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UP: अफसरों की चुप्पी से सुलग रही चिंगारी, न सर्च ऑपरेशन न गिरफ्तारी; कुर्सी डाल बैठी पुलिस, रोक न कोई तलाशी

Tue, 19 Aug 2025 06:49 PM IST
शाहरुख खान अमर उजाला नेटवर्क, फतेहपुर
अमर उजाला नेटवर्क, फतेहपुर Published by: शाहरुख खान Updated Tue, 19 Aug 2025 06:49 PM IST
सार

फतेहपुर में हुई घटना के एक सप्ताह बाद भी मामले में एक गिरफ्तारी भी नहीं हुई है। जिम्मेदारों के सामने बवाल हुआ, फिर भी आरोपियों तक हाथ नहीं पहुंच रहे हैं। नामजद अभी भी मामले को तूल देने में जुटे हैं। बयानबाजी का दौर जारी है।

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UP Fatehpur Mob Violence Case Questions on working style of administration No arrest has been made so far
फतेहपुर में मंदिर-मकबरा विवाद - फोटो : amar ujala

विस्तार

फतेहपुर में धार्मिक स्थल (मंदिर-मकबरा) को लेकर उपजे विवाद को सात दिन बीत चुके हैं, लेकिन पुलिस और प्रशासन की कार्यशैली पर अब गंभीर सवाल उठने लगे हैं। अब तक न कोई गिरफ्तारी हुई है, न ही किसी तरह का सर्च ऑपरेशन चलाया गया है। 
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जबकि इस दौरान घटना से जुड़ा वीडियो जिलेभर में वायरल हो चुका है, जिसे आला अफसर भी देख चुके हैं। हालांकि, अमर उजाला वायरल वीडियो की पुष्टि नहीं करता।

घटना के बाद पुलिस ने 10 नामजद और करीब 150 अज्ञात लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की, लेकिन कार्रवाई के नाम पर अब तक सिर्फ कागजी खानापूरी ही सामने आई है। न किसी का नाम बढ़ाया गया, न ही किसी संदिग्ध को उठाया गया। शिनाख्त के नाम पर पुलिस अभी भी किसी विशेष जांच के इंतजार में बैठी है।
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इस दौरान क्षेत्र के लोग भय में जी रहे हैं। इसके बाद भी पुलिस-प्रशासन ने न तो लाइसेंसी और अवैध हथियारों की पड़ताल की, न ही इलाके में कोई सघन तलाशी अभियान चलाया। संवेदनशील आबूनगर में बस बैरिकेडिंग कर दी गई है, जहां कुछ पुलिसकर्मी तैनात हैं। वे भी किसी आने-जाने वाले से कोई रोक टोक नहीं कर रहे हैं।
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इतना ही नहीं दोनों पक्षों के लोग क्षेत्र में शांति बहाल कराने के बजाय अपना-अपना दावा ठोंकने के लिए सोशल मीडिया पर सक्रिय है। इशके बाद भी प्रशासन की ओर से इन पर अंकुश लगाने की कोशिश तक नहीं की गई है।

 

स्थानीय लोगों का कहना है कि विवाद के शुरू होने से पहले प्रशासन ने कोई सतर्कता नहीं बरती। अब जब मामला संवेदनशील हो चुका है, तब भी हालात को सामान्य बनाने की दिशा में कोई गंभीर पहल नहीं की जा रही।

टीम के जाते ही सुस्ताने लगे पुलिस कर्मी
करीब एक सप्ताह तक कमिश्नर और आईजी ने आबूनगर में कैंप किया था। रविवार को उनके जाते ही सोमवार को पूरे दिन पुलिस आराम के मूड में दिखाई दी। आबूनगर में न तो पुलिस-प्रशासन से कोई बड़ा अधिकारी ही हालत को परखने पहुंचा और न ही माहौल को सामान्य बनाने का कोई दूसरा प्रयास किया गया।
 

तंग गलियां मुश्किल पैदा कर सकती हैं
आबूनगर के करीब सभी प्रवेश द्वार काफी तंग है। भीतर की गलियों की भी यही स्थिति हैं। ऐसे में कोई अनहोनी होने पर गलियों में वज्र वाहन या फिर दमकलों को पहुंचना आसान नहीं होगा। इस पर भी कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। यही वजह है कि पूरे क्षेत्र में अभी सिर्फ इक्का-दुक्का पुलिस की गाड़ियां ही दिखाई दे रही हैं। ऐतिहात के तौर पर सुरक्षा के अन्य इंतजाम नदारद हैं।

ये हैं मामले के मुख्य आरोपी
मकबरा में विवाद के मामले में नामजद भाजपा नेता अभिषेक शुक्ला, आशीष त्रिवेदी, सपा से निष्कासित पप्पू सिंह चौहान, भाजयुमो नेता प्रसून तिवारी, सभासद रितिक पाल, विनय तिवारी, पुष्पराज पटेल, जिला पंचायत सदस्य अजय सिंह उर्फ रिंकू लोहारी, अनुसूचित समाज के नेता देवनाथ धाकड़े व 150 अन्य शामिल हैं। किसी भी आरोपी की गिरफ्तारी नहीं हो सकी है।

 

आरोपियों की गिरफ्तारी के प्रयास किए जा रहे हैं। फिलहाल विभागीय कर्मियों पर कोई कार्रवाई नहीं है। मौके पर शांति व्यवस्था कायम है। पर्याप्त पुलिस और पीएसी धार्मिक विवादित स्थल पर तैनात है।-महेंद्र पाल सिंह, अपर पुलिस अधीक्षक

जमीन के मालिक ने किया 753 गाटा में मंदिर दर्ज होने का दावा
धार्मिक स्थल विवाद (मंदिर-मकबरा) प्रकरण में वर्ष 2012 के पहले तक 753 गाटा संख्या में ठाकुरजी विराजमान मंदिर दर्ज है। पुराने अभिलेखों में मकबरे का कोई उल्लेख नहीं है। यह दावा सोमवार को कलक्ट्रेट पहुंचे खुद को उक्त जमीन का मालिक बताने वाले कानपुर नवीन नगर निवासी विजय प्रताप सिंह ने किया है।

उन्होंने डीएम रविंद्र सिंह से मिलकर उन्हें जमीन संबंधी कुछ कागज भी सौंपे हैं। इससे पूर्व विजय ने अधिवक्ता रामजी सहाय से इसी मुकदमे की पैरवी से संबंधित जानकारी ली। विजय का आरोप है कि उनके पिता के तत्कालीन अधिवक्ता को मिलाकर मकबरा पक्ष ने एक पक्षीय फैसला कराया है। 30 अगस्त को सिविल जज सीनियर डिवीजन कोर्ट में मामले की सुनवाई है।

 

बताया कि 2012 के पहले के अभिलेखों में भूमि गाटा संख्या 753 असोथर निवासी रामनरेश सिंह, जो कि उनके पिता हैं के नाम पर दर्ज है। अब पिता की मृत्यु हो चुकी है। विजय प्रताप खुद ही मामले की पैरवी कर रहे हैं।

 

उनकी ओर से डीएम को दिए गए पत्र में कहा गया है कि स्व. पिता रामनरेश सिंह ने भूमि गाटा संख्या 753 करीब 10 बीघा 18 बिस्वा शकुंतला मानसिंह पत्नी नरेश्वर मानसिंह से 30 दिसंबर 1970 में बैनामा कराया था। इसके बाद पिता का नाम दर्ज हो गया।

आरोप है कि कथित मुतवल्ली मो. अनीस ने सिविल जज सीनियर डिवीजन कोर्ट में 2007 में वाद दायर किया था। इस दौरान उनके पिता वृद्ध हो चुके थे। ऐसे में वह पैरवी करने नहीं आ पाते थे। ऐसी स्थिति में उनके अधिवक्ता को मिलाकर कथित मुतवल्ली ने उनकी जमीन मकबरे के नाम दर्ज करा ली थी।

 

जानकारी होने के बाद 2015 में वाद दायर किया गया। इसके बाद 2023 में सिविल जज ने अपना पुराना फैसला रद्द कर दिया था। इसकी जानकारी होने पर कथित मुतवल्ली ने हाईकोर्ट इलाहाबाद में वाद दाखिल कर रखा है। उधर, सिविल जज सीनियर डिवीजन की अदालत में 30 अगस्त को सुनवाई लगी है।
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