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डाक्टर बेलगाम, दिन भर पसरा रहा सन्नाटा 18-31-06
Updated Wed, 10 Jan 2018 06:49 PM IST
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डॉक्टर बेलगाम, दिन भर पसरा रहा सन्नाटा
लापरवाही का शिकार है कसेंदा न्यू पीएचसी
अमर उजाला ब्यूरो
मंझनपुर। चायल तहसील क्षेत्र के सरकारी अस्पतालों में तैनात डॉक्टर और कर्मचारी मरीजों की जिंदगी और व्यवस्था के प्रति बेपरवाह है। हालत यह है कि मरीज अस्पतालों में इलाज के लिए डॉक्टरों का इंतजार करते रहते हैं। ऐसा ही हाल इन दिनों कसेंदा गांव स्थित न्यू पीएचसी का है। जहां पर नियमित रूप से डाक्टरों के नहीं बैठने से मरीजों को सुविधाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है। दोआबा की 20 लाख आबादी को चिकित्सा सेवा मुहैया कराए जाने के लिए संचालित सीएचसी और पीएचसी का हाल इन दिनों बदतर है। चायल के कसेंदा स्थित न्यू प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र में मंगलवार और बुधवार को मरीज इलाज के लिए अस्पताल तो गए लेकिन डॉक्टर के मौजूद नहीं होने के कारण सभी निराश होकर वापस लौटना पड़ा। अस्पताल में मौजूद वार्ड ब्याय से पूछने पर कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिल सका है। मरीज और तीमारदारों का कहना है कि यह रोज का हाल है। डॉक्टर आए दिन अस्पताल से गायब रहते हैं। ऐसे में लोगों को उपचार के लिए निजी अस्पताल जाना पड़ता है। जिसे लेकर क्षेत्रीय लोगों ने अस्पताल की व्यवस्थाओं में सुधार लाने की मांग की है।
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लापरवाही का शिकार है कसेंदा न्यू पीएचसी
अमर उजाला ब्यूरो
मंझनपुर। चायल तहसील क्षेत्र के सरकारी अस्पतालों में तैनात डॉक्टर और कर्मचारी मरीजों की जिंदगी और व्यवस्था के प्रति बेपरवाह है। हालत यह है कि मरीज अस्पतालों में इलाज के लिए डॉक्टरों का इंतजार करते रहते हैं। ऐसा ही हाल इन दिनों कसेंदा गांव स्थित न्यू पीएचसी का है। जहां पर नियमित रूप से डाक्टरों के नहीं बैठने से मरीजों को सुविधाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है। दोआबा की 20 लाख आबादी को चिकित्सा सेवा मुहैया कराए जाने के लिए संचालित सीएचसी और पीएचसी का हाल इन दिनों बदतर है। चायल के कसेंदा स्थित न्यू प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र में मंगलवार और बुधवार को मरीज इलाज के लिए अस्पताल तो गए लेकिन डॉक्टर के मौजूद नहीं होने के कारण सभी निराश होकर वापस लौटना पड़ा। अस्पताल में मौजूद वार्ड ब्याय से पूछने पर कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिल सका है। मरीज और तीमारदारों का कहना है कि यह रोज का हाल है। डॉक्टर आए दिन अस्पताल से गायब रहते हैं। ऐसे में लोगों को उपचार के लिए निजी अस्पताल जाना पड़ता है। जिसे लेकर क्षेत्रीय लोगों ने अस्पताल की व्यवस्थाओं में सुधार लाने की मांग की है।