर्ज किए गए थे। जिसमें आरोप सही पाए जाने पर टीम ने अपनी जांच रिपोर्ट डीएम को नहीं सौंपी थी।
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 प्रार्थना पत्र में बताया कि कोसम इनाम में खसरा संख्या 1032 से क्रमशः 1037 व 387 समेत दो दर्जन से अधिक जमीनों को तत्कालीन लेखपाल कमलेश कुमार की सहायता से वर्ष 2022 में धारा 80 कराकर इन जमीनों को आकृषित के रूप में परिवर्तित कराकर फोरलेन सड़क में अधिग्रहण कराया है। जबकि फोरलेन की प्रशासकीय एवं वित्तीय स्वीकृति का आदेश अगस्त 2021 में ही जारी हो गया था। जिससे अधिग्रहण क्षेत्र में आने वाली जमीनों की साल 2022 में कराई गई धारा 80 अवैध है।

सड़क का शासनादेश जारी होने के बाद धारा 80 कराकर किसानों से मिली भगत कर अधिकारियों ने सरकार के करोड़ों रुपए की लूट की है। जबकि शासनादेश जारी होने के पहले की यथा स्थिति के अनुसार ही मुआवजा मिलना चाहिए। खसरा संख्या 1032 एवं 1033 में 8 बिस्सा जमीन अधिग्रहित हो जाने के बाद भी उतनी ही जमीन शेष बची है।


जिस भूमि से सड़क गुजरी ही नहीं उसका भी दिला दिया था मुआवजा 

प्रयागराज से पर्यटन स्थल कौशांबी के लिए जाने वाली सड़क में खासकर कोसम इनाम की भूमि के मुआवजे में बड़ा घोटाला किया गया है बताया जा रहा है कि जिस भूमि से रोड गुजरी ही नहीं उसे भी अकृर्षित कराकर  लाभ पहुंचाया गया है।जिन किसानों की जमीन वास्तव में गई है उन्हें मुआवजा से वंचित कर दिया गया है। लोगों का कहना है कि यह तो सिर्फ बानगी है। अगर सही ढंग से जांच हुई तो राजस्व विभाग व लोक निर्माण विभाग के कई बड़े कर्मचारी व अधिकारियों पर गाज गिर सकती है।

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