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आंखों की रोशनी जाने के बाद भी नहीं टूटा हौसला, पीसीएस की परीक्षा उत्तीर्ण कर कानपुर का नाम किया रोशन
Fri, 11 Oct 2019 09:31 AM IST
प्रभापुंज मिश्रा
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: प्रभापुंज मिश्रा
Updated Fri, 11 Oct 2019 09:31 AM IST
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पीसीएस 2017 में चयनित अवधेश
- फोटो : अमर उजाला
मेरे जुनून का नतीजा जरूर निकेलगा, इसी स्याह समुंदर से नूर निकलेगा...। यह लाइन बर्रा आठ के रहने वाले अवधेश कुमार कौशल पर सटीक बैठती हैं। जिन्होंने अपनी आंखों की रोशनी जाने के बाद भी हार नहीं मानी और पीसीएस की परीक्षा उत्तीर्ण की। अवधेश का चयन जिला दिव्यांग कल्याण अधिकारी के पद पर हुआ है।
मूल रूप से फर्रुखाबाद के गुरसहायगंज निवासी अवधेश कुमार केंद्रीय अरमापुर नंबर दो में जूलॉजी के शिक्षक पद पर हैं। उनको 2016 में इनोवेशन को बढ़ावा देने पर राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी की ओर से सम्मानित भी किया जा चुका हैं।
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मूल रूप से फर्रुखाबाद के गुरसहायगंज निवासी अवधेश कुमार केंद्रीय अरमापुर नंबर दो में जूलॉजी के शिक्षक पद पर हैं। उनको 2016 में इनोवेशन को बढ़ावा देने पर राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी की ओर से सम्मानित भी किया जा चुका हैं।
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पत्नी नीरजा और तीन बेटियों के साथ हंसी खुशी जीवन यापन कर रहे अवधेश की खुशियों में 2015 से ग्रहण लगना शुरू हो गया, जब रेटिनाइटिस पिगमेंटोस बीमारी की वजह से उनकी आंखों की रोशनी लगभग चली गई। जीवन अंधकारमय हो गया।
अवधेश कहते हैं कि मेरा शुरू से सिविल सेवा में जाने का मन था। जब जीवन में अंधकार हुआ तो मेरी पत्नी नीरजा मेरी इस इच्छा को उजाले के रूप में लेकर आई और जीवन जीने का नया मकसद दिया। नेशनल एसोसिएशन फॉर द ब्लाइंड, दिल्ली में जाकर ट्रेनिंग ली और वापस आकर अपने सपने को पूरा करने में जुट गया।
एपेक्स एकेडमी में दाखिला लिया और परीक्षा दी। अवधेश कहते हैं कि मेरी सफलता में मेरी पत्नी नीरजा और कोचिंग के निदेशक देवी शंकर तिवारी का बड़ा योगदान रहा। कोचिंग में जो भी पढ़ाई होती मेरी पत्नी उसे लिखती और घर जाकर लैपटॉप की मदद से पढ़ता। आज जाकर मेरा सपना पूरा हो गया।
अवधेश कहते हैं कि मेरा शुरू से सिविल सेवा में जाने का मन था। जब जीवन में अंधकार हुआ तो मेरी पत्नी नीरजा मेरी इस इच्छा को उजाले के रूप में लेकर आई और जीवन जीने का नया मकसद दिया। नेशनल एसोसिएशन फॉर द ब्लाइंड, दिल्ली में जाकर ट्रेनिंग ली और वापस आकर अपने सपने को पूरा करने में जुट गया।
एपेक्स एकेडमी में दाखिला लिया और परीक्षा दी। अवधेश कहते हैं कि मेरी सफलता में मेरी पत्नी नीरजा और कोचिंग के निदेशक देवी शंकर तिवारी का बड़ा योगदान रहा। कोचिंग में जो भी पढ़ाई होती मेरी पत्नी उसे लिखती और घर जाकर लैपटॉप की मदद से पढ़ता। आज जाकर मेरा सपना पूरा हो गया।