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बिकरू कांड: दीपक दुबे के शस्त्र लाइसेंस के दस्तावेज में हस्ताक्षर फर्जी, 82 वर्षीय सीओ ने बताई बड़ी बात

Tue, 23 Mar 2021 02:02 PM IST
शिखा पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: शिखा पांडेय Updated Tue, 23 Mar 2021 02:02 PM IST
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Vikas Dubey Case: Fake signature in Deepak Dubey arms license document
कानपुर एनकाउंटर - फोटो : अमर उजाला
बिकरू कांड की जांच में फंसे एक रिटायर्ड सीओ का दावा है कि दीपक दुबे के शस्त्र लाइसेंस की सत्यापन रिपोर्ट में उनके हस्ताक्षर फर्जी हैं। ये बात उन्होंने अपने लिखित बयानों में जांच अधिकारी को बताई है। बयानों की सत्यतता जांची जा रही है।
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एसआईटी ने बिल्हौर में तैनात रहे 11 सीओ को दोषी माना है जिनकी जांच एसपी पश्चिम डॉ. अनिल कुमार कर रहे हैं। इसमें से एक सीओ वर्तमान में आईपीएस हैं, इसलिए उनकी जांच डीआईजी कर रहे हैं। 1997 में तैनात रहे सीओ ब्रजन सिंह (अब रिटायर्ड) पर आरोप है कि एक सितंबर 1997 को दीपक दुबे का पहला शस्त्र लाइसेंस डबल बैरल बंदूक का बना था, जिसकी सत्यापन रिपोर्ट में उनके हस्ताक्षर हैं। जबकि तब दीपक पर सात आपराधिक मामले दर्ज हो चुके थे। 82 वर्ष के सीओ ने उम्र का हवाला देते हुए कहा है कि उनको बहुत कुछ याद नहीं है। पर, दस्तावेजों पर उनके हस्ताक्षर नहीं है।
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दहशतगर्दों के असलहों से की गई थी हर्ष फायरिंग
बिकरू कांड में एसटीएफ की जांच में पता चला है कि कांड के करीब पांच महीने के बाद दिसंबर 2020 को औरैया में एक शादी समारोह में विकास दुबे के असलहों से हर्ष फायरिंग हुई थी। मध्य प्रदेश में असलहों की खरीद फरोख्त कराने वाले संजय परिहार के फुफेरे भाई की शादी थी। औरैया पुलिस से एसटीएफ ने संपर्क किया है।
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रूरा के एक गांव का प्रधान भी रडार पर 
दहशतगर्दों को पनाह देने में कई और नाम सामने आ रहे हैं। इनमें रूरा के एक गांव का प्रधान भी है। एक अन्य भी है, जिसको पुलिस ने कांड के बाद पकड़ा था और एसओ विनय तिवारी ने उसको छुड़वा दिया था।


सीओ के नाम पर की थी उगाही
रिटायर्ड सीओ ब्रजन सिंह ने बयानों में बताया कि जब वो बिल्हौर में चार्ज पर थे तब विकास दुबे इलेक्ट्रॉनिक गैजेट और घड़ियों का कारोबार करता था। विकास ने तमाम लोगों से उनसे काम करवाने के नाम पर रकम ऐंठी थीं। उन्होंने सख्ती की तो विकास कानपुर देहात छोड़ चौबेपुर इलाके में धाक जमाने लगा।
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