फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Jalaun News ›   young man died in Jalaun, accused sent to jail

जालौन: आश्रम में शिष्य की हत्या का मामला, रात में बेहोश हुए बाबा, शाम को पहुंचे जेल

Sat, 28 Dec 2019 04:39 PM IST
शिखा पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जालौन
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जालौन Published by: शिखा पांडेय Updated Sat, 28 Dec 2019 04:39 PM IST
विज्ञापन
young man died in Jalaun, accused sent to jail
पुलिस गिरफ्त में विजय शंकर उर्फ मणींद्र महाराज - फोटो : अमर उजाला
जालौन जिले में रामपुरा के आश्रम में हुई शिष्य की हत्या के मामले में गिरफ्तार विजय शंकर उर्फ मणींद्र महाराज उर्फ निनावली सरकार को पुलिस ने गुरुवार की पूरी रात भीड़ से बचाने के लिए रामपुरा के बजाए पड़ोस के माधौगढ़ थाने में रखा।
विज्ञापन


जहां हवालात में देर रात बाबा अचानक बेहोश हो गया तो पुलिस के भी हाथ पांव फूल गए, आनन फानन में सीएचसी से डॉक्टर बुलाए गए और बाबा को जब होश में लाया गया तो बताने लगा कि उसे पैरालिसिस का अटैक पड़ा है और उसके शरीर के नीचे का हिस्सा काम नहीं कर रहा है, इस पर पुलिस ने उसकी शारीरिक जांच कराई तो उसमें सब कुछ ठीक निकला।
विज्ञापन


शुक्रवार की दोपहर को न सिर्फ बाबा को पुलिस जीप में अपराधी की तरह पीछे की सीट में बैठाकर रामपुरा थाने लाया गया, बल्कि सीज पिस्टल के साथ उसकी भी थाने में लिखा पढ़ी कर उसे कचहरी के लिए रवाना कर दिया गया। जहां से देर शाम बाबा को छोड़ने रामपुरा पुलिस जेल गेट तक गई। इस दौरान बाबा के चेहरे की हवाईयां उड़ी रहीं।
विज्ञापन
विज्ञापन

बता दें कि गुरुवार को बाबा पर आरोप लगा था कि उसने आश्रम में निनावली निवासी शिष्य रविशंकर की गोली मारकर हत्या कर दी है। वारदात में सुरक्षा में तैनात दरोगा की सर्विस रिवाल्वर का ही इस्तेमाल किया गया था। रवि के परिजनों की तहरीर पर पुलिस ने बाबा के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज कर उसकी गिरफ्तारी दिखाई थी।

शुक्रवार को भी बाबा ने पुलिस से राहत पाने का पूरा प्रयास किया पर अधिकारियों की सख्ती के आगे बाबा के सारे प्रयास धरे के धरे के रह गए और आखिर में उसे आश्रम की बजाए जेल गेट में घुसना ही पड़ गया। इधर घटना के बाद से ही बाबा का आश्रम खाली करा लिया गया था, जिस कारण वहां शुक्रवार को भी पूरे दिन सन्नाटा रहा। जबकि गुरुवार को आक्रोशित दिख रहे निनावली के ग्रामीण भी बाबा पर हुई कार्रवाई के बाद एकदम शांत रहे।

शुक्रवार सुबह ही पुलिस सुरक्षा के बीच मृतक रविशंकर का अंतिम संस्कार किया गया। पिता ब्रह्मप्रकाश का कहना है कि बस बाबा को न्यायालय से भी कड़ी सजा मिल जाए तो बेटे को इंसाफ मिल जाएगा। इंस्पेक्टर आरके सिंह ने बताया कि बाबा के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज किया गया है।
                            

पूर्व ऊर्जा मंत्री से मिली थी बाबा को ‘पावर’
ग्रामीणों का कहना है कि बाबा के भक्तों की भीड़ में कई बड़े-बड़े नेता व अधिकारियों के नाम शामिल हैं लेकिन बाबा को सबसे पहले और सबसे अधिक पावर देने वाले पूर्व की सरकार (2007-17) के एक ऊर्जा मंत्री थे, जिनके संपर्क में आने के बाद बाबा ने फिर कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा।

एक के बाद एक अधिकारी व नेता संपर्क में आते गए और साल 2014 आते आते बाबा की ऐसी ‘निनावली सरकार’ खड़ी हुई कि जब पूरे जिले में शासन से बिजली कटौती का आदेश होता था तो भी बाबा का आश्रम रोशनी से जगमगाता था। बाबा ने अपने आश्रम तक न सिर्फ बिजली के खंभे ही लगवा रखे थे बल्कि शासन के निर्देश पर आश्रम के लिए अलग से एक फीडर भी लगाया गया था। कहीं न कहीं यही रसूख आसपास के गांव में चिंगारी भी सुलगा रहा था जो कि गुरुवार को बाबा के खिलाफ ज्वालामुखी बनकर फूट पड़ा।

कभी चलता था स्कॉर्ट, अब बंधी हथकड़ी
पुलिस महकमे के पुराने लोगों का कहना है कि बाबा को पुलिस सुरक्षा का इतना शौक था कि लखनऊ से जिले के लिए चलते वक्त ही फोन कर स्कॉर्ट के निर्देश सीधे वह जिले के बड़े अधिकारियों को दिया करता था। इसके बाद रास्ते में पड़ने वाले कानपुर देहात, औरैया व जालौन पुलिस की एक एक जीप उसकी गाड़ी के आगे लगकर उसे आश्रम तक ले जाती थी। अपनी निजी सुरक्षा के लिए भी बाबा प्रभावशाली लोगों से फोन कराकर एक दरोगा और चार सिपाही हर वक्त लेकर चलता था। किसी को क्या बल्कि बाबा ने भी कभी नहीं सोचा होगा कि जिस ‘निनावली सरकार’ के आगे पुलिस भी कभी माथा टेकती थी, वहीं पुलिस एक दिन उसके हाथों में हथकड़ी भी पहना देगी। रामपुरा थाने में जब बाबा के हथकड़ी बंधे हाथों में सीज दरोगा की पिस्टल थमाई गई तो उसकी आंखों में निराशा के भाव साफ दिखाई दे रहे थे।

सरकारी गवाह बन दरोगा ने प्राण बचाए
पुलिस कप्तान ने भले ही ‘निनावली सरकार’ की सुरक्षा में लगे दरोगा राजेंद्र तिवारी को निलंबित करने का फैसला किया हो पर सूत्रों के मुताबिक दरोगा ने भी पुलिस के लिए पूरे मामले में सरकारी गवाह बनने का फैसला कर किसी तरह अपने प्राण भी बचा लिए है। शुरुआत में कुछ ग्रामीण दरोगा को भी मामले में नामजद कराना चाहते थे। अब बताया जा रहा है कि सुरक्षा के लिए लगे दरोगा की गवाही ही बाबा को सलाखों के पीछे लंबे समय तक रखने में मददगार साबित होगी।

बुरा वक्त आया तो रसूख भी काम न आया
कहते हैं कि जब वक्त खराब होता तो साया भी साथ छोड़ देता है। गुरुवार को घटना के बाद पुलिस सुबह ही बाबा को आश्रम से हटा ले गई थी। सूत्रों के अनुुसार इसके बाद से शाम चार बजे तक बाबा के हाथ में उसका मोबाइल फोन था। बाबा ने अपने मोबाइल से जिले के आलाधिकारियों से लेकर शासन में बैठे लोगों से मदद की गुहार की लेकिन किसी ने भी मामले की गंभीरता को देख मदद का हाथ आगे बढ़ाना ठीक नहीं समझा और मामले की लिखापढ़ी शुरू होते ही पुलिस ने मोबाइल फोन छीनकर बाबा को थाने की हवालात में पहुंचा दिया।

 शिविर हो या मौन यज्ञ, ग्रामीण नहीं जाते थे
 बाबा के आश्रम में कभी स्वास्थ्य शिविर का आयोजन हुआ करता था तो कभी मौन यज्ञ का, लेकिन गांव वाले बाबा से दूरी ही बनाए रखते थे। ग्रामीणों का कहना है कि बाबा अक्सर किसी न किसी गांव वाले को  पुलिस से पकड़वा देते थे तो कभी किसी का ट्रैक्टर थाने में खड़ा करा देते थे। बिजली, पानी या फिर सड़क की जो भी सुविधा बाबा अधिकारियों से लेता था वे सारी की सारी उनके आश्रम तक ही सीमित रहती थी। जिसने ग्रामीणों को बाबा से दूर कर रखा था।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed