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उपभोक्ताओं को रुला रहा मोबाइल नेटवर्क
Updated Thu, 13 Dec 2018 08:59 PM IST
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उपभोक्ताओं को रुला रहा मोबाइल नेटवर्क
बीएसएनएल के साथ प्राइवेट मोबाइल कंपनियों का नेटवर्क भी रहता है धड़ाम
नेट फेल होने से प्रभावित हो रहा सरकारी व प्राइवेट काम
अमर उजाला ब्यूरो
मंझनपुर। बीएसएनएल के साथ अब प्राइवेट मोबाइल कंपनियों का नेटवर्क भी उपभोक्ताओं के लिए मुसीबत बन गया है। मोबाइल नेटवर्क के साथ नेट भी फेल रहता है। इसकी वजह से दिक्कत और ज्यादा बढ़ जाती है। सरकारी व प्राइवेट कंपनियों के काम प्रभावित होते हैं।
जिले में भारत संचार निगम की व्यवस्था कभी भी ठीक नहीं रही। बीएसएनएल का नेटवर्क आए दिन फेल रहता है। ब्रॉडबैंड कई-कई दिनों तक ठप रहता है। इससे ऊबकर तमाम उपभोक्ताओं ने विकल्प के तौर पर निजी मोबाइल कंपनियों का सहारा ले रखा है। इधर, करीब हफ्ते भर से देखा जा रहा है कि आए दिन निजी कंपनियों का नेटकर्व भी गायब हो जाता है। हैरानी की बात है कि अधिकतर प्राइवेट कंपनियों का नेटवर्क एक साथ गायब होता है। ऐसे में संचार सेवा पूरी तरह से ठप हो जाती है। बैंकों से लोगों को मायूस होकर लौटना पड़ता है तो दूसरे सरकारी और प्राइवेट कार्यालयों में भी कोई काम नहीं हो पाता। पूछने पर कंपनियों के अफसर जल्द व्यवस्था दुरुस्त होने का रटा-रटाया जवाब देते हैं। बतादें कि संचार सेवा बंद होने से प्रशासनिक अधिकारियों के साथ पुलिस अफसरों को भी दिक्कतों के दौर से गुजरना पड़ता है। पुलिस वालों की मुखबिरों से बात ही नहीं हो पाती। ऐसे में अपराधी किसी भी रोज किसी बड़ी वारदात को अंजाम दे सकते हैं।
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बीएसएनएल के साथ प्राइवेट मोबाइल कंपनियों का नेटवर्क भी रहता है धड़ाम
नेट फेल होने से प्रभावित हो रहा सरकारी व प्राइवेट काम
अमर उजाला ब्यूरो
मंझनपुर। बीएसएनएल के साथ अब प्राइवेट मोबाइल कंपनियों का नेटवर्क भी उपभोक्ताओं के लिए मुसीबत बन गया है। मोबाइल नेटवर्क के साथ नेट भी फेल रहता है। इसकी वजह से दिक्कत और ज्यादा बढ़ जाती है। सरकारी व प्राइवेट कंपनियों के काम प्रभावित होते हैं।
जिले में भारत संचार निगम की व्यवस्था कभी भी ठीक नहीं रही। बीएसएनएल का नेटवर्क आए दिन फेल रहता है। ब्रॉडबैंड कई-कई दिनों तक ठप रहता है। इससे ऊबकर तमाम उपभोक्ताओं ने विकल्प के तौर पर निजी मोबाइल कंपनियों का सहारा ले रखा है। इधर, करीब हफ्ते भर से देखा जा रहा है कि आए दिन निजी कंपनियों का नेटकर्व भी गायब हो जाता है। हैरानी की बात है कि अधिकतर प्राइवेट कंपनियों का नेटवर्क एक साथ गायब होता है। ऐसे में संचार सेवा पूरी तरह से ठप हो जाती है। बैंकों से लोगों को मायूस होकर लौटना पड़ता है तो दूसरे सरकारी और प्राइवेट कार्यालयों में भी कोई काम नहीं हो पाता। पूछने पर कंपनियों के अफसर जल्द व्यवस्था दुरुस्त होने का रटा-रटाया जवाब देते हैं। बतादें कि संचार सेवा बंद होने से प्रशासनिक अधिकारियों के साथ पुलिस अफसरों को भी दिक्कतों के दौर से गुजरना पड़ता है। पुलिस वालों की मुखबिरों से बात ही नहीं हो पाती। ऐसे में अपराधी किसी भी रोज किसी बड़ी वारदात को अंजाम दे सकते हैं।
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