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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Kanpur News ›   Two Convicted in 20-Year-Old Rape Case, Sentenced to Life Imprisonment

हरदोई: 20 साल पुराने दुष्कर्म मामले में दो दोषियों को उम्रकैद, 35 हजार जुर्माना पीड़िता को देने का आदेश

Fri, 11 Sep 2026 09:05 PM IST
प्रसून शुक्ला न्यूज डेस्क, अमर उजाला,हरदोई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला,हरदोई Published by: प्रसून शुक्ला Updated Fri, 11 Sep 2026 09:05 PM IST
सार

Hardoi News: घर में घुसकर महिला से दुष्कर्म के 20 साल पुराने मामले में विशेष न्यायाधीश (एससी एसटी एक्ट) ज्ञानेंद्र त्रिपाठी ने दो आरोपियों को दोषी करार दिया है। दोनों अभियुक्तों को उम्र कैद की सजा सुनाई है। अभियुक्तों पर 35 हजार रुपये का जुर्माना लगाते हुए यह रकम पीड़िता को देने के आदेश भी विशेष न्यायाधीश ने दिए हैं।

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Two Convicted in 20-Year-Old Rape Case, Sentenced to Life Imprisonment
सांकेतिक  - फोटो : सांकेतिक

विस्तार

गुझिया मांगकर घर में घुसा था आरोपी

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मामला पाली थाना क्षेत्र के एक गांव का है। गांव निवासी युवती ने प्राथमिकी में बताया था कि 17 मार्च 2006 की शाम वह अपने आंगन में बैठी थी। इसी दौरान गांव का गुड्डू उर्फ जय प्रकाश पाठक उसके घर में घुस आया। आरोप है कि उसने पहले युवती से होली की गुझिया मांगी और इसके बाद उसे कमरे में ले जाकर दुष्कर्म किया।  इसी दौरान गुड्डू का साथी श्यामू यादव भी वहां पहुंच गया। आरोप है कि श्यामू ने भी युवती के साथ दुष्कर्म किया। घटना के बाद युवती अगले दिन अपने पिता के साथ थाने पहुंची, लेकिन उस समय मुकदमा दर्ज नहीं हुआ।

13 दिन बाद दर्ज हुई थी प्राथमिकी

पीड़िता के अनुसार पुलिस से कार्रवाई नहीं होने के बाद उच्चाधिकारियों से शिकायत की गई। इसके बाद घटना के 13 दिन बाद प्राथमिकी दर्ज की गई थी। सुनवाई के दौरान अभियुक्तों के अधिवक्ता ने प्राथमिकी दर्ज होने में हुई देरी को आधार बनाते हुए मामले को मनगढ़ंत बताया।

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न्यायालय ने इस दलील को खारिज कर दिया। विशेष न्यायाधीश ने माना कि वर्ष 2006 में ग्रामीण क्षेत्र की युवती के लिए घटना के तत्काल बाद पुलिस थाने पहुंचकर प्राथमिकी दर्ज कराना सामाजिक परिस्थितियों, लोक-लाज और अन्य कठिनाइयों के कारण आसान नहीं था। इसलिए प्राथमिकी दर्ज होने में हुई देरी को मामले के खिलाफ आधार नहीं माना जा सकता।

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आठ गवाह और नौ अभिलेखीय साक्ष्य पेश किए गए

मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से आठ गवाह पेश किए गए। इसके अलावा नौ अभिलेखीय साक्ष्य भी न्यायालय के समक्ष रखे गए। दोनों पक्षों के तर्क सुनने और पत्रावली पर मौजूद साक्ष्यों का परीक्षण करने के बाद विशेष न्यायाधीश ने दोनों अभियुक्तों को दोषी माना। अदालत ने दोनों को उम्रकैद की सजा सुनाते हुए 35 हजार रुपये का जुर्माना लगाया। न्यायालय ने जुर्माने की राशि पीड़िता को दिए जाने का आदेश भी दिया है।

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