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जिंदा है विकास दुबे!: अक्षरों के हेरफेर से दस्तावेज में अभी तक न मर सका दुर्दांत, 8 पुलिसकर्मियों को दी थी मौत
Mon, 20 Jul 2026 11:36 PM IST
Shikha Pandey
गौरव श्रीवास्तव, अमर उजाला, कानपुर
गौरव श्रीवास्तव, अमर उजाला, कानपुर
Published by: Shikha Pandey
Updated Mon, 20 Jul 2026 11:36 PM IST
सार
Kanpur News: 10 जुलाई 2020 को पुलिस एनकाउंटर में दुर्दांत विकास दुबे मारा गया था। पिता का नाम रामकुमार पर बॉडी डिस्पोजल स्लिप में राजकुमार लिखा है।
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बिकरू कांड का विकास दुबे (फाइल फोटो)
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
आतंक का पर्याय रहा बिकरू का विकास दुबे मौत के छह साल बाद भी कागजों में जिंदा है। प्रशासन आज तक उसका मृत्यु प्रमाण पत्र जारी नहीं कर पाया है। ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि पोस्टमार्टम हाउस से जारी उसकी बॉडी डिस्पोजल स्लिप में विकास के पिता का नाम गलत लिखा था। पिता का नाम रामकुमार दुबे है पर लिखा है राजकुमार दुबे। इस चक्कर में जिम्मेदारों ने वलदियत गलत लिखे होने का हवाला देकर मृत्यु प्रमाण पत्र बनाने से इन्कार कर दिया था।
हालांकि अब प्रमाण पत्र बनने की उम्मीद जागी है क्योंकि ऋचा ने हाईकोर्ट में प्रदेश सरकार के खिलाफ याचिका लगाई है। इसमें सुनवाई होने से पहले पोस्टमार्टम प्रभारी चिकित्साधिकारी ने शुक्रवार को सचेंडी थानेदार को पत्र लिखकर विकास से जुड़े मूल अभिलेख मांगे हैं। दो जुलाई 2020 की देर रात चौबेपुर थाना क्षेत्र के बिकरू गांव में दुर्दांत अपराधी विकास दुबे और उसके गुर्गों ने दबिश देने पहुंचे पुलिस कर्मियों पर ताबड़तोड़ फायरिंग कर दी थी।
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हालांकि अब प्रमाण पत्र बनने की उम्मीद जागी है क्योंकि ऋचा ने हाईकोर्ट में प्रदेश सरकार के खिलाफ याचिका लगाई है। इसमें सुनवाई होने से पहले पोस्टमार्टम प्रभारी चिकित्साधिकारी ने शुक्रवार को सचेंडी थानेदार को पत्र लिखकर विकास से जुड़े मूल अभिलेख मांगे हैं। दो जुलाई 2020 की देर रात चौबेपुर थाना क्षेत्र के बिकरू गांव में दुर्दांत अपराधी विकास दुबे और उसके गुर्गों ने दबिश देने पहुंचे पुलिस कर्मियों पर ताबड़तोड़ फायरिंग कर दी थी।
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बिल्हौर सीओ रहे देवेंद्र मिश्रा, शिवराजपुर थानाध्यक्ष महेश चंद यादव, मंधना चौकी इंचार्ज अनूप सिंह, सबइंस्पेक्टर नेबूलाल, सिपाही सुलतान, राहुल, बबलू, जितेंद्र की नृशंस हत्या कर दी थी। पुलिस लगातार उसकी तलाश कर रही थी। इस दौरान नौ जुलाई 2020 को उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर से गिरफ्तार कर लिया गया। 10 जुलाई को शहर लाते समय सचेंडी इलाके में कार पलटने के बाद भागने की कोशिश कर रहे विकास को एसटीएफ ने एनकाउंटर में ढेर कर दिया था।
बॉडी डिस्पोजल स्लिप में गलत लिखा पिता का नाम
पोस्टमार्टम के बाद परिजन को उसके शव के साथ जो बॉडी डिस्पोजल स्लिप दी गई थी। उसमें विकास के पिता का नाम रामकुमार दुबे की जगह राजकुमार दुबे लिखा था। ऐसे में पीड़ित परिवार ने जब उसका मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाना चाहा तो जिम्मेदारों ने वलदियत गलत लिखी होने के कारण टरका दिया।
पोस्टमार्टम के बाद परिजन को उसके शव के साथ जो बॉडी डिस्पोजल स्लिप दी गई थी। उसमें विकास के पिता का नाम रामकुमार दुबे की जगह राजकुमार दुबे लिखा था। ऐसे में पीड़ित परिवार ने जब उसका मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाना चाहा तो जिम्मेदारों ने वलदियत गलत लिखी होने के कारण टरका दिया।
पत्नी ऋचा दुबे ने डीएम की चौखट से लेकर कोर्ट तक में लगाई गुहार
परिवार छह साल तक प्रमाण पत्र के लिए चक्कर लगाता रहा। ऋचा दुबे ने डीएम की चौखट से लेकर कोर्ट तक में गुहार लगाई। इसके बावजूद प्रमाण पत्र नहीं बना। ऋचा ने सीएम से इच्छामृत्यु तक मांगी लेकिन सुनवाई न होने पर प्रदेश सरकार के खिलाफ कोर्ट में याचिका दायर की।
परिवार छह साल तक प्रमाण पत्र के लिए चक्कर लगाता रहा। ऋचा दुबे ने डीएम की चौखट से लेकर कोर्ट तक में गुहार लगाई। इसके बावजूद प्रमाण पत्र नहीं बना। ऋचा ने सीएम से इच्छामृत्यु तक मांगी लेकिन सुनवाई न होने पर प्रदेश सरकार के खिलाफ कोर्ट में याचिका दायर की।
इसके चलते अब पोस्टमार्टम प्रभारी डॉ. विपुल चतुर्वेदी ने 17 जुलाई को सचेंडी थानाध्यक्ष को पत्र लिखा है। इसमें सचेंडी पुलिस से मूल रिकॉर्ड का परीक्षण कर पंचायतनामा और पोस्टमार्टम रिपोर्ट संख्या 1847/2020 में विकास दुबे के पिता का नाम सही करने या प्रमाणित आख्या देेने के लिए कहा है। इस पत्र की प्रतिलिपि जिलाधिकारी और मुख्य चिकित्सा अधिकारी को भी भेजी गई है।