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ओडीएफ के चक्कर में मंद पड़ी विकास कार्यों की गति
Updated Fri, 04 Aug 2017 12:39 AM IST
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ओडीएफ के चक्कर में मंद पड़ी विकास कार्यों की गति
नाली, खड़ंजा, आवास निर्माण को भूल बैठे अफसर
खातों में डंप है राज्य और चौदहवें वित्त की धनराशि
अमर उजाला ब्यूरो
मंझनपुर। जिले गांवों को खुले में शौच से मुक्त कराने के लिए चलाए जा रहे अभियान ने अन्य विकास कार्यों की प्रगति को मंद कर दिया है। शासन के दबाव को देखते हुए अधिकारी दिनरात गांवों में शौचालय बनवाने और लोगों को खुले में शौच न जाने के लिए प्रेरित करने में जुट गए हैं। अफसरों का सिर्फ एक उद्देश्य हो जाने से नाली, खड़ंजा, सीसी सड़क व प्रधानमंत्री आवास चयन की प्रक्रिया ठंडे बस्त में नजर आने लगी है।
प्रदेश सरकार द्वारा 30 जिलों को 31 दिसंबर तक पूर्ण ओडीएफ करने के लिए चिह्नित किया है। इस सूची में कौशाम्बी को भी शामिल किया गया है। जिले को पूर्ण ओडीएफ बनाने के लिए शासन द्वारा रोज कुछ न कुछ निर्देश जारी किया जा रहा है। इसे देखते हुए अफसरों ने गांवों को ओडीएफ (खुले में शौच से मुक्त) बनाने के लिए पूरी ताकत झोंक रखी है। सुबह होते ही मुख्य विकास अधिकारी, डीपीआरओ सहित नामित नोडल सुबह-सुबह ही गांव पहुंचकर सिर्फ शौचालयों के निर्माण की प्रगति खंगालते हैं। इसके अलावा उनके द्वारा गांव के अन्य विकास कार्य की बाबत पूछताछ नहीं की जाती। यही कारण है कि गांवों के हैंडपंपों का रिबोर, नाली, खड़ंजा व प्रधानमंत्री आवास की प्रगति मंद पड़ती जा रही है। ऐसे में सवाल इस बात का है कि क्या सिर्फ शौचालय निर्माण कराकर विकास कार्यों की पूर्ति हो सकेगी? शासन की मंशा व अफसरों के प्रयास को लेकर अब गांव के लोग तरह-तरह के सवाल उठाने लगे हैं।
इस्टीमेट बनने के बाद भी नहीं हो पा रहा रीबोर
जिले की 498 ग्रामसभाओं में लगभग पांच हजार हैंडपंप ठप हैं। इन हैंडपंपों का रिबोर कराए जाने के लिए शासन ने राज्य व चौदहवें वित्त से धन खर्च करने की अनुमति दे रखी है। ग्राम प्रधानों द्वारा रीबोर कराने के लिए इस्टीमेट भी तैयार कर लिया गया है। शुरुआत में हैंडपंपों के रिबोर में तेजी आई। मौजूदा समय में ओडीएफ अभियान के तेज होने से रीबोर का काम ठप सा हो गया है।
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प्रधानमंत्री आवास चयन प्रकिया हुई शिथिल
प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ देने के लिए चालू वित्तीय वर्ष में 5744 का लक्ष्य भेजा गया है। इनके पात्रों का चयन तो पिछले दिनों किया जा चुका है पर पात्रता का सत्यापन अफसर नहीं कर पा रहे हैं। इसके चलते लाभार्थियों के खाते में योजना की रकम नहीं पहुंच पा रही है। अब तक लक्ष्य के सापेक्ष महज 971 लाभार्थियों के खाते में ही आवास की पहली किस्त भेजी गई है। वह भी बालू के अभाव में निर्माण कार्य अवरुद्ध है।
जिले को 31 दिसंबर तक ओडीएफ करना शासन की प्राथमिकता वाले कार्यक्रमों में से एक है। इस अभियान के आगे सारे विकास कार्य पीछे हैं। ग्राम पंचायतें शौचालय निर्माण प्राथमिकता पर कराएं, दूसरे विकास कार्य कराने पर कोई प्रतिबंध नहीं है।
कमल किशोर, डीपीआरओ
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नाली, खड़ंजा, आवास निर्माण को भूल बैठे अफसर
खातों में डंप है राज्य और चौदहवें वित्त की धनराशि
अमर उजाला ब्यूरो
मंझनपुर। जिले गांवों को खुले में शौच से मुक्त कराने के लिए चलाए जा रहे अभियान ने अन्य विकास कार्यों की प्रगति को मंद कर दिया है। शासन के दबाव को देखते हुए अधिकारी दिनरात गांवों में शौचालय बनवाने और लोगों को खुले में शौच न जाने के लिए प्रेरित करने में जुट गए हैं। अफसरों का सिर्फ एक उद्देश्य हो जाने से नाली, खड़ंजा, सीसी सड़क व प्रधानमंत्री आवास चयन की प्रक्रिया ठंडे बस्त में नजर आने लगी है।
प्रदेश सरकार द्वारा 30 जिलों को 31 दिसंबर तक पूर्ण ओडीएफ करने के लिए चिह्नित किया है। इस सूची में कौशाम्बी को भी शामिल किया गया है। जिले को पूर्ण ओडीएफ बनाने के लिए शासन द्वारा रोज कुछ न कुछ निर्देश जारी किया जा रहा है। इसे देखते हुए अफसरों ने गांवों को ओडीएफ (खुले में शौच से मुक्त) बनाने के लिए पूरी ताकत झोंक रखी है। सुबह होते ही मुख्य विकास अधिकारी, डीपीआरओ सहित नामित नोडल सुबह-सुबह ही गांव पहुंचकर सिर्फ शौचालयों के निर्माण की प्रगति खंगालते हैं। इसके अलावा उनके द्वारा गांव के अन्य विकास कार्य की बाबत पूछताछ नहीं की जाती। यही कारण है कि गांवों के हैंडपंपों का रिबोर, नाली, खड़ंजा व प्रधानमंत्री आवास की प्रगति मंद पड़ती जा रही है। ऐसे में सवाल इस बात का है कि क्या सिर्फ शौचालय निर्माण कराकर विकास कार्यों की पूर्ति हो सकेगी? शासन की मंशा व अफसरों के प्रयास को लेकर अब गांव के लोग तरह-तरह के सवाल उठाने लगे हैं।
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इस्टीमेट बनने के बाद भी नहीं हो पा रहा रीबोर
जिले की 498 ग्रामसभाओं में लगभग पांच हजार हैंडपंप ठप हैं। इन हैंडपंपों का रिबोर कराए जाने के लिए शासन ने राज्य व चौदहवें वित्त से धन खर्च करने की अनुमति दे रखी है। ग्राम प्रधानों द्वारा रीबोर कराने के लिए इस्टीमेट भी तैयार कर लिया गया है। शुरुआत में हैंडपंपों के रिबोर में तेजी आई। मौजूदा समय में ओडीएफ अभियान के तेज होने से रीबोर का काम ठप सा हो गया है।
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प्रधानमंत्री आवास चयन प्रकिया हुई शिथिल
प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ देने के लिए चालू वित्तीय वर्ष में 5744 का लक्ष्य भेजा गया है। इनके पात्रों का चयन तो पिछले दिनों किया जा चुका है पर पात्रता का सत्यापन अफसर नहीं कर पा रहे हैं। इसके चलते लाभार्थियों के खाते में योजना की रकम नहीं पहुंच पा रही है। अब तक लक्ष्य के सापेक्ष महज 971 लाभार्थियों के खाते में ही आवास की पहली किस्त भेजी गई है। वह भी बालू के अभाव में निर्माण कार्य अवरुद्ध है।
जिले को 31 दिसंबर तक ओडीएफ करना शासन की प्राथमिकता वाले कार्यक्रमों में से एक है। इस अभियान के आगे सारे विकास कार्य पीछे हैं। ग्राम पंचायतें शौचालय निर्माण प्राथमिकता पर कराएं, दूसरे विकास कार्य कराने पर कोई प्रतिबंध नहीं है।
कमल किशोर, डीपीआरओ