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स्वास्थ्य सेवाएं या मजाक: कोरोना की तीसरी लहर की तैयारियां और उर्सला अस्पताल में नहीं कोई रेडियोलॉजिस्ट

Tue, 08 Jun 2021 01:51 AM IST
प्रभापुंज मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: प्रभापुंज मिश्रा Updated Tue, 08 Jun 2021 01:51 AM IST
सार

 कोरोना की तीसरी लहर से जंग की तैयारियों के बीच उर्सला अस्पताल में एमआरआई और एक्सरे जांच की रिपोर्ट बनाने वाले स्थायी रेडियोलॉजिस्ट ही नहीं है।

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Ursala Hospital does not have any radiologist for making reports MRI and X-ray tests
उर्सला अस्पताल कानपुर - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

कानपुर में कोरोना की तीसरी लहर की तैयारियों के बीच मंडलीय अस्पताल उर्सला अधूरे संसाधनों से जूझ रहा है। हालात यह हैं कि यहां एमआरआई और एक्सरे जांच की रिपोर्ट बनाने वाले स्थायी रेडियोलॉजिस्ट ही नहीं है। एमआरआई जांच रिपोर्ट के लिए यह अस्पताल हैलट पर निर्भर है, जो पहले से ही अपने काम के बोझ से दबा हुआ है।
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इसी तरह कांशीराम अस्पताल से एक घंटे के लिए रेडियोलॉजिस्ट एक्सरे रिपोर्ट बनवाई जा रही है। इससे मरीजों के साथ मेडिको लीगल मामलों की रिपोर्ट देने में लेटलतीफी सामने आई है। दरअसल, यहां औरैया, कानपुर देहात और कन्नौज से भी मेडिको लीगल मामले जांच के लिए आते हैं। उर्सला में एमआरआई जांच रिपोर्ट बनाने के लिए पांच महीने से स्थायी रेडियोलॉजिस्ट नहीं है।
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इससे गंभीर रोगियों को सबसे अधिक दिक्कत हो रही है। यहां एमआरआई जांच तो टेक्नीशियन कर देता है, लेकिन उसकी रिपोर्ट नहीं बन पाती। रिपोर्ट बनवाने के लिए एमआरआई फिल्म हैलट भेजी जाती है। हैलट से रिपोर्ट आने में एक सप्ताह लग जाता है। ऐसे में रोगियों का इलाज प्रभावित होता है।
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बहुत से रोगियों के तीमारदार उर्सला में एमआरआई कराने के बाद निजी डॉक्टर को पैसे देकर रिपोर्ट बनवाते हैं। उनका कहना है कि एक सप्ताह में रोगी की तबीयत और बिगड़ सकती या उनकी जान भी जा सकती है। उधर, डॉक्टरों का कहना है कि पांच माह पहले निदेशक रहे डॉ. आरसी भट्ट रेडियोलॉजिस्ट थे। वही एमआरआई रिपोर्ट बना देते थे। उनके तबादले के बाद से यहां रिपोर्ट बनाने का काम बंद है।

डॉक्टर बीमार, सिर्फ बड़े मामलों की रिपोर्ट
उर्सला में दो अल्ट्रासाउंड मशीन लगी हैं और एक्सरे जांच भी होती है। ओपीडी पूरी क्षमता के साथ चलती है तो करीब डेढ़ हजार जांचें प्रतिदिन होती हैं। मेडिसिन वगैरह की ओपीडी बंद होेने से इसकी 40 फीसदी के आसपास ही जांचें हो रही हैं। सर्जिकल ओपीडी से लोग आ रहे हैं। यहां पर तैनात स्थायी रेडियोलॉजिस्ट को 15 दिन पहले हार्टअटैक पड़ा था। तबसे वह अवकाश पर हैं।

इसके बाद रिपोर्ट भी नहीं बन पा रही है। इससे इमरजेंसी में आने वाले चेस्ट के रोगियों और सर्जिकल रोगियों को दिक्कत हो रही है। संविदा पर तैनात डॉक्टर अल्ट्रासाउंड कर लेते हैं। लेकिन, मेडिको लीगल मामलों में उनकी रिपोर्ट मान्य नहीं होती। बड़े मसलों में किसी तरह काम चलाने के लिए कांशीराम अस्पताल से एक घंटे के लिए रेडियोलॉजिस्ट बुलाया जाता है। बाकी मामले पेंडिंग में पड़े रहते हैं। मंडल के दूसरे जिलों से आने वाले लोगों को बहुत दिक्कत होती है।

अस्पताल के एकमात्र स्थायी रेडियोलॉजिस्ट बीमार हो गए हैं। इससे मेडिको लीगल समेत अन्य रोगियों की जांच में भी दिक्कत हो रही है। एमआरआई जांच की रिपोर्ट को लेकर भी यही परेशानी है। शासन से एक स्थायी रेडियोलॉजिस्ट की तैनाती की मांग की गई है।
डॉ. अनिल निगम, सीएमएस, उर्सला अस्पताल

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