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Vijay Diwas Special: कानपुर ने इकलौते कारगिल शहीद का नहीं रखा मान, अनजान है पहचान...कहीं भी जिक्र तक नहीं

Wed, 26 Jul 2023 11:44 AM IST
हिमांशु अवस्थी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: हिमांशु अवस्थी Updated Wed, 26 Jul 2023 11:44 AM IST
सार

Kanpur News: सतेंद्र 13 कुमायूं रेजीमेंट में तैनात थे। उनका पार्थिव शरीर परिजनों को नहीं मिल सका था, वर्दी से पहचान हुई थी। सरकार ने मरणोपरांत सतेंद्र के परिजनों को ऑपरेशन विजय का प्रशस्ति पत्र दिया था। अर्जुन ने बताया कि परिवार को अब तक वन रैंक वन पेंशन का लाभ नहीं मिला है।

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Vijay Diwas Special, The only Kargil martyr of Kanpur is not respected, identity is unknown
शहीद सतेंद्र कुमार - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

ऐतिहासिक कारगिल युद्ध में दुश्मनों से लड़ते-लड़ते कानपुर का एक वीर सपूत अपनी टुकड़ी के साथ बॉर्डर पार चला जाता है। गोलियों की बौछार के बीच वीरता और शौर्य का लोहा मनवाकर दुश्मन से मुकाबला करता है, तभी अचानक एक विस्फोट होता है, फिर भारत मां का यह वीर लाल धरती मां की गोद में हमेशा के लिए सो जाता है।

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यह शहादत है चकेरी के देहली सुजानपुर निवासी शहीद सतेंद्र यादव की। लेकिन शहर के इकलौते शहीद को आज तक उनकी शहादत की पहचान नहीं मिल सकी है। सतेंद्र क नाम पर आज तक न तो कोई चौराहा ही हुआ और न ही पार्क। घर की सड़क बनी तो उसमें भी विधायक और प्रतिनिधियों ने अपना नाम ही डलवाया।
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शहादत के दौरान तत्कालीन जिलाधिकारी ने सतेंद्र के नाम पर किसी चौराहे का नाम रखने की घोषणा भी की थी। फिर भी ऐसा न हुआ। सतेंद्र के भतीजे आयुष, अभिषेक और आर्यन आज भी अपने चाचा को याद कर रो पड़ते हैं। शहीद के बुजुर्ग पिता अयोध्या प्रसाद को इस कदर बेटे की याद सताती है, कि वह हर किसी को भूलते जा रहे हैं।

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परिजनों को नहीं मिल सका था पार्थिव शरीर
सतेंद्र के बड़े भाई अर्जुन ने बताया कि कि सतेंद्र को अक्षय कुमार की फिल्म सैनिक बहुत पसंद थी। उसी फिल्म को देखकर उन्होंने सैनिक बनने की ठानी थी। सतेंद्र 13 कुमायूं रेजीमेंट में तैनात थे। उनका पार्थिव शरीर परिजनों को नहीं मिल सका था। सरकार ने मरणोपरांत सतेंद्र के परिजनों को ऑपरेशन विजय का प्रशस्ति पत्र दिया था।

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