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अब 48 घंटे में होगा एफआईआर का निस्तारण
Sat, 13 Apr 2019 12:46 AM IST
shailendra Kumar
अमर उजाला ब्यूरो, कौशाम्बी
अमर उजाला ब्यूरो, कौशाम्बी
Published by: shailendra Kumar
Updated Sat, 13 Apr 2019 12:46 AM IST
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- फोटो : amar ujala
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मंझनपुर। कोर्ट के निर्देश पर दर्ज होने वाले मामलों को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा है। अब डीजीपी ने ऐसे मामलों का निस्तारण 48 घंटे के भीतर करने का निर्देश दिया है। चेताया है कि मनमानी करने पर कार्रवाई की जाएगी।
पुलिस विभाग के आंकड़ों पर गौर करें तो कोतवालियों में अधिकतर गंभीर मामले कोर्ट के आदेश पर ही दर्ज होते हैं। अदालत का निर्देश मिलने के बाद पहले तो पुलिस कई हफ्ते तक प्राथमिकी दर्ज ही नहीं करती है। इसके बाद केस दर्ज किया गया तो उसकी विवेचना महीनों लंबित रहती है। अंत में ज्यादातर मामलों में फाइनल रिपोर्ट लगा दी जाती है। कुछ प्रकरणों में ही आरोप पत्र दाखिल किया जाता है। विवेचनाओं का समय पर निस्तारण नहीं होने को लेकर पुलिस महानिदेशक ओपी सिंह खफा हो गए हैं। उन्होंने दो दिन पहले सभी पुलिस अधीक्षकों को पत्र भेजा है। इसमें कोर्ट के निर्देश पर दर्ज होने वाले केस की विवेचना का निस्तारण 48 घंटे के भीतर कराने का निर्देश दिया है। इसके बाद पुलिस अधीक्षक प्रदीप गुप्ता ने सभी निरीक्षकों और उपनिरीक्षकों को जरूरी दिशा-निर्देश दिए हैं। चेताया है कि मनमानी करने पर कार्रवाई की जाएगी। एसपी ने बताया कि आरोप सही पाए गए तो आरोपी के खिलाफ कार्रवाई होगी। इल्जाम गलत मिला तो वादी को भी बख्शा नहीं जाएगा। वहीं दूसरी ओर चुनावी व्यस्तता के वक्त डीजीपी का इस तरह का आदेश आने से निरीक्षकों, उपनिरीक्षकों की परेशानी बढ़ गई है। उन्हें समझ नहीं आ रहा है कि वह चुनाव ड्यूटी करें या फिर पर्चा काटें।
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पुलिस विभाग के आंकड़ों पर गौर करें तो कोतवालियों में अधिकतर गंभीर मामले कोर्ट के आदेश पर ही दर्ज होते हैं। अदालत का निर्देश मिलने के बाद पहले तो पुलिस कई हफ्ते तक प्राथमिकी दर्ज ही नहीं करती है। इसके बाद केस दर्ज किया गया तो उसकी विवेचना महीनों लंबित रहती है। अंत में ज्यादातर मामलों में फाइनल रिपोर्ट लगा दी जाती है। कुछ प्रकरणों में ही आरोप पत्र दाखिल किया जाता है। विवेचनाओं का समय पर निस्तारण नहीं होने को लेकर पुलिस महानिदेशक ओपी सिंह खफा हो गए हैं। उन्होंने दो दिन पहले सभी पुलिस अधीक्षकों को पत्र भेजा है। इसमें कोर्ट के निर्देश पर दर्ज होने वाले केस की विवेचना का निस्तारण 48 घंटे के भीतर कराने का निर्देश दिया है। इसके बाद पुलिस अधीक्षक प्रदीप गुप्ता ने सभी निरीक्षकों और उपनिरीक्षकों को जरूरी दिशा-निर्देश दिए हैं। चेताया है कि मनमानी करने पर कार्रवाई की जाएगी। एसपी ने बताया कि आरोप सही पाए गए तो आरोपी के खिलाफ कार्रवाई होगी। इल्जाम गलत मिला तो वादी को भी बख्शा नहीं जाएगा। वहीं दूसरी ओर चुनावी व्यस्तता के वक्त डीजीपी का इस तरह का आदेश आने से निरीक्षकों, उपनिरीक्षकों की परेशानी बढ़ गई है। उन्हें समझ नहीं आ रहा है कि वह चुनाव ड्यूटी करें या फिर पर्चा काटें।
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