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UP: झुककर मोबाइल देखने से निकल रहा कूबड़, घंटों झुके रहने से रीढ़ पर आता असर; अध्ययन में बड़ा खुलासा

Thu, 16 Oct 2025 03:16 PM IST
शाहरुख खान अमर उजाला नेटवर्क, कानपुर
अमर उजाला नेटवर्क, कानपुर Published by: शाहरुख खान Updated Thu, 16 Oct 2025 03:16 PM IST
सार

झुककर मोबाइल देखने से कूबड़ निकल आ रहा है। न्यूरो साइंसेस विभाग में रोगी आ रहे हैं। घंटों झुके रहने से रीढ़ पर असर आता है। फिजियोलॉजिकल कैफोसिस डिफॉर्मिटी के 100 रोगियों के ब्योरे का अध्ययन किया गया है।

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UP News Hunching over while watching mobile phone is causing hump, slouching for hours affects spine
झुककर मोबाइल देखने से निकल रहा कूबड़ - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

गर्दन झुकाकर घंटों मोबाइल की स्क्रीन देखने वालों के कूबड़ निकल आ रहा है। बूढ़ों की तरह उनकी गर्दन झुक जा रही है। फिर तन के चलने में दर्द होने लगता है। गर्दन झुकने और कूबड़ निकलने की समस्या मोबाइल देखने वालों में अधिक है। 
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जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के न्यूरो साइंसेस विभाग में इस समस्या के साथ लोग आ रहे हैं। विशेषज्ञों ने इसे फिजियोलॉजिकल कैफोसिस डिफॉर्मिटी नाम दिया है। विभाग ने तीन वर्षों में ऐसे 100 रोगियों के ब्योरे का अध्ययन किया है। 
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झुककर स्क्रीन देखने की आदत न छोड़ने पर समस्या बढ़ती जाती है। विशेषज्ञों का कहना है कि लैपटॉप या कंप्यूटर पर काम करने से यह दिक्कत नहीं होती। मोबाइल की स्क्रीन गर्दन झुकाकर बहुत देर तक देखने वालों को ही कूबड़ निकलने की समस्या हो रही है। 
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एक-डेढ़ साल तक आदत रहने पर कूबड़ वाली स्थिति उभर आती है और कंधे झुकने लगते हैं और रीढ़ टेढ़ी हो जाती है। न्यूरो साइंसेस विभागाध्यक्ष एवं प्रोफेसर डॉ. मनीष सिंह ने बताया कि मोबाइल की स्क्रीन देखने की लत से यह दिक्कत बढ़ी है। 

जिन 100 रोगियों का ब्योरा इकट्ठा किया गया है, उनका आयु वर्ग 18 से 45 साल के बीच का है। मोबाइल की लत से वे फिजियोलॉजिकल कैफोसिस डिफॉर्मिटी की चपेट में आ गए।

 

डॉ. सिंह ने बताया कि उनके कूबड़ उभर आया है। उन्होंने बताया कि कूबड़ के रोगी पहले भी आते थे लेकिन उनके रोग का कारण पैथोलॉजिकल होता रहा है। ज्यादातर का रोग पैदाइशी होता रहा है। उनकी रीढ़ की हड्डी में कमी या कोई गड़बड़ी होती थी जिससे कूबड़ उभरता रहा। 
 

ऐसे रोगियों की सर्जरी की जाती है। मोबाइल की स्क्रीन झुककर देखने से रीढ़ की हड्डी झुक जाती है। यह दिक्कत पोस्चर गड़बड़ होने की वजह से है। पोस्चर ठीक रखने पर रोगी की स्थिति सुधरने लगती है।
 

इन बातों का रखें ध्यान
-मोबाइल की स्क्रीन लैपटॉप की तरह आंख के सामने लाकर देखें
-गर्दन नीचे न करें, इससे आंख और गर्दन दोनों पर बुरा असर आएगा
-स्क्रीन पर लगातार 20 मिनट तक आंखें न गड़ाए रहें, पलकें झपकाते रहें
-स्क्रीन देखने के बाद आंखें फैलाकर देखें, गर्दन इधर-उधर घुमा लें
-गर्दन को दुरुस्त रखने वाली यौगिक क्रियाओं का अभ्यास करें
 
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