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Kaushambi News: 32 साल चला मुकदमा, दस दिन की सजा
Wed, 23 Aug 2023 01:04 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कौशांबी
संवाद न्यूज एजेंसी, कौशांबी
Updated Wed, 23 Aug 2023 01:04 AM IST
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32 साल चला मुकदमा, दस दिन की सजा
-- सीजेएम की अदालत ने सुनाया फैसला
संवाद न्यूज एजेंसी
मंझनपुर। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) ने मंगलवार को तीन दशक पुराने दो मामलों में फैसला सुनाया। अदालत में दोनों मामले के दोषियों को दस-दस दिन की सजा और एक-एक हजार रुपये का जुर्माना लगाया है।
छोटे-छोटे मामलों के वर्षों से लंबित मुकदमों के निस्तारण को लेकर अदालतें इन दिनों सक्रियता दिखा रही हैं। पुलिस की पैरवी सेल में इसमें अहम भूमिका अदा कर रहा है। मंगलवार को (सीजेएम) पूर्णिमा प्रांजल की अदालत ने ऐसे ही दो मामलों में फैसला सुनाया। पहला मामला सैनी कोतवाली के औरेनी गांव का है। 24 अगस्त 1991 को यहां के रहने वाले अवधेश को पुलिस ने अवैध तमंचे के साथ पकड़ा था। जबकि, दूसरा मामला कड़ा धाम कोतवाली के शीतला धाम का है। यहां की रहने वाली सरिता कुशवाहा पुत्री बांकेलाल के खिलाफ पुलिस ने 10 जुलाई 1995 को पर्वतीय क्षेत्रों में वृक्षों के संरक्षण अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज कर दिया था। सरिता पर नीम का हरा पेड़ काटने का आरोप लगा था। दोनों मामलों में क्रमश: 32 व 28 साल से तारीख दर तारीख लग रही थी। इधर बीच पुलिस की मॉनीटरिंग सेल ने पैरवी तेज कर अदालत में साक्ष्य प्रस्तुत किया। इस पर कोर्ट ने मंगलवार ने दोनों आरोपियों को दोषी करार देते हुए फैसला सुना दिया।
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संवाद न्यूज एजेंसी
मंझनपुर। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) ने मंगलवार को तीन दशक पुराने दो मामलों में फैसला सुनाया। अदालत में दोनों मामले के दोषियों को दस-दस दिन की सजा और एक-एक हजार रुपये का जुर्माना लगाया है।
छोटे-छोटे मामलों के वर्षों से लंबित मुकदमों के निस्तारण को लेकर अदालतें इन दिनों सक्रियता दिखा रही हैं। पुलिस की पैरवी सेल में इसमें अहम भूमिका अदा कर रहा है। मंगलवार को (सीजेएम) पूर्णिमा प्रांजल की अदालत ने ऐसे ही दो मामलों में फैसला सुनाया। पहला मामला सैनी कोतवाली के औरेनी गांव का है। 24 अगस्त 1991 को यहां के रहने वाले अवधेश को पुलिस ने अवैध तमंचे के साथ पकड़ा था। जबकि, दूसरा मामला कड़ा धाम कोतवाली के शीतला धाम का है। यहां की रहने वाली सरिता कुशवाहा पुत्री बांकेलाल के खिलाफ पुलिस ने 10 जुलाई 1995 को पर्वतीय क्षेत्रों में वृक्षों के संरक्षण अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज कर दिया था। सरिता पर नीम का हरा पेड़ काटने का आरोप लगा था। दोनों मामलों में क्रमश: 32 व 28 साल से तारीख दर तारीख लग रही थी। इधर बीच पुलिस की मॉनीटरिंग सेल ने पैरवी तेज कर अदालत में साक्ष्य प्रस्तुत किया। इस पर कोर्ट ने मंगलवार ने दोनों आरोपियों को दोषी करार देते हुए फैसला सुना दिया।
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